एक तो पत्रकार ऊपर से प्रशासन की मार

One journalist is hitting the administration from above

-भिण्ड में पत्रकारों की शामत

-जिंदगी तूंने जो ढाए हैं सितम उनसे मैं बे-खबर नहीं

-मुकेश शर्मा-

ग्वालियर/भिण्ड, 10 सितंबर (वेब वार्ता)। जी, हां ऊपर लिखी दो लाइनें चंबल अंचल के भिण्ड जिले के पत्रकारों पर सटीक बैठती हैं, जो आजकत सरकारी डकैतों से पीड़ित हैं। केंद्र और राज्य सरकार से लेकर अदालतें तक पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर समय-समय पर अपनी चिंता जाहिर कर चुकी हैं कई फरमान भी इसके लिए जारी होचुके हैं परन्तु इसके इतर भिण्ड का प्रशासन और पुलिस अपनी ओछी हरकतों से बाज नहीं आरहा है।

भिण्ड पुलिसऔर प्रशासन आयेदिन पत्रकारों पर जुल्म ढहाता ही रहता है अभी जिले के मौ थाना प्रभारी शिवसिंह यादव द्वारा भू-माफियाओं और हत्यारों के दबाव/प्रलोभन में आकर पत्रकार पर फर्जी एफआईआर करने का मामला थमा नहीं है कि ताजा मामला एक और आगया है जहां एक मास्टर साहब ने पहले पत्रकार को जानसे मारने की धमकी दी फिर थाने में आवेदन देकर पत्रकार की आवाज दबाने की कोशिश की।

दरअसल जिले के एक माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ मास्टर साहब छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर सरकारी योजनाओं को पलीता लगारहे थे, जिसकी भनक एक समाचार चैनल के संवाददाता को लगी संवाददाता ने तुरंत अपने फर्ज को अंजाम दिया और खबर प्रशारित करदी, खबर प्रशारित होने से मास्टर साहब का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया और पत्रकार को फोन कर तमाम खरी खोटी सुनाईं यहां तक कि जानसे मारने की धमकी भी दी (4 ऑडियो मौजूद) जिले के उमरी क्षेत्र के ग्राम सींगपुरा में स्थित शासकीय माध्यमिक पदस्थ शिक्षक द्वारा बच्चों की पढ़ाई के प्रति बरती जा रही लापरवाही एवं स्कूल खस्ता हालत की शिकायत पाकर जब पत्रकार ने वहां पहुंचकर कवरेज किया, तो अपनी पोल खुलने के डर से बौखलाए शिक्षक द्वारा न केवल पत्रकार को मोबाईल फोन पर धमकाया, बल्कि एक एडिट वीडियो को भी वायरल करने लगे।

दरअसल एक समाचार चैनल भिण्ड जिला प्रमुख अर्पित चतुर्वेदी और उनके सहयोगी पत्रकार दीपेंद्र सिंह कुशवाह को एक गुमनाम शिकायत प्राप्त हुई, जिसमें ग्राम सींगपुरा में स्थित शासकीय माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ शिक्षक सुरेंद्र सिंह कुशवाह द्वारा मनमानी करते हुए बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का उल्लेख है, इस शिकायती पत्र में कहा गया है, कि सुरेंद्र सिंह स्कूल पहुंचकर बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देने के बजाय मोबाइल पर फिल्म व सीरियल देखते रहते हैं।

इस शिकायत की पुष्टि करने के लिए जब दोनों पत्रकार उक्त स्कूल में पहुंचे, तो उस समय वहां ड्यूटी के दौरान सुरेंद्र सिंह स्कूल से गायब थे, जबकि स्कूल के इर्द-गिर्द काफी गंदगी व्याप्त थी, तथा स्कूल में शिक्षिका आरती यादव एवं चार-पांच बच्चे ही मौजूद थे। जब पत्रकारों ने बच्चों व शिक्षिका से सुरेंद्र सिंह के संदर्भ में पूछताछ की, तो वह कोई जवाब नहीं दे सके। जिससे दोनों पत्रकार वस्तु स्थिति को कवरेज कर लौट गए। जब इसकी जानकारी शिक्षक सुरेंद्र सिंह को लगी, तो अपने लापरवाह रवैए की पोल खुलने के डर से उन्होंने तुरंत उक्त पत्रकारों के मोबाइल पर कॉल करके न केवल पत्रकार से अभद्रता की, बल्कि बार-बार उनसे यह पूछकर दबाव बनाने का प्रयास करने लगे, कि मेरी अनुपस्थिति में तुम क्यों आए?

