स्वसहायता समूह से जुड़ी प्रत्येक महिला की आय प्रतिमाह 10 हजार रुपए बढ़े : शिवराज सिंह चौहान

shivraj singh chouhan

भोपाल, 16 सितंबर (वेब वार्ता)। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि स्व-सहायता समूह से जुड़ी प्रत्येक महिला की आय में 10 हजार रूपए प्रतिमाह की बढ़ोत्तरी हो। आप मेहनत और प्रमाणिकता के साथ अपना काम करें, आगे बढ़ें सरकार हर कदम पर आपके साथ है।

श्री चौहान आज यहां राज्य स्तरीय महिला स्व-सहायता समूह के उन्मुखीकरण एवं संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला स्व-सहायता समूहों को सुदृढ़ करने के लिए इस वर्ष 2550 करोड़ रूपये बैंक ऋण उपलब्ध कराने का लक्ष्य राज्य सरकार द्वारा निर्धारित किया गया है। राशन (पीडीएस) की दुकानें संचालित करने की जिम्मेदारी भी अब स्व-सहायता समूहों को दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके साथ ही स्व-सहायता समूहों के आय स्तर में वृद्धि के लिए श्रेष्ठ काम करने वाले क्लस्टर लेवल फेडरेशन को एक करोड़ रूपए का इनाम दिया जाएगा। भोपाल स्थित भोपाल हाट में समूहों के उत्पादों की बिक्री के लिए आजीविका मार्ट की स्थापना की जाएगी। व्यापार बढ़ाने के लिए ऑनलाइन कॉमर्स पोर्टल के साथ भी लिंकेज किया जाएगा। महिला समूह के लिए सिंघाड़ा और मछली के व्यापार के लिए विशेष परियोजना बनाई जाएगी। समूहों के सभी पात्र सदस्यों को आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराए जाएंगे।

मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित कार्यक्रम कन्या पूजन और मध्यप्रदेश गान के वादन से आरंभ हुआ। मुख्यमंत्री ने सदी की भीषणतम महामारी कोरोना वायरस का सामना करने में स्व-सहायता समूहों द्वारा निभाई गई भूमिका पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। श्री चौहान ने आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण में स्व-सहायता समूह की भूमिका पर केन्द्रित प्रदर्शनी भी देखी। कार्यक्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री महेन्द्र सिंह सिसोदिया, पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री रामखेलावन पटेल, जनप्रतिनिधि तथा विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

श्री चौहान ने कहा कि स्व-सहायता समूहों को विभिन्न गतिविधियों के लिए राज्य सरकार की ओर से 1050 करोड़ रूपए की सहायता दी जाएगी। बैंक ऋण पर स्व-सहायता समूहों को 4 प्रतिशत ब्याज ही देना होगा। शेष ब्याज राज्य सरकार की ओर से भरा जाएगा। उन्होंने महिला स्व-सहायता समूह की मुख्यमंत्री निवास आईं सभी सदस्यों को राखी की बधाई दी। उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति मान-सम्मान और समानता का व्यवहार आवश्यक है। वे मुख्यमंत्री के रूप में इस भाव से कार्य कर रहे हैं कि कैसे अपनी माता-बहनों, बेटियों की प्रगति, कल्याण और उन्हें सशक्त बनाने के रास्ते को सरल बना सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं का सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक, राजनैतिक सशक्तिकरण आवश्यक है। इसी उद्देश्य से राज्य के सभी नगरीय निकायों और पंचायतों के चुनावों में 50 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं। शिक्षा का क्षेत्र हो या खेल का क्षेत्र, सभी दिशाओं में महिलाएँ उपलब्धियाँ अर्जित कर रही हैं। महिलाओं का आत्म-विश्वास और सामाजिक चेतना बढ़ी है। अन्याय के खिलाफ संघर्ष की क्षमता भी बढ़ी है। परिवार और समाज का महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण भी बदला है।

श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश की गरीब और निम्न, मध्यम वर्ग की बहनों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए आजीविका मिशन रामबाण है। आजीविका मिशन से बड़ा कोई ब्राण्ड नहीं हो सकता, यह शुद्धता की गारंटी है। इसके उत्पादों की “सौ फीसदी शुद्धता” के आधार पर ब्रांडिंग की जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने आजीविका मार्ट पोर्टल पर कच्ची घानी सरसों का तेल, मूंगफली का तेल, अदरक-लहसुन पेस्ट, बेसन, दलिया और मल्टीग्रेन आटे की ब्रांडिंग की शुरूआत की। मुख्यमंत्री ने इन उत्पादों का उपयोग करने के लिए जन-सामान्य को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों की गतिविधियों से आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश का लक्ष्य प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने स्व-सहायता समूह की सदस्यों को बिचौलियों से सावधान रहने और लालच में नहीं आने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बहनों द्वारा निर्णय लेने और क्रय-विक्रय की प्रक्रिया जितनी स्वतंत्र, पारदर्शी और सशक्त होगी, स्व-सहायता समूह उतने ही अधिक मजबूत होंगे। मिशन द्वारा दिए जा रहे प्रशिक्षण, सहयोग और मार्गदर्शन से लाखों परिवारों की गरीबी दूर हुई है। समूहों से जुड़ने के साथ ही बहनों के बैंक में खाते खुले हैं। अब बहनों को बचत का पैसा किसी डिब्बे में रखने की जरूरत नहीं है। समूहों में सिखाए गए 13 सूत्रों ने महिलाओं को प्रगति के नए आयाम दिए हैं।

