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Thursday, December 1, 2022

निशाना बनाया, अवैध गिरफ्तारी… जानें संजय राउत को जमानत देते हुए मुंबई की कोर्ट ने ED को कैसे लगाई फटकार

मुंबई: मुंबई की एक विशेष अदालत ने पात्रा चॉल रीडिवेलपमेंट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस मामे में संजय राउत को जमानत दे दी। कोर्ट ने शिवसेना सांसद को जमानत देते हुए कार्रवाई को ‘अवैध’ बताया। इतना ही नहीं कोर्ट ने इसे ‘निशाना बनाने’(Witch Hunt) की कार्रवाई करार दिया। कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि मामले के मुख्य आरोपी और रियल एस्टेट फर्म एचडीआईएल के राकेश और सारंग वधावन को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कभी गिरफ्तार क्यों नहीं किया? जज ने कहा कि एजेंसी के म्हाडा और अन्य सरकारी विभागों के संबंधित अधिकारियों को गिरफ्तार न करने का कारण कुछ नहीं, बल्कि तत्कालीन केंद्रीय कृषि मंत्री और (महाराष्ट्र के) तत्कालीन मुख्यमंत्री को एक संदेश देना था, जिससे उनके मन में एक भय पैदा हो सके कि वे इस कतार में अगले व्यक्ति हैं।

जज ने कहा, ‘यह एक आश्चर्यजनक रूप से स्वीकार किया गया तथ्य है कि एचडीआईएल के मुख्य आरोपी राकेश और सारंग वधावन को ईडी ने कभी गिरफ्तार नहीं किया, जबकि उन्होंने 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की थी।’ धनशोधन निवारण कानून से संबंधित मामलों के विशेष न्यायाधीश एमजी देशपांडे ने संजय राउत और उनके सहयोगी प्रवीण राउत को जमानत दे दी।

‘राकेश और सारंग वधावन क्यों गिरफ्तार नहीं?’
जज ने कहा, ‘हालांकि, मौजूदा मामले में राकेश और सारंग वधावन प्रमुख भूमिका को देखते हुए भी ईडी ने गिरफ्तार नहीं किया है, जिसकी वजह ईडी ही बेहतर बता सकता है।’ अदालत ने कहा कि वधावन ने अपनी भूमिका स्वीकार भी की है। मूलत: आरोपों के लिए पीएमएलए की धारा 19 के तहत दोनों को गिरफ्तार करने का कोई कारण नहीं था और यह एक नागरिक विवाद के अलावा और कुछ नहीं है।’ पीएमएलए की धारा 19 संबंधित सरकारी अधिकारियों को किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने की शक्ति प्रदान करती है।

‘संजय राउत को क्यों नहीं दिया गया समय?’
न्यायाधीश ने कहा कि वधावन और उनकी फर्म एचडीआईएल ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया था कि उनके गड़बड़ियों के कारण देरी हुई थी और हाई कोर्ट ने इसे स्वीकार भी किया था और ईडी ने इस सब की अनदेखी की है। अदालत ने कहा कि संजय राउत ने ईडी के सामने पेश होने के लिए समय मांगा था, लेकिन यह उन्हें गिरफ्तार करने का कारण नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा, ‘इसलिए मेरा दृढ़ मत है कि पीएमएल अधिनियम के प्रावधानों के तहत आवश्यक योग्यता के बिना दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी मूल रूप से अवैध है।’

संजय राउत की गिरफ्तारी को बिना किसी कारण के अवैध बताते हुए और विच हंट का प्रथम दृष्टया संकेत, पीएमएलए अदालत ने बुधवार को लगभग 100 दिन जेल में बिताने वाले शिवसेना सांसद (61) को जमानत दे दी।

