Bhopal Gas Tragedy : भोपाल गैस त्रासदी के दोषी केवी शेट्टी की मौत, 37 साल से न्याय के लिए जारी है लड़ाई

हाइलाइट्स

  • भोपाल गैस त्रासदी के दोषी केवी शेट्टी की मौत
  • इस मामले में कुल आठ लोगों को पाया गया था दोषी
  • निचली अदालत से आरोपियों को हुई मामूली सजा
  • केवी शेट्टी हादसे के वक्त कंपनी में प्रोडक्शन मैनेजर के पद पर तैनात था

भोपाल
गैस त्रासदी (Bhopal Gas Tragdey Latest Update) को यादकर आज भी भोपाल के लोग सिहर जाते हैं। इस मामले में दूसरे दोषी केवी शेट्टी की 80 साल की उम्र में निधन हो गया है। भोपाल की एक अदालत ने यह जानकारी पिछले मंगलवार को दी है। केवी शेट्टी यूनियन कॉर्बाइड कंपनी में प्रोडक्शन मैनेजर था। दिसंबर 1984 में मिथाइल आइसोनेट गैस के रिसाव के कारण यह हादसा हुआ था। इसमें करीब 10 हजार से अधिक लोगों की मौत हुई थी।

वीके शेट्टी इस मामले में दूसरा दोषी है, जिसकी मौत हो गई है। इससे पहले यूनियन कार्बाइड के कर्मचारी आरबी रॉय चौधरी का निधन हो गया है। वह असिस्टेंट वर्क्स मैनेजर थे। उनका निधन 1988 में हुआ था।

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सात जून 2010 को एक निचली अदालत ने आठ आरोपियों को आईपीसी की धारा 304 के तहत आपराधिक लापरवाही के लिए दोषी ठहराया था और उन्हें दो साल की सजा सुनाई थी। उसी दिन आरोपियों को कोर्ट से जमानत मिल गई थी। सीबीआई ने सजा बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दायर की और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ सत्र अदालत में अपील की। दोषियों ने भी अपील दायर की थी।

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सत्र अदालत की सुनवाई के दौरान दोषियों के वकील अजय गुप्ता ने कहा कि शेट्टी का निधन छह सितंबर 2021 को हुआ है। इस मामले में मुख्य दोषी, यूनियन कार्बाइड कॉरपोरेशन के तत्कालीन अध्यक्ष वॉरेन एंडरसन को बनाया गया था। इसके तीन में से दो कंपनियों को आरोपी बनाया गया था। मगर ये लोग कभी भी अदालत में पेश नहीं हुए। ट्रायल यूसीआईएल और उसके आठ भारतीय अधिकारियों को मुकदमे का सामना करना पड़ा और उन्हें दो साल की सजा सुनाई गई। एंडरसन की सितंबर 2014 में यूएसए में मृत्यु हो गई।

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आरोपियों को हल्की सजा होने के बाद पीड़ितों में आक्रोश था। इसके बाद सीबीआई ने एससी में एक क्यूरेटिव याचिका दायर की, जिसमें कड़ी जेल की सजा की मांग की गई। शीर्ष अदालत ने अप्रैल 2011 में याचिका खारिज कर दी। सत्र अदालत में अदालत में मामला चल रहा है।

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अभी तक पांच न्यायाधीश बदल गए हैं और भोपाल के जिला एवं सत्र न्यायाधीश गुरीबाला सिंह मामले की सुनवाई करने वाले छठे न्यायाधीश हैं। सैंतीस साल बाद, यह मामला चलता है और दुनिया की सबसे भीषण औद्योगिक आपदा से बचे लोग अभी भी न्याय की तलाश में हैं।