कृषि बिलों के विरोध में भारतीय किसान यूनियन द्वारा सौंपा गया ज्ञापन

Bharatiya Kisan Union

-दिल्ली में बैठे किसानों के आह्वान पर देश भर में हुआ चक्काजाम

पन्ना, 07 फरवरी (एमएस खान/वेबवार्ता)। किसानों के देशव्यापी आंदोलन के बावजूद सरकार अपने कृषि कानूनों को वापस लेने के मूड में नहीं है। किसान भी सरकार द्वारा जबरन थोपे जा रहे कृषि कानूनों की वापसी तक प्रदर्शन करने के लिये तैयार हैं हालांकि किसानों ने इस आंदोलन की बड़ी कीमत अपने 60 से अधिक साथियों की मौत से चुकाई है और पिछले 75 दिनों से आंदोलन कर रहे किसानों पर सरकारद्वारा सैकड़ों मुक़दमे लाद दिए गए हैं और दर्जनों किसानों को जेल में डाल दिया गया है।

इस सब के बाद भी किसान कृषि कानूनों की वापसी तक लड़ाई जारी रखने के लिये तैयार हैं। किसान आंदोलन के बारे में गोदी मीडिया द्वारा प्रचारित किया गया कि यह आंदोलन पंजाब हरियाणा तक सीमित है और यहां के किसान सरकार द्वारा बनाये गए कृषि सुधार कानूनों का विरोध कर रहे हैं। किंतु दिल्ली में आंदोलनरत देश भर के बैठे किसानों द्वारा जब विगत 6 फ़रवरी को देशव्यापी चक्काजाम का आह्वान किया गया तो इसका असर पूरे देश में देखने को मिला।

गोदी मीडिया द्वारा दुष्प्रचार किया गया कि पंजाब और हरियाणा के किसान ही कृषि बिल का विरोध कर रहे हैं, समूचे देश से सरकारी कृषि बिल के विरोध में उठ रहीं आवाजों ने गोदी मीडिया के दावों को उजागर कर दिया। किसानों की एकता ने सरकार बहादुर को जरूर परेशान कर दिया है।

पन्ना में भारतीय किसान यूनियन और अनुसूचित जाति जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग युवा संघ द्वारा दिल्ली में चल रही किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया है। ज्ञापन में बताया गया है कि किसानों द्वारा 26 नवंबर 2020 से लगातार शांतिपूर्ण आंदोलन किया जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा लाठीचार्ज, आंसू गैस और फर्जी मुकदमा दर्ज किए जा रही हैं।

किसान उपज व्यापार एवं वाणिज्य विधेयक के जरिए व्यापारी मंडी के बाहर कभी भी खरीद सकता है इससे मंडी व्यवस्था धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी, जिससे किसानों को उचित मूल्य मिलना संभव नहीं होगा, और बिचैलियों का बोलबाला होगा जो किसान हित में नहीं है। व्यापारियों को स्टॉक करने की क्षमता अनलिमिटेड कर दी गई है, जिससे बड़े व्यापारी घराने देश का संपूर्ण अनाज का भंडारण करने के बाद उनके ब्लैक मार्केटिंग करने का रास्ता खुल जाएगा।

इस कानून से किसानों एवं उपभोक्ताओं दोनों की लूट होगी, किसान अपनी जमीन पर मजदूर बनकर रह जाएंगे, कांटेक्ट फॉर्मिंग की गाइडलाइन में फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य का किसी प्रकार का जिक्र नहीं किया गया है। न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानून के दायरे में लाने की मांग की गई है। ज्ञापन के दौरान भारतीय किसान यूनियन के ब्लाक अध्यक्ष कमलेश पटेल बाबाजी के साथ बेटा लाल यादव, तेज सिंह यादव, जग प्रसाद, लखन सिंह, जेटालाल, मलखान सिंह, कमल सिंह, रामेश्वर सिंह, बैजू सहित काफी संख्या में किसान शामिल रहे।