कुशीनगर 14 अगस्त ! उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में अखण्ड भारत का बंटवारा किसी देश की भौगोलिक सीमा का बंटवारा नहीं बल्कि लोगों के दिलों और भावनाओं का भी बंटवारा था जो सबसे खूनी घटनाक्रम का दस्तावेज बन गया।
दोनों देशों के बीच बंटवारे की लकीर खिंचते ही रातों रात लाखों लोग अपने ही देश में बेगाने हो गए और मजहब के आधार पर लाखों लोग न चाहते हुए भी जानें को मजबूर हुए। इस अदला-बदली में लाखों लोगों का कत्लेआम, सदी की सबसे बड़ी त्रासदी में बदल गया।
यह बातें उत्तर प्रदेश सरकार में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आयोजित पडरौना नगर मण्डल के मौन जुलूस के समापन पर कहा उन्होंने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पहल पर शुरू हुई विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाने की परम्परा हमें भेदभाव, वैमनस्य और दुर्भावना के जहर को खत्म करने के लिए न केवल प्रेरित करेगा, बल्कि इससे एकता, सामाजिक सद्भाव और मानवीय संवेदनाएं भी मजबूत होंगी।
कहा कि भारत और पाकिस्तान के जिन लोगों ने बंटवारे का दर्द सहा है वो आज तक इसे नहीं भूल पाए हैं। सिर्फ एक फैसले की वजह से लाखों लोगों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा, अपनी जमीन जायदाद छोड़कर चले जाना पड़ा, लाखों लोग मकान-दुकान और संपत्ति से रातोंरात बेदखल होकर सड़क पर आ गए। भारत पाकिस्तान बंटवारे की त्रासदी सदियों तक याद रखी जाएगी।यह बीसवीं सदी की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक रही।
जिलाध्यक्ष प्रेमचन्द मिश्र ने कहा कि 14 अगस्त 1947 को देश ने बंटवारें का दर्द झेला था। पाकिस्तान जहां इसे अपनी आजादी के दिन के रूप में मनाता हैं वहीं, देश में अभी भी हजारों लोग हैं जिनके दिलों में बंटवारे का जख्म और दर्द आज भी ताजा है। लाखों लोग अपना घर, परिवार और रिश्तेदार को छोड़कर भारत से पाकिस्तान और वहां से यहां आए।
इस अवसर पर पडरौना विधायक मनीष जायसवाल मंटू, जिला मंत्री विवेकानंद शुक्ल, जिला मीडिया प्रभारी विश्वरंजन कुमार आनन्द, मण्डल अध्यक्ष प्रमोद साहा सहित सैकड़ों भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।