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बिहार में लॉक डाउन प्रथम चरण में मरीजों की संख्या कम थी, आज स्थिति खराब है : हम

पटना, 13 मई (प्रबीन कुमार)। हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (से.) के प्रदेश अध्यक्ष बीएल बैश्यन्त्री ने कहा कि लॉक डाउन का अब चौथा चरण शुरू होने वाला है। भारत के साथ-साथ बिहार में भी प्रथम चरण में मरीजों की संख्या कम थी। वही आज स्थिति खराब है। लॉक डाउन लगाने के समय यह कहा गया था की जो जहां है वही रहे और उनके लिए वही व्यवस्था की जाएगी। परंतु लॉक डाउन लगते ही सारे कारखाने के मालिकों ने कारखाना बंद होने के बाद मजदूरों को उनकी कमाई हुई राशि उन्हें देकर कारखाना से निकाल दिया और जो लोग किराए के मकान में थे वह अपनी कमाई से खाना खा रहे थे। जब अपना कमाया हुआ संपूर्ण राशि समाप्त हो गया। उन्हें खाने के लिए नहीं मिल रहा था। तो उन लोगों ने अपने अपने प्रदेश में आने के लिए सरकार से गुहार लगाई। परंतु उसकी गुहार नहीं सुनी तब लोग अपने बाल बच्चा के साथ पैदल ही अपने प्रदेश जाने के लिए निकल पड़े। बहुत-बहुत जोर देने के बाद सरकार ने विशेष ट्रेन चलाई।

बीएल बैश्यन्त्री ने कहा कि तब तक बहुत लोग रोड पर निकल चुके थे। जो लोग दिल्ली, पंजाब, महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा से यूपी, बिहार इत्यादि प्रदेशों में आने लगे। पैदल चलते चलते उनकी हालत बद से बदतर होने लगा। आज भी बहुत सारे मजदूर अपनी बारी का ट्रेन के इंतजार कर रहा है। प्रदेश सरकारों ने भी और रेल मंत्रालय ने भी मुफ्त में ट्रेन चलाने के लिए अपना हाथ उठा लिया। नतीजा यह हुआ है। जो मजदूर पैदल चल रहे थे। या ट्रक पर सवार होकर आ रहे थे। साइकिल से आ रहे थे और टेंपो से आरहे थे। उनमें से ऐसे भी मजदूर की कहानी है जिनके बच्चे उनके गोद में मर गए। माता पिता दुर्घटनाग्रस्त हो गए। स्थिति इतनी भयावह है। इसका वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता। यदि मजदूर को अपना प्रदेश भेजना ही था तो यह नहीं कहना चाहिए था की जो जहां है उनकी व्यवस्था वही हो जाएगी। इतनी बड़ी झूठ बोलकर मजदूरों को बर्बाद होने के लिए छोड़ दिया।

बीएल बैश्यन्त्री ने कहा कि आज मजदूर रेल के पटरी पर कट के मर रहे हैं या रोड पर भूखे प्यासे चलते चलते मर रहे। इसके लिए कौन दोषी है। यह तो आने वाला समय निर्धारित करेगा। कोरोना वायरस से जितने लोग नहीं मरेंगे इतने लोग भूख से मर जाएंगे। अभी जब लोग पैदल चलकर अपने प्रदेश आ रहे हैं। और ट्रेनों से आ रहे हैं। बसों से आ रहे हैं। ट्रकों से आ रहे हैं तो जो आज आइसोलेशन सेंटर बनाए गए हैं। उनकी स्थिति बहुत ही भयावह है। बीएल बैश्यन्त्री ने कहा कि सेंटर में बहुत सारे लोगों को रखा गया है। परंतु उनके लिए न तो पर्याप्त बाथरूम है ना पाखाना खाना है। खाना में जो दिया जाता है, वह खाने योग्य भी नहीं है। कहीं-कहीं तो भात है तो दाल जग नदारद सौ व्यक्ति के बदले 90 व्यक्तियों को ही खाना मिल रहा है। सरकार की व्यवस्था इस कार्य में लगे सरकारी कर्मियों का व्यवहार बहुत ही खराब है। ब्लॉक स्तर पर अभी तक पर्याप्त राशि प्रखंड कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। सैनिटाइजेशन इत्यादि का कार्य सही ढंग से नहीं हो रहा है।

बीएल बैश्यन्त्री ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री के द्वारा पदाधिकारियों को बार-बार निर्देश दिया जा रहा है की आइसोलेशन सेंटर पर ध्यान दिया जाए और लोगों को सारी सुविधाएं मुहैया कराई जाए। परंतु इसकी अनसुनी की जा रही है। बहुत सारे आइसोलेशन सेंटर से मजदूर बिना रखवाली के निकल कर अगल बगल रोड पर घूमते नजर आ रहे हैं। जबकि प्रत्येक सेंटर पर पुलिस की व्यवस्था की जानी चाहिए। जो बाहर से आने वाले प्रवासियों को जांच के बाद ही बाहर निकलने की अनुमति दे। जांच का कार्य भी जिस गति से होना चाहिए वह नहीं हो रहा है। इस कार्य में भी गति लाया जाए। आइसोलेशन सेंटर का ठीक से रखरखाव किया जाए। अभी बिहार की स्थिति पर केंद्र सरकार को अधिक ध्यान देने की के साथ-साथ अधिक पैकेज दिया जाना चाहिए। ताकि बाहर से आने वाले लाखों मजदूरों का व्यवस्था किया जा सके।

बीएल बैश्यन्त्री ने कहा कि मेरा अनुरोध है प्रत्येक बिहारी वासियों का यह कर्तव्य है की व्यवहार से आ रहे अपने भाई बहनों का ध्यान रखें और अपना भी ध्यान रखें। सतर्क रहें घर के अंदर रहे। कोरोनावायरस जीने के लिए प्रत्येक 10 मिनट पर अपने हाथ की सफाई किसी भी साबुन से करें। बाहर निकलने पर मुंह में मास्क लगाएं और आपस में 2 गज की दूरी बनाकर रखें। भीड़-भाड़ वाली जगह पर नहीं जाएं। अपने और अपने पड़ोस के लोगों के साथ साथ अपने परिवार का भी ध्यान रखें।

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