1 ‘करोड़ी’ टीचर पर फजीहत: यूपी में अब हर कर्मचारी, शिक्षक के दस्तावेजों की होगी जांच

New Delhi: एक नाम पर 25 कस्तूरबा विद्यालयों में शिक्षिका की नौकरी और भुगतान का मामले (Fraud in Kasturba Vidyalaya) सामने आने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग की नींद टूटी है। बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी के निर्देश पर अब कस्तूरबा विद्यालयों के शिक्षकों के दस्तावेज जांचे जाएंगे।

राज्य परियोजना निदेशक विजय किरन आनंद ने सोमवार को सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों से कहा है कि कस्तूरबा विद्यालयों (Fraud in Kasturba Vidyalaya) के सभी शैक्षिक और गैर शैक्षिक स्टाफ के दस्तावेजों की जांच कर 26 जून तक रिपोर्ट भेजी जाए।

परियोजना निदेशक ने लिखा है कि कस्तूरबा विद्यालयों में कार्यरत सभी शैक्षिक/शिक्षणेतर स्टाफ का चयन जनपदीय समिति संविदा पर करती है। चयन प्रक्रिया में साफ लिखा है कि अभ्यर्थियों के शैक्षिक योग्यता संबंधित प्रमाणपत्रों का सत्यापन अनिवार्य है।

कार्यभार ग्रहण करने के बाद मूल अभिलेखों का सत्यापन करने पर ही भुगतान होगा। इसलिए संबंधित अभिलेखों का फिर सत्यापन कर रिपोर्ट शासन को भेजी जाए। इसकी एक प्रति विद्यालयों में सुरक्षित रखी जाएगी।

इन दस्तावेजों का होगा सत्यापन

हाईस्कूल, इंटरमीडिएट की मार्कशीट-सर्टिफिकेट, स्नातक की मार्कशीट, बीएड, टीईटी की मार्कशीट-सर्टिफिकेट, मूल निवास प्रमाणपत्र, आधार कार्ड।

बड़े कब आएंगे जद में?

फर्जी प्रमाणपत्र या फोटो के नाम पर 25 स्कूलों में नौकरी करने की आरोपी महिला को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि, प्रक्रिया के पन्ने पलटें तो सवालों के घेरे में बड़े भी हैं। साल 2016 के शासनादेश में साफ है कि काउंसलिंग के समय भी मूल अभिलेखों का सत्यापन किया जाएगा और सत्यापन के बाद ही भुगतान होगा। ऐसे में बिना अभिलेखों के सत्यापन के आखिर नियुक्ति किस आधार पर दी गई?

सूत्रों की मानें तो अलग अलग जगहों से करीब 12 लाख रुपये का भुगतान अब तक मानदेय के रूप में हो चुका है। अब सवाल यह है कि यह भुगतान किस आधार पर किया गया? इससे साफ है कि जिन कस्तूरबा विद्यालयों में एक ही दस्तावेज के आधार पर नियुक्ति दी गईं, वहां की जनपदीय समिति की भूमिका सवालों के घेरे में है।

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