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Saturday, October 1, 2022

मेरी शराफत को कोई कमजोरी ना समझें… सचिन पायलट के खिलाफ अशोक चांदना के तीखे तेवर बरकरार

जयपुर: हिंडोली से कांग्रेस विधायक अशोक चांदना के तीखे तेवर बरकरार है। कभी सचिन पायलट के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सड़कों पर आन्दोलन करने वाले चांदना इन दिनों पायलट के धुर विरोधी बन गए हैं। अजमेर के पुष्कर में चांदना पर जूते चप्पल फेंकने की घटना के बाद वे खुलकर बयान भी देने लगे है। 12 सितम्बर की रात को चांदना ने सचिन पायलट को ट्विटर पर खुली धमकी दे डाली। इसके दो दिन बाद हिंडोली में भी पायलट समर्थकों को उन्होंने कचरा बता दिया। अब जयपुर में भी मीडिया से बातचीत में चांदना ने अपना रुख साफ कर दिया है। उन्होंने कहा कि मेरी शराफत को कोई मेरी कमजोरी ना समझें । चांदना ने कहा कि उनके भी हजारों समर्थक हैं। जूते फेंकने की घटना के प्रत्युतर में जूते फेंकने शुरू हो गए तो ठीक नहीं होगा।

पायलट समर्थक दो साल से टारगेट कर रहे – चांदना
पुष्कर की घटना के लिए अशोक चांदना सीधे तौर पर सचिन पायलट को जिम्मेदार ठहरा दिया। उन्होंने कहा कि पिछले दो साल से पायलट समर्थक उन्हें टारगेट कर रहे हैं। कुछ दिनों पहले गुर्जर समाज के कार्यक्रम में पायलट समर्थक विधायक ने यहां तक कह दिया कि जिन्होंने सरकार गिराने में पायलट का साथ नहीं दिया, वो सब गद्दार हैं और आगामी चुनावों में गद्दारों को सजा देनी है। पायलट समर्थक विधायक के इस बयान के ठीक दस दिन बाद पुष्कर वाली घटना हो गई। इसका साफ मतलब यही हुआ कि यह सब प्री-प्लेन्ड था। प्रत्यक्ष को प्रमाण देने की जरूरत नहीं है।

इससे पहले किसी कार्यक्रम में ऐसी घटना नहीं हुई
अशोक चांदना ने कहा कि सरकार गिराने की घटना जुलाई 2020 में हुई थी। बीते दो साल में वे गुर्जर समाज के कई कार्यक्रमों में गए लेकिन कभी विरोध झेलना नहीं पड़ा। अब पायलट समर्थक विधायक की ओर से गद्दार कहने और गद्दारों को सजा देने के बयान के इस हरकत का होना साफ इंगित करता है कि जूते फेंकने की घटना अचानक नहीं हुई थी। बीते दो साल में कभी समाज के लोगों में रोष था ही नहीं, यह अचानक कैसे हुआ। प्रदेश के हजारों गुर्जर उनके भी समर्थक हैं। अगर जूते फेंकने की घटना के प्रत्युतर में जूते फेंकने की घटनाएं होंगी तो राजनीति में यह ठीक परम्परा नहीं होगी।

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दोनों में से एक बचेगा वाला बयान राजनैतिक है, झगड़े का नहीं
पायटल को धमकी देते हुए अशोक चांदना ने यह भी कहा था कि “मेरा अभी लड़ने का मूड नहीं है, जिस में लड़ाई लड़ने आ गया तो दोनों में से एक बचेगा।” चांदना ने स्पष्ट किया कि इस ट्वीट का मतलब हाथापाई से नहीं है। यह एक राजनैतिक बयान है। अगर मेरे समर्थक भी विरोधियों पर जूते फेंकने लग जाएगा तो ऐसे राजनीति थोड़े ही होती है। हो सकता है कोई मेरी विचारधारा के समर्थन नहीं करता हो।

इसका तात्पर्य यह तो नहीं कि कोई मेरे पर जूते चप्पल फेंके। चांदना बोले कि मेरा कोई राजनैतिक बैकग्राउंड नहीं है। जो हूं, खुद की मेहनत की बदौलत हूं। मैं सिद्धांतों की राजनीति करता हूं, ओछी हरकतें वाली राजनीति मुझे नहीं आती।
रिपोर्ट – रामस्वरूप लामरोड़

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