अब मास्साब को यह कौन समझाए कि संविधान की धारा 19-(क) भारत के हर नागरिक को यह अधिकार देती है कि बो सरकार या उसके कारिंदों से सवाल कर सकता है आपात काल छोड़कर किसी भी समय किसी की अनुमति की जरूरत नहीं सो मास्टर साहब का ज्ञान और सवाल सुनकर तो यही लगता है कि उनके शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच की आवश्यकता है (वैसे सूत्र बताते हैं इस विषय पर उनकी जांच जारी है) वैसे सवाल तो ये है कि ड्यूटी के समय पर वह खुद क्यों वहां मौजूद नहीं थे? साथ ही क्या महज चार बच्चों के लिए ही सरकार उन्हें व उनकी सहकर्मी शिक्षिका को हजारों रुपए वेतन दे रही है?

लेकिन क्या किया जाये जनाब ये भिण्ड (चंबल) है यहां पहले सरकार द्वारा सताये हुये लोग डकैत हुआ करते थे आज सरकार द्वारा पोषित डकैत हैं? जिनमें पुलिस खास तौर पर भिण्ड पुलिस अधीक्षक कार्यालय के मात्र एक माह के सीसीटीवी फुटेज निकाले जाएं तो सभी काले कारनामे सामने आजायेंगे, इस बात को में पूरे प्रमाण के साथ लिख रहा हूं कि भिण्ड पुलिस पर दलाल हावी हैं नहीं तो फर्जी एफआईआर की 4 महीने में जांच तक नहीं और गोरमी थाने में पुलिस आरक्षक की वर्दी फाड़ने वाले केस में खात्मा रिपोर्ट लगादी “वाह एसपी साहब वाह” असल में भिण्ड क्या समूचे चंबल अंचल में रेत माफिया हावी है क्या प्रशासन क्या पुलिस क्या नेता और क्या पत्रकार? सभी इस काले कारोबार में शामिल हैं? पुलिस भी उन्हीं को पत्रकार मानती है जो दिनभर उनकी ऑफिस में बंदना करे? ऐसे माहौल में बेचारे युवा कुछ सीखना चाहें तो उनके लिए रोंगटे खड़े करने वाली बात है कि उनके अपने ही साथ नहीं देते “तभी तो कहा है कि एक तो पत्रकार ऊपर से पुलिस औऱ प्रशासन की मार।”

दोनों पक्षों ने थाने में दिया आवेदन

मास्टर साहब एवं पत्रकार दोनों ने एक दूसरे को धमकाने आवेदन थाने में दिया है। शिक्षक सुरेंद्र सिंह को जब यह पता लगा, कि पत्रकारों द्वारा स्कूल का कवरेज कर वहां की हकीकत को अपने कैमरे में कैद कर लिया गया है, जिससे वह खुद फंस सकते हैं। ऐसे में उन्होंने खुद को बचाने के लिए कोतवाली थाने में पत्रकारों के खिलाफ एक शिकायती आवेदन भी दिया है, जिसमें पत्रकारों के द्वारा आयेदिन अवैध वसूली की मांग किए जाने की शिकायत की गई है, सवाल ये पैदा होता है कि अगर पत्रकारों द्वारा अवैध धन उगाही की मांग की जारही थी तो मास्टर साहब ने अबतक कोई शिकायत क्यों नहीं की खबर प्रशारित होने के बाद क्यो? वहीं पत्रकारों ने शिक्षक पर जानसे मारने की धमकी देने का आवेदन ऑडियो सहित दिया है।

प्रलोभन देकर फंसाने के लिए अनजान मोबाइल से आरहे हैं कॉल

पत्रकारों द्वारा किए गए कवरेज से खुद को फंसता देखकर शिक्षक इस तरह बौखला गया है, कि वह पत्रकारों पर दबाव बनाने के लिए अनजान लोगों से कॉल करवा रहा है। जिनमें कॉलर्स द्वारा पत्रकारों को धमकाने से लेकर प्रलोभन तक देकर फंसाने का प्रयास किया जा रहा है।