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Sunday, December 4, 2022

हिंदी में चिकित्सा शिक्षा का शुभारंभ गृहमंत्री अमित शाह बोले- यह शिक्षा क्षेत्र के पुनर्जागरण का पल

भोपाल, 16 अक्टूबर (वेब वार्ता)। देश में पहली बार मध्य प्रदेश में एमबीबीएस की पढ़ाई हिन्दी में होगी। इसके लिए विशेष रूप से हिन्दी भाषा में तैयार की गईं एमबीबीएस पाठ्यक्रम की पुस्तकों का लोकार्पण केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया। शाह ने शीघ्र ही इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी हिन्दी भाषा में शुरू करने का ऐलान किया।

रविवार को भोपाल के लाल परेड मैदान पर आयोजित ‘हिन्दी में ज्ञान का प्रकाश’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एमबीबीएस प्रथम वर्ष की तीन पुस्तकों का विमोचन कर देश में हिन्दी माध्यम से मेडिकल पाठ्यक्रम की पढ़ाई के एक नए युग शुभारंभ किया। कार्यक्रम में करीब 30 हजार विद्यार्थियों के अलावा चिकित्सा और हिन्दी क्षेत्र के जानकार मौजूद रहे।

इस मौके पर केन्द्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा कि आज का दिन भारत के शिक्षा क्षेत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन है। इतिहास में आज के दिन को स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। यह पूरे देश में शिक्षा क्षेत्र के पुनर्जागरण और पुनर्निर्माण का क्षण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्थानीय भाषाओं में उच्च शिक्षा का संकल्प व्यक्त किया था, उसे मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में साकार किया गया। आज मैं प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने ने नई शिक्षा नीति में बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा देने पर बल दिया है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने मेडिकल की पढ़ाई हिन्दी में प्रारंभ कर ऐतिहासिक कार्य किया है। गुलामी के दौर में अंग्रेजों ने भारत की प्रतिभाओं के ब्रेन ड्रेन के लिए व्यवस्था की, जिसे अब प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रेन ग्रेन में बदल दिया है। अपनी भाषा में शिक्षा से बच्चों की प्रतिभा और निखरेगी। इसके लिए मैं मुख्यमंत्री, चिकित्सा शिक्षा मंत्री को अभिनव प्रयास के लिए बधाई और शुभकामनाएं देता हूं।

केन्द्रीय मंत्री शाह ने कहा कि देशभर में आठ भाषाओं में पढ़ाई हो रही है। मेडिकल और इंजीनियरिंग में जो मातृभाषा के समर्थक हैं, उनके लिए आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। अब हमें अपनी भाषा में शिक्षा मिलेगी। उन्होंने कहा कि मप्र के चुनाव में पार्टी के घोषणा पत्र में इसका जिक्र था। नई शिक्षा नीति काे सबसे पहले मप्र ने जमीं पर उतारा है। इसके लिए हिन्दी प्रकोष्ठ का गठन हुआ।

उन्होंने कहा कि सर्वे के बाद बहुत मेहनत के बाद पुस्तकों को रिलीज किया गया। सोचने की प्रक्रिया अपने मातृभाषा में ही होती है। नेशनल मंडेला ने कहा था कि यदि आप किसी व्यक्ति से उस भाषा में बात करते हो तो वह उसके दिमाग में जाता है। अनुसंधान अपनी भाषा में हो तो भारत के युवा भी किसी से कम नहीं हैं। वो विश्व में भारत का डंका बजाकर आएंगे। मेडिकल की पढ़ाई हिन्दी में कराने के लिए मध्य प्रदेश के संकल्प से देश में क्रांति आएगी।

