18.1 C
New Delhi
Sunday, November 27, 2022

भारत को सुपर पावर नहीं विश्व गुरु बनाना है : अमीश त्रिपाठी

भोपाल, (वेब वार्ता)। लेखक अमीश त्रिपाठी का कहना है कि अध्यात्म के दम पर भारत को सुपर पावर नहीं विश्व गुरु बनाया जा सकता है। हमारी ज्ञान परंपरा और संस्कृति प्राचीन काल से काफी समृद्धि और वैज्ञानिक है, जिसे कोई झुठला नहीं सकता। बस इसमें रिसर्च करने की जरूरत है, यह काम कोई और नहीं करेगा, बल्कि हमें ही करना होगा। द शिवा ट्राइलाजी और राम चंद्र सीरीज जैसी पुस्तकों के लेखक अमीश त्रिपाठी मंगलवार को राजधानी में थे। होटल जहांनुमा पैलेस में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने पल्लवी चतुर्वेदी के साथ चर्चा में हिंदू धर्म, देवताओं और मान्यताओं पर भी बात की।

रवींद्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी (आरएनटीयू) द्वारा कार्यक्रम का अयोजन अंतरराष्ट्रीय साहित्य और कला महोत्सव विश्वरंग की पूर्व कड़ी के रूप में किया गया था। इस मौके पर अमिश त्रिपाठी ने कहा कि भारत में हमारे प्रबुद्ध वर्ग को अपनी सोच को परिमार्जित करने की आवश्यकता है। हम अपने इतिहास के बाजीराव, कान्होजी आंग्रे, सुहेलदेव आदि जैसे कई ऐसे नायकों को नहीं जानते जो बहुत अद्भुत थे, जिनकी कहानियां हमें पता होनी चाहिए। इसी प्रकार हमें अक्सर बताया जाता है कि हम 1947 में राष्ट्र बने और अंग्रेजों ने हमें एक राष्ट्र के रूप में खड़ा किया। बल्कि यह सच नहीं है, हजारों साल पहले हमारे विष्णुपुराण में भारत को एक ऐसे स्थान के रूप में परिभाषित किया गया है जो हिमालय के दक्षिण और हिंद महासागर के उत्तर में है, जहां भरत की संतति निवास करती है। इस कारण अमीश त्रिपाठी कहते हैं कि इतिहास में सुधार की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि हमारे देवी- देवताओं को लेकर हमारे ही देश में अलग-अलग मान्यताएं हैं। भगवान को कार्तिक को उत्तर भारत में अविवाहित माना जाता है, जबकि दक्षिण में मान्यता है कि कार्तिक की दो पत्नियां थीं। यह कोई निरादर नहीं, बल्कि पहलू है। इसमें कोई बुराई नहीं है। डिस्कवरी टीवी पर आ रही अपनी नई वेबसीरीज पर बात करते हुए अमीश ने कहा कि इसकी तैयारी के दौरान हमने कई नए तथ्यों की भी खोज की है। पहले हमारा अधिकांश ज्ञान किताबी था। इसकी रिसर्च के दौरान जब हम देशभर में घूमें तो हम रामायण में वर्णित कई तथ्यों से रूबरू हो पाए जिनसे दुनिया पहले अनजान थी। ऐसे ही एक तथ्य पर बात करते हुए अमीश कहते हैं कि बाल्मिकी रामायण में चित्रकूट में गुप्त गोदावरी नदी का वर्णन किया है।

असल में इस नदी के बारे में कोई नहीं जानता पर हम जब चित्रकूट पहुंचे और वहां रिसर्च की तो हमारे जियोलाजिस्ट ने एक ऐसी नदी को खोज निकाला। ठीक ऐसा ही रामसेतु को लेकर है। रामायण- महाभारत सहित हमारे पौराणिक ग्रंथ एकदम सटीक हैं उनमें वैज्ञानिक बातें लिखी हुईं हैं। इसलिए आज बड़ी आवश्यकता है कि हमारी कहानियों का वैज्ञानिक शोध किया जाए और उन्हें दुनिया के सामने रखा जाए। अंत में लेखक ने श्रोताओं के प्रश्नों के जावाब भी दिए। कार्यक्रम में साहित्यकार, शिक्षाविद, छात्र एवं शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। इस दौरान विश्वरंग के पोस्टर का विमोचन भी किया गया।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

10,370FansLike
10,000FollowersFollow
1,122FollowersFollow

Latest Articles