यूपी: मायावती अकेले लड़ेगी चुनाव, इस बार नहीं दिखेगा कोई महागठबंधन, ये होंगे सियासी समीकरण

Webvarta Desk: Mayawati on up Election 2020: यूपी में विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Election 2020) में अभी एक साल से ज्यादा का वक्त है लेकिन यहां अभी से हलचल शुरू हो गई है। आज बीएसपी सुप्रीमो मायावती (Mayawati) ने भी घोषणा कर दी है कि यूपी और उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी अकेले लड़ेंगी।

इससे पहले पिछले दिनों समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने ऐलान किया था कि वह किसी बड़े दल के साथ गठबंधन नहीं करेंगे। वहीं ऐसे में इस बार यूपी में चारों बड़े दल बीजेपी, सपा, बीएसपी और कांग्रेस अलग-अलग चुनाव लड़ते नजर आएंगे।

इससे पहले 2017 विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Election 2020) में सपा- कांग्रेस और 2019 लोकसभा चुनाव में सपा-बीएसपी का गठबंधन घाटे का सौदा साबित हुआ है। वहीं हालिया बिहार चुनाव में भी महागठबंधन को करारी हार देखनी पड़ी। यही वजह है कि अब यूपी में होने वाले अगले अहम चुनाव में यहां राजनीतिक पार्टियां फूंक-फूंककर कदम रख रही हैं और महागठबंधन से दूरी बनाकर चलने का ऐलान कर रही हैं।

यूपी में बने नए सियासी समीकरण

जहां एक ओर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से लेकर बड़े नेता बीएसपी सुप्रीमो मायावती को जन्मदिन की बधाई दे रहे थे, वहीं मायावती ने समाचार एजेंसी एएनआई को संबोधित करते हुए ऐलान किया कि बीएसपी आगामी यूपी और उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में किसी पार्टी से गठबंधन नहीं करेगी। मायावती ने माना कि गठबंधन से नुकसान होता है।

इसी के साथ मायावती ने यह भी ऐलान किया कि यूपी में आगामी चुनाव में उनकी जीत तय है। मायावती के इस ऐलान के बाद यूपी की राजनीति में कई सियासी समीकरण बन रहे हैं। जनता के सामने इस बार चारों बड़े दलों के अलावा ओवैसी और राजभर का गठबंधन और आम आदमी पार्टी का भी विकल्प होगा जो पहली बार यूपी में विधानसभा चुनाव लड़ने जा रहे हैं।

राजभर और ओवैसी बढ़ाएंगे अखिलेश-माया की टेंशन

एनडीए के पूर्व सहयोगी और योगी सरकार में पूर्व मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने यूपी में छोटे और क्षेत्रीय दलों को साथ लेकर भागीदारी संकल्प मोर्चा का गठन किया है। राजभर को इस मोर्चे में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का साथ मिल गया है।

पिछले दिनों ओवैसी ने लखनऊ में राजभर से मुलाकात भी की थी। इसके बाद हाल ही में वह अखिलेश यादव के गढ़ आजमगढ़ पहुंचे थे। विधानसभा चुनाव से पहले यूपी की सियासी नब्ज भांपने के लिए ओवैसी के राजभर के साथ मिलकर पंचायत चुनाव में भी उतरने की संभावना है।

आम आदमी पार्टी ने उतारी विधायकों की फौज

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने भी यूपी विधानसभा और पंचायत चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। आम आदमी पार्टी भी चुनाव के लिए जोर-शोर से तैयारी कर रही है। आम आदमी पार्टी ने अपने 40 विधायकों की फौज यूपी में उतार दी है।

पिछले दिनों सोमनाथ भारती भी यहां आए थे जिनके दौरे पर काफी विवाद हुआ था। आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सांसद संजय सिंह के रूप में अपने सीएम कैंडिडेट की भी घोषणा कर दी है। इसके अलावा दिल्ली विधानसभा में चीफ विप दिलीप पांडेय को पंचायत चुनाव अभियान प्रभारी बनाया गया है।

अखिलेश को गठबंधन से हुआ बुरा अनुभव

बिहार चुनाव के नतीजों के बाद अखिलेश यादव ने भी ऐलान किया था कि सपा इस बार बड़े दलों के साथ गठबंधन न करके छोटे दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। अखिलेश यादव ने कहा था कि बड़ी पार्टियों से गठबंधन को लेकर उनका बुरा अनुभव रहा है, इस वजह से इस बार छोटे दलों के साथ गठबंधन करेंगे। सपा ने महान दल के साथ हाथ मिलाया है और उपचुनाव में राष्‍ट्रीय लोकदल के लिए एक सीट छोड़ी थी, जिसके साफ है कि आगे भी वह अजित सिंह और जयंत चौधरी को साथ लेकर चल सकते हैं।

2017 और 2019 में महागठबंधन सपा को पड़ा भारी

पिछले विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने कांग्रेस के साथ गठबंधन कर कहा था- ‘यूपी को ये साथ पसंद है’ लेकिन उन्हें यह साथ इतना महंगा पड़ा कि सत्‍ता तक गंवानी पड़ गई। इसके बाद 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में अखिलेश ने मायावती के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा, लेकिन सपा सिर्फ पांच सीटों पर ही सिमट गई जबकि 2014 में एक भी सीट न जीतने वाली बीएसपी को 10 सीटें मिल गईं। शायद यही वजह है कि अखिलेश अब बड़े दलों के बजाय छोटे दलों के साथ चुनाव लड़ने के फॉर्म्युले पर चलना चाहते हैं।

कांग्रेस भी अकेले लड़ेगी चुनाव

अखिलेश और मायावती की तरह ही कांग्रेस भी अकेले चुनाव लड़ने का मन बना रही है। कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनाव में वे बड़ी या छोटी किसी भी पार्टी से गठबंधन नहीं करेंगे और सभी 403 सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ेंगे। कांग्रेस जमीनी स्तर पर अपना संगठन मजबूत बनाने में लगी है। साथ ही प्रदेश की 60 हजार ग्राम सभाओं पर ग्राम कांग्रेस कमेटियों का गठन करने का लक्ष्य बनाया है। वहीं कांग्रेस महासचिव और यूपी की प्रभारी प्रियंका गांधी भी मिशन-2022 का जायजा लेने के लिए आने वाली हैं।

बीजेपी की नजर पंचायत चुनाव पर

बात करें सत्ताधारी दल बीजेपी की तो फिलहाल उसके भी अकेले चुनाव लड़ने की ही योजना है। बता दें कि बीजेपी ने पिछला चुनाव भी अपना दल और राजभर की सुभासपा के साथ गठबंधन में लड़ा था। फिलहाल बीजेपी पंचायत चुनाव को लेकर अपनी नजरें गढ़ाए हुए है। कुल मिलाकर इस बार यूपी विधानसभा चुनाव दिलचस्प होने वाला है। जहां एक ओर चारों बड़े दल अलग-अलग चुनाव लड़ेंगे तो वहीं ओवैसी और आम आदमी पार्टी भी पहली बार यूपी में अपना दम दिखाएंगे।