श्री चौहान ने कहा कि स्व-सहायता समूहों की गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है। बैठकों तथा गतिविधियों के संचालन के लिए विभिन्न जिलों में लगभग 6 हजार से अधिक शासकीय भवन आवंटित हो चुके हैं। चार हजार से अधिक ग्राम संगठनों और 416 संकुल स्तरीय संगठनों को कार्यालय भवन, 132 आजीविका आउटलेट के लिए भवन आवंटित किए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि बहनों द्वारा बनाए गए उत्पाद सही और सम्मानजनक रूप से मार्केट में बेचने के लिए प्रदेश में 37 आजीविका रूरल मार्ट शुरू हो चुके हैं। कोविड महामारी के समय में मास्क, सैनेटाइजर, पीपीई किट और हेण्डवॉश उपलब्ध कराकर समूहों ने अपनी क्षमता का परिचय दिया।

श्री चौहान से स्व-सहायता समूहों की सदस्यों ने संवाद किया। कार्यक्रम में समूह की महिला सदस्यों ने अपने अनुभव साझा किए। शहडोल से आई ग्राम बंमुरा विकासखंड सोहागपुर की उद्यम सखी मीरा यादव ने अपने अनुभव बताए। कठिनतम परिस्थितियों में स्वयं को जीवन में स्थापित कर अब मीरा, महिलाओं को लघु उद्यम स्थापित करने में मदद कर रही हैं। उनकी स्वयं की मासिक आय लगभग 35 हजार रूपए महीना है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि मीरा के संघर्ष की कहानी हमें द्रवित भी करती है और संघर्ष कर जीवन में विजय के लिए प्रेरित भी करती है।

श्योपुर के कराहल विकासखंड के ग्राम करियादेह की कमली बाई पटेलिया ने बताया कि किस प्रकार उन्होंने फलोद्यान अर्थात बाड़ी के साथ इंटरक्रॉपिंग से अतिरिक्त आय बढ़ाई। उनके प्रयासों से क्षेत्र में तीन वर्ष में 200 कृषकों द्वारा बाड़ियाँ लगाई गई हैं। कमली देवी समता सखी के रूप में महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए जागरूक भी कर रही हैं। इसी क्रम में बड़वानी के विकासखंड पानसेमल के ग्राम कानसुल की पमा बाई राज सिंह ने बताया कि किस प्रकार उन्होंने स्वयं के परिवार के साथ-साथ समूह के अन्य सदस्यों को आजीविका गतिविधियों से जोड़ कर आत्म-निर्भर बनाया।

रायसेन के विकासखंड औब्दुल्लागंज के ग्राम लुल्का की आशा सिंह कृषि सखी के रूप में स्वयं जैविक कृषि अपनाकर लोगों की प्रेरणा स्त्रोत बनी है। इन्होंने लगभग 350 परिवारों को कम लागत जैविक कृषि तकनीक का प्रशिक्षण देकर जैविक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। आशा सिंह ने बकरी पालन को भी आय के स्त्रोत के रूप में अपनाया है। वे कहती हैं कि संकट के समय बकरी बहुत उपयोगी है, वह एटीएम के समान है। किसी भी आपातकालीन परिस्थिति में बकरी बेचकर तत्काल धन की व्यवस्था हो जाती है।

श्री चौहान ने बैतूल की रूपाली ठाकरे से वर्चुअली बात की। श्रीमती ठाकरे गारमेंट तथा पेटीकोट बनाने के कार्य में लगी हैं। उन्होंने बताया कि उनके समूह द्वारा बनाई गई सामग्री की मांग बैतूल सहित महाराष्ट्र के अमरावती तथा मोर्शी तक है। ऑर्डर पोर्टल पर प्राप्त होते हैं। पोर्टल से व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ाने में मदद मिली है। मुख्यमंत्री ने श्रीमती ठाकरे से थोक में समान ले रहे क्रेता विनय भावसार से भी बात की। श्री भावसार ने बताया कि हमारी स्थापित दुकान है।

स्व-सहायता समूह द्वारा दिए जा रहे कपड़ों की क्वालिटी बेहतर होने और दाम किफायती होने से इनके बनाए कपड़ों की माँग मार्केट में बनी रहती है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया ने कहा कि मुख्यमंत्री का स्व-सहायता समूह को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त करने का सपना आरंभ से ही रहा है। वे प्रदेश के विकास पुरुष हैं। उनके प्रयासों से प्रदेश में 3 लाख 33 हजार स्व-सहायता समूह गठित हुए हैं। इनमें 37 लाख से अधिक परिवार जुड़े हैं। मंत्री श्री सिसोदिया ने बताया कि प्रदेश में ‘साथी बाजार’ की अवधारणा क्रियान्वित की जा रही है। इसके तहत स्व-सहायता समूहों के उत्पादों की रिटेल मार्केटिंग के लिए बड़ी कंपनियों से बातचीत जारी है। ‘साथी बाजार’ से समूह द्वारा बनाई गई वस्तुओं की मार्केटिंग पूरे विश्व में होगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री रामखेलावन पटेल द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया।