महबूबा मुफ्ती के बदले सुर, बोलीं- जम्मू-कश्मीर के झंडे के साथ ही उठाऊंगी तिरंगा

New Delhi: जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) के तिरंगा (Tricolor) न उठाने के बयान को लेकर राज्य में बीते दिनों जमकर बवाल मचा था। मुफ्ती ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अब अपने बयान में ‘करेक्शन’ किया है।

उन्होंने (Mehbooba Mufti) सोमवार को कहा कि विधायक बनने के बाद उन्होंने जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के संविधान में आस्था रखने और भारत की एकता और अखंडता की रक्षा करने की शपथ ली थी। यह दोनों चीजें एक-दूसरे से इंटरलिंक हैं। ऐसे में वह जम्मू-कश्मीर के झंडे के साथ तिरंगा (Tricolor) उठाने के लिए तैयार हैं।

गौरतलब है कि 14 महीने की हिरासत में रहने के बाद मुफ्ती (Mehbooba Mufti) जब रिहा हुई थीं तब उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा था कि आर्टिकल 370 के प्रावधानों की बहाली होने तक वह तिरंगा नहीं उठाएंगी।

महबूबा (Mehbooba Mufti) के इस बयान पर जम्मू-कश्मीर में जमकर बवाल हुआ था। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने पीडीपी के कार्यालय के सामने तिरंगा लेकर प्रदर्शन किया था। वहीं बयान के विरोध में श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने जा रहे बीजेपी के तीन कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था।

आरएसएस पर निशाना

अपने 5 दिन के जम्मू दौरे पर पहुंची महबूबा ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि हमने खासतौर पर कश्मीरियों ने सालों तक हजारों कार्यकर्ताओं की शहादत की कीमत पर तिरंगे को ऊंचा रखा था।

आरएसएस और बीजेपी पर हमला बोलते हुए मुफ्ती ने बिना नाम लिए इशारों में कहा, ‘हाफ पैंट पहनकर घूमने वाले लोगों के नेता जहां बैठते हैं, उनके मुख्यालय पर तिरंगा नहीं फहराया जाता और वे लोग हमें राष्ट्रीय ध्वज पर सबक दे रहे हैं।’

महबूबा ने कहा, ‘बीजेपी सदस्यों समेत हम सबने विधानसभा और विधान परिषद में शपथ ली थी कि हम जम्मू-कश्मीर के संविधान के प्रति आस्था रखेंगे और भारत की अखंडता और संप्रभुता बनाए रखेंगे। पहले तो यह जम्मू-कश्मीर का संविधान था, फिर देश की अखंडता और संप्रभुता थी। यह क्या है? उन लोगों ने एक उंगली काट दी और दूसरी छोड़ दी। यह सही नहीं है।’

‘भारत की संप्रभुता और अखंडता को बरकरार रखूंगी’

यह पूछे जाने पर कि क्या वह आगे तिरंगा थामेंगी, महबूबा ने कहा, ‘मैं पहले ही बता चुकी हूं कि जब मैं विधायक बनी थी तब मैंने जम्मू-कश्मीर के संविधान की शपथ ली थी कि मैं संविधान के प्रति आस्था रखूंगी और भारत की संप्रभुता और अखंडता को बरकरार रखूंगी। यह दोनों इंटरलिंक हैं। जम्मू-कश्मीर का झंडा और भारत का ध्वज, मैं यह दोनों एक साथ पकड़ूंगी। मैं कह रही हूं कि हमें हमारा झंडा और संविधान वापस कीजिए, जिसे आपने रात के अंधेरों में साजिश करने के बाद दिनदहाड़े लूट लिया था उसे ब्याज सहित वापस लौटाना पड़ेगा।’

महबूबा ने कहा कि नागालैंड के लोगों ने हाल ही में कहा कि वे इस देश का झंडा और संविधान स्वीकार नहीं करते। ये हाफ पैंट वाले लोग उनके खिलाफ मार्च क्यों नहीं निकालते? जब मैंने कहा कि मैं दोनों ध्वज एक साथ उठाऊंगी तो उन लोगों ने मेरा विरोध किया, मेरे पुतले जलाए लेकिन जब नागालैंड के लोग ऐसा कहते हैं तो कोई आवाज नहीं होती। टीवी पर कोई डिबेट नहीं होता।

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