‘PMLA का उद्देश्य जब्ती, अवैध गिरफ्तारी नहीं’
राउत को ईडी ने गोरेगांव पश्चिम में पात्रा चॉल के पुनर्विकास में कथित अनियमितताओं से जुड़े 1,034 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। विशेष न्यायाधीश एमजी देशपांडे ने संजय राउत के दोस्त, व्यवसायी प्रवीण राउत को भी राहत दी। जज ने कहा कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट का मुख्य उद्देश्य जब्ती है न कि अवैध गिरफ्तारी।

आधी रात छापे पर भी सवाल
122 पन्नों के आदेश में न्यायाधीश ने संजय राउत को आधी रात को गिरफ्तार करने की कानूनी आवश्यकता पर भी सवाल उठाया। संजय राउत को 1 अगस्त को 12.35 बजे गिरफ्तार किया गया दिखाया गया था। अदालत ने कहा कि 31 जुलाई को उनके घर पर छापा मारा गया था और उन्हें पूरे दिन कहीं भी जाने की इजाजत नहीं थी। न्यायाधीश ने उन स्थितियों का भी उल्लेख किया जिसमें संजय राउत के यह कहने के बावजूद कि उनकी दो बार एंजियोप्लास्टी हुई है और उनके दिल में छह स्टेंट हैं, उन्हें बिना वेंटिलेशन वाले कमरे में रखा गया।

ईडी ने अदालत से शुक्रवार तक आदेश को लागू नहीं करने का आग्रह किया था। हालांकि, प्रवीण राउत का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील आबाद पोंडा ने इसका विरोध किया। संजय राउत का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ वकील अशोक मुंडेरगी और वकील विक्रांत सबने ने किया। ईडी की याचिका को खारिज करते हुए न्यायाधीश ने कहा, ‘दोनों आरोपियों को दो-दो महीने के पीआर बांड के साथ दो-दो लाख रुपये की अस्थायी नकद जमानत पर रिहा करने की अनुमति है।’

‘राउत के स्पष्टीकरण को नहीं रखा गया ध्यान में’
अदालत ने यह भी नोट किया कि मनी लॉन्ड्रिंग दिखाने के लिए उद्धृत लेनदेन पर आरोपी के दिए गए स्पष्टीकरण को ध्यान में नहीं रखा गया था। एक उदाहरण में, संजय राउत ने प्रस्तुत किया था कि माधुरी प्रवीण राउत से पर्सनल लोन के रूप में 55 लाख रुपये लिए थे, और राज्यसभा चुनाव के लिए प्रस्तुत हलफनामे में इसका उल्लेख भी किया गया था।

‘मनी लॉन्ड्रिंग के दावे से ज्यादा कुर्क की संजय राउत की प्रॉपर्टी’
न्यायाधीश ने आगे कहा कि गवाहों के बयानों में एचडीआईएल के प्रमोटरों, वधावन की प्रमुख भूमिका का उल्लेख किया गया था, लेकिन उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया था, जबकि राउत, जिनका अपराध की आय उत्पन्न करने, धन शोधन या आपराधिक गतिविधियों से संबंधित कोई संबंध नहीं था। अनुसूचित अपराध, गिरफ्तार किया गया। जबकि ईडी ने प्रवीण राउत को अपराध की आय के 10% से जोड़ा था, संजय राउत को दी गई राशि केवल 1% के आसपास थी। विशेष न्यायाधीश ने कहा, ‘जाहिर है, ईडी ने प्रवीण राउत की 72 करोड़ रुपये की संपत्ति और संजय राउत की संपत्ति को मनी लॉन्ड्रिंग के दावे से ज्यादा कुर्क किया है।’

राउत ने हाथ जोड़कर आर्थर रोड जेल वापस ले जाने से पहले अदालत का आभार व्यक्त किया, जहां से उन्हें शाम 6.45 बजे रिहा किया गया। दोपहर 1.10 बजे आदेश सुनाए जाने के तुरंत बाद उनके समर्थकों ने तालियां बजानी शुरू कर दी। कोर्ट के बाहर एक गुट ने पटाखे फोड़े और एक दूसरे पर गुलाल उड़ाया।

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