नीम हकीम बने मरीजों की जान के दुश्मन

Quack became the enemy of patients' lives

-क्या जिला चिकित्सा अधिकारी के इशारे पर चल रहे हैं अवैध क्लीनिक?

-किसी के पास नहीं है बायोमेडिकल वैस्ट का लाइसेंस

-मुकेश शर्मा-

ग्वालियर/भिण्ड, 30 अगस्त (वेब वार्ता)। प्रदेश के भिण्ड जिले का मौ कस्वा यूं तो कागजों में तहसील बन चुका है पर तहसील जैसी कोई सुविधा आम आदमी के लिए उपलब्ध नहीं है। कस्बा में बो सभी अवैध कार्य होते हैं जिन्हें देखकर इंसानियत शर्मसार हो जाये।

मानवता ईश्वर के लिए कल्याण संस्था परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अब्दुल हमीद ने हाल ही में राज्य सरकार और जिला प्रशासन का ध्यान एक ऐसे मामले की और आकृष्ट कराया है जिसे सुन एवं देख कर लोग दंग रह गए श्री हमीद द्वारा मौ कस्बा में लगभग एक सैकड़ा झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा आम आदमी की जान से खिलवाड़ का मामला सरकार और प्रशासन की नजर में लाया गया जिससे पूरा जिला प्रशासन सकते में है। मौ में खुलेआम बगैर पंजीयन के चल रहे अवैध क्लीनिकों एवं पैथोलॉजी लैबों को आखिर किसका संरक्षण है?

जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजीत मिश्रा, स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी या मौ पुलिस? सूत्र बताते हैं भिंड जिले के स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का इन फर्जी क्लीनिकों एवं लैबो को खुला संरक्षण है क्योंकि किसी भी क्लीनिक का पंजीयन नहीं है और लैबों पर कोई पैथोलोजिस्ट चिकित्सक के अलावा डिपोलोमा होल्डर मेल या फीमेल नर्स नहीं है इसके अलावा एक भी क्लीनिक और लैब के पास बायोमेडिकल वैस्ट नष्ट करने के लिए प्रदूषण बोर्ड का लाइसेंस नहीं है जो सरेआम जनता एवं मरीज की जान के साथ खिलवाड़ है?

इतना ही नहीं इन क्लीनिकों में कुछ तो ऐसे चिकित्सकों के क्लीनिक हैं जो सरकारी नोकरी कहीं और कर रहे हैं और निजी क्लीनिक मौ में चलाते हैं आश्चर्य की बात तो ये है कि उनका पंजीयन है और न प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का लाइसेंस। श्री हमीद ने आगे कहा है कि आम आदमी की जिंदगी चंद पैशों के आगे जिला प्रशासन ने सस्ती करदी है। झोलाछाप डॉक्टर प्रशासन की नाक के नीचे खुले आम मौत का खेल रहे हैं और प्रशासन की कान पर जूं तक नहीं रेंगती आखिर क्यों नहीं होती कोई बड़ी कार्रवाई? क्यों प्रशासन चुप्पी साधे हुए हैं? क्या भिण्ड सीएमएचओ की मिलीभगत है?

हमीद ने कहा है कि सीएमएचओ भिंड डॉ. अजीत मिश्रा को मैंने खुद कॉल लगाकर बताया कि 1मौ में सैकड़ा से भी ज्यादा अवैध क्लीनिक लोगों की जानसे खिलवाड़ कर रहे हैं यूं तो मौ कस्बा में एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद भी है और बो भी भगवान भरोशे है सिवाय एमएलसी में पैसे के कोई काम नहीं है फर्जी एमएलसी यहां आम बात है? झोलाछाप चिकित्सक अवैध क्लीनिकों की आड़ में आम आदमी की मूर्ख बना रहे हैं उक्त चिकित्सक गंभीर मरीज को अपने यहां भर्ती करके थोड़ी बहुत देर में अटेंडेंट के दिमाग मे भय बिठाकर मरीज को ग्वालियर रेफर कर देते हैं वहां भी इनका कमीशन और नर्सिंग होम फिक्स होता है।

यानि मरीज यहां भी लूटता है और ग्वालियर में भी पर इससे झोलाछापों को कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि उनकी तो ऊंगलियां घी और सर कढ़ाई में है मर ओर लुट तो आम आदमी रहा है उक्त क्लीनिक सरकार अथवा प्रशासन के संरक्षण में लोगों की जिंदगियों से सरेआम खेल रहे हैं। आखिर प्रशासन इन पर कार्रवाई क्यों नहीं करता क्या लक्ष्मी की कृपा बरस रही है? जो आज तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजीत ने गोलमोल बातें कीं परन्तु कोई संतोषजनक जवाब देते नहीं बना जिला स्वास्थ्य अधिकारी एक तरह से पल्ला झाड़ते हुए नजर आए सवाल यह उठता है क्या अवैध क्लीनिक चलाने वाले फर्जी चिकित्सक विभाग और अन्य प्रशासनिक अधिकरियों को मासिक या वार्षिक चढ़ावा चढ़ाते हैं जो इतनी कृपा बरस रही है? अगर चढ़ावा नहीं देते तो स्वास्थ्य कार्यवाही क्यों नहीं करता? लोगों की जिंदगी का तमाशा बनाने बाले ये साक्षात यमदूत आखिर कबतक, प्रशासन अधिकारियों की नाक के नीचे यह खेल खेलते रहेंगे?

श्री हमीद ने आगे बताया कि बहुत जल्द आरटीआई के जरिए स्वास्थ्य विभाग के बड़े-बड़े डॉक्टरों की भ्रष्टाचार की जन्मकुंडली को मैं प्रमाण के साथ पब्लिक के सामने उजागर करूंगा। यहां यह बताना मुनासिब होगा कि जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजीत मिश्रा को एक भाजपा नेता का खुला संरक्षण है उसी भाजपा नेता के भाई अस्पताल में दबाओं की सप्लाई करते हैं, तभी अस्पताल परिसर में स्थित पूरा कुआं अन एक्सपायर दबाओं से भर जाता है और प्रशासन कार्यवाही के नाम पर वही ढाक के तीन पात? इसके अलाबा डॉ. अजीत मिश्रा की दवंगई के किस्से जग जाहिर हैं कोई इनकी सच्चाई उजागर करता है तो कुछ नर्सों के माध्यम से उस व्यक्ति को दबाने अथबा ब्लैकमेल करते हैं? खैर देखते हैं जिले में मौत का खेल खेलने बाले अवैध क्लीनिकों पर अस्पताल प्रबंधन या जिला प्रशासन क्या कार्यवाही करता है?

जहां तक मुझे जानकारी है मौ में कोई पंजिकृत अस्पताल नहीं है बैसे अधिकृत जानकारी आपको जिला अस्पताल से मिलेगी क्योंकि इनका पंजीयन वहीं से होता है।

-डॉ आलोक शर्मा, विकास खण्ड चिकित्सा अधिकारी गौहद जिला भिण्ड