उन्होंने कहा कि मेडिकल के बाद इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी हिन्दी में शुरू होगी। देश की आठ भाषाओं में इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू होगी। इसके लिए सिलेबस के अनुवाद का काम शुरू हो गया है। छह माह बाद, पॉलीटेक्निक और इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिन्दी में करने का मौका मिलेगा।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अंग्रेजी न जानने के कारण युवा हीनभावना से ग्रसित होते हैं। ऐसे बच्चों की जिंदगी में शाह नया सबेरा लेकर आए हैं। यह काम तो आजादी के बाद ही हो जाना चाहिए था। मप्र आज आल्हादित है। उन्होंने पाप किया था, जिन पर आजादी के बाद सरकार चलाने की जिम्मेदारी थी। उनका तन भी अंग्रेजी, मन भी अंग्रेजी था। हमने अपने महापुरुषों को भी आपमान किया। तात्याटोपे नगर टीटी नगर हो गए। आई लव यू बुदनी यह क्या है। प्रधानमंत्री ने कई बड़े काम किए पर सबसे बड़ा काम मातृभाषा के लिए किया। आज प्रधानमंत्री का संकल्प पूरा हो रहा है। हिंदी को भी हमने क्लिष्‍ट नहीं किया। इसी साल 6 इंजीनियर और 6 पालीटेक्निक में हिंदी में पढ़ाई होगी। आइआइटी और आइआइएम की पढ़ाई भी हम हिंदी में कराएंगे।

इससे पहले प्रदेश के चिकित्‍सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि देश और मप्र के इतिहास में आज परिवर्तन हो रहा है। मध्‍य प्रदेश इस देश में पहला राज्य जो हिंदी में मेडिकल की पढ़ाई कराएगा। यह कठिन काम था पर हमने शोध करके तय किया हम कैसे करेंगे। मेडिकल यूजी-पीजी की किताबों का भी रूपांतरण करेंगे।

कार्यक्रम में मौजूद लखनऊ के डा. सूर्यकांत ने कहा कि हिंदी में मेडिकल की पढ़ाई की कोशिश 30 साल से उत्तर प्रदेश कर रहा है। मप्र ने बाजी मार ली। डा. सूर्यकांत ने 1991 में हिंदी में थीसिस लिखी थी।

चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने बताया कि 97 चिकित्सकों के दल ने चार महीने में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की पुस्तकें तैयार की हैं। इनमें एनाटामी, फिजियोलाजी और बायोकेमेस्ट्री शामिल हैं।

इससे पहले प्रदेश के चिकित्‍सा शिक्षा मंत्री विश्‍वास कैलाश सारंग आज सुबह छोला में स्थित खेड़ापति हनुमान मंदिर पहुंचे। उन्‍होंने बजरंगबली के दरबार में मत्‍था टेका और पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्‍होंने कहा कि आज का दिन मध्यप्रदेश व देश के लिए ऐतिहासिक है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के मुख्य आतिथ्य में व सीएम शिवराज सिंह चौहान जी की गरिमामय उपस्थित में देश में पहली बार हिन्दी में मेडिकल की पढ़ाई का शुभारंभ व पुस्तकों का विमोचन किया जायेगा।

कवि कुमार विश्‍वास ने दी बधाई

हिंदी में मेडिकल की पढ़ाई शुरू होने को लेकर लोकप्रिय कवि कुमार विश्‍वास ने भी हर्ष व्‍यक्‍त किया है। उन्‍होंने इस उपलब्‍धि के लिए सीएम शिवराज सिंह और चिकित्‍सा शिक्षा मंत्री विश्‍वास सारंग को बधाई भी दी है। उन्‍होंने इस संदर्भ में ट्वीट करते हुए कहा कि ज्ञान को अपनी भाषा में सहज-सुलभ कराने के इस बहुत समय से वांछित प्रयास को साकार करने के लिए सभी हिंदी-प्रेमियों की और से शिवराज सिंह चौहान तथा प्रिय भाई विश्‍वास सारंग को बधाइयां। अपनी माटी-बोली और संस्कार का पुनर्स्थापन, संकल्पों की दृढ़ता से ही संभव है। जय हिंद-जय हिंदी

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