Rajasthan Crisis: BSP चीफ मायावती ने किया बड़ा खेल! विप जारी कर कहा- गहलोत सरकार के खिलाफ करें वोट

New Delhi: BSP Issues Whip to its MLA: राजस्थान के सियासी संकट (Rajasthan political crisis) मे रोज एक एक नया मोड़ आता जा रहा है।

रविवार को बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने अपने छह विधायकों के लिए विप जारी (BSP Issues Whip to its MLA) करते हुए का कि अगर मतदान की सूरत बनती है तो वे कांग्रेस सरकार के खिलाफ वोट करें। यानी अशोक गहलोत सरकार को मायावती का साथ नहीं मिलेगा।

बीएसपी टिकट पर जो पर छह विधायक चुने गए थे, वो हैं- आर. गुढ़ा, लखन सिंह, दीप चंद, जेएस अवाना, संदीप कुमार और वाजिब अली। बता दें, पिछले साल अगस्त में इन विधायकों ने कांग्रेस के साथ विलय कर लिया था।

विप तोड़ा तो सदस्‍यता जाने का खतरा

बहुजन समाज पार्टी की ओर से जारी विप के अनुसार, सभी विधायकों को राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस की ओर से लाए जाने वाले विश्वास मत के खिलाफ वोट करने को कहा गया है। अगर कोई भी विधायक पार्टी विप के खिलाफ जाकर वोट करता है तो उनके खिलाफ कार्यवाही की जाए और उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द की जाए।

बात दें, कि राजस्थान में बहुजन समाज पार्टी के सभी छह विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए थे। विधायक राजेन्द्र गुढा (उदयपुरवाटी), जोगेंद्र सिंह अवाना (नदबई), वाजिब अली (नगर भरतपुर), लाखन सिंह मीणा (करोली), संदीप यादव (तिजारा) और दीपचंद खेरिया (किशनगढ़ बास) ने पाला बदल लिया था। पिछले साल सितंबर में इन विधायकों ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात के बाद कांग्रेस में शामिल होने की घोषणा की थी।

स्‍पीकर ने कहा था, बसपा के विधायकों को कांग्रेसी माना जाए

विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने पिछले साल 18 सितंबर को एक आदेश पारित किया था, जिसमें घोषणा की गई थी कि छह विधायकों को कांग्रेस का अभिन्न अंग माना जाएगा। बसपा विधायक 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस में एक समूह के तौर पर शामिल हुए थे ताकि दल बदल विरोधी कानून के तहत उनपर कोई कार्रवाई न हो। इसके बाद बसपा के सभी 6 विधायकों ने 4 महीने बाद सदन में कांग्रेस के विधायकों के रूप में शपथ पत्र दाखिल किया। इसी की वजह से सदन में कांग्रेस के पास संख्या 106 हो गई थी।

सोमवार को कांग्रेस के साथ बसपा के विलय पर होगी सुनवाई

बीजेपी के एक विधायक ने राजस्थान हाईकोर्ट में शुक्रवार को याचिका दायर कर बसपा के छह विधायकों के कांग्रेस के साथ हुए विलय को रद्द करने का अनुरोध किया है। इस कदम से राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी को विधानसभा में बहुमत बरकरार रखने में मदद मिली है।

मदन दिलावर द्वारा दायर इस याचिका में विधानसभा अध्यक्ष की “निष्क्रियता” को भी चुनौती दी गई है जिन्होंने बहुजन समाज पार्टी के विधायकों को विधानसभा से अयोग्य ठहराने के उनके अनुरोध पर कोई निर्णय नहीं लिया है। उच्च न्यायालय सोमवार को इस याचिका पर सुनवाई करेगा।

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