मध्य प्रदेश में बेटियों के लिए चल रही इतनी योजनाएं, आज सीएम शिवराज करेंगे लाडली लक्ष्मी योजना के लाभार्थियों से संवाद

photo 87013981

भोपाल
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री आज लाड़ली लक्ष्मी योजना के लाभार्थियों से बातचीत करेंगे। सीएम संवाद के जरिए लोगों से योजनाओं के बारे में जानकारी लेंगे। मध्य प्रदेश में इसके अलावा बेटियों के लिए और भी तमाम योजनाएं चल रही हैं। कई राज्यों ने भी यहां की योजनाओं को अपने प्रदेश में लागू किया है। बताया जाता है कि जब सीएम शिवराज विधायक और सांसद भी नहीं बने थे तब से बेटियों के जीवन को संवारने यह क्रम जारी है।

बेटियों के लिए मध्य प्रदेश में योजनाएंसरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में लगभग 40 लाख लाड़ली लक्ष्मियां दर्ज हैं। जिसने कन्या भ्रूण हत्या जैसे पाप में रोक और लैंगिक अनुपात को भी समानता प्रदान की है। इसके अलावा मध्य प्रदेश में कन्या विवाह/ निकाह योजना, लाड़ो अभियान, स्वागतम लक्ष्मी योजना, शौर्या दल, उदिता योजना, लालिमा योजना, ऊषा किरण योजना, वन स्टॉप सेंटर, अटल बिहारी बाजपेयी बाल आरोग्य एवं पोषण मिशन, मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण योजना और मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम है।

इसमे प्रत्येक लाडली बालिका के नाम से 1 लाख 18 हजार रुपए का प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। अब तक योजना के अंतर्गत लगभग 9 हजार करोड़ का खर्च आया है। 40 लाख से अधिक बालिकाओं का पंजीयन हो चुका है। 6 लाख 62 हजार बालिकाओं को 185 करोड़ रुपए की छात्रवृत्ति का वितरण किया जा चुका है।

मुस्कान अभियानबेटियों के अपहरण और उनके गायब होने की घटनाओं के लिए मुस्कान अभियान चलाया गया। अभियान में, 10 हजार से अधिक बेटियों को दुष्टों के चंगुल से छुड़ाया गया।

सम्मान अभियानबहन-बेटियों को बुरी नजर से देखने वालों को सबक सिखाने के लिए और समाज में जागरूकता लाने के लिए ये अभियान चलाया गया।

पंख अभियानकिशोरियों की सुरक्षा, पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता की जागरूकता के लिए प्रारंभ किया गया। 311 विकासखण्डों के विद्यालयों में बालिकाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने के लिए अपराजिता प्रशिक्षण शिविर का आयोजन। 23 हजार बालिकाओं को जूडो, कराटे, ताईक्वाण्डो का प्रशिक्षण दिया जा रहा।

प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना (PMMVY)काम करने वाली महिलाओं की मजदूरी के नुकसान की भरपाई करने के लिए मुआवजा देना और उनके उचित आराम और पोषण को सुनिश्चित करना। गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के स्वास्थ्य में सुधार और नकदी प्रोत्साहन के माध्यम से अधीन-पोषण के प्रभाव को कम करना।

योजना के लाभइस योजना से गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को पहले जीवित बच्चे के जन्म के दौरान फायदा होगा। योजना की लाभ राशि DBT के माध्यम से लाभार्थी के बैंक खाते में सीधे भेज दी जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार निम्नलिखित किश्तों में राशि का भुगतान करेगी।

पहली किस्त: 1000 रुपए गर्भावस्था के पंजीकरण के समय

दूसरी किस्त: 2000 रुपए,यदि लाभार्थी छह महीने की गर्भावस्था के बाद कम से कम एक प्रसवपूर्व जांच कर लेते हैं ।

तीसरी किस्त: 2000 रुपए, जब बच्चे का जन्म पंजीकृत हो जाता है और बच्चे को BCG, OPV, DPT और हेपेटाइटिस-B सहित पहले टीके का चक्र शुरू होता है।

मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण योजनायोजना के तहत विपत्तिग्रस्त पीड़ित, कठिन परिस्थितियों में निवास कर रही महिलाओं के आर्थिक/सामाजिक उन्नरयन हेतु स्थायी प्रशिक्षण प्रदान किया जायेगा ताकि रोजगार प्राप्त कर सके। यह प्रशिक्षण ऐसी संस्थाओं द्वारा जारी डिग्री/प्रमाण-पत्र शासकीय/अशासकीय सेवाओं में मान्य/ हो। प्रशिक्षण पर होने वाला पूर्ण व्यय जिसमें प्रशिक्षण शुल्क,आवासीय व्यवस्था शुल्क शामिल रहेगी।

उदिता योजनाउदिता योजना अंतर्गत किशोरी के मासिक धर्म संबंधी स्वास्थ्य को बढ़ावा दिया जााता हैं। यह योजना किशोरियों के पोषण व स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर विचार विमर्श के लिये एक मंच तैयार करके किशोरियों के लिये कार्यकलाप तैयार करती हैं। विभागीय वेबसाइट http://mpwcdmis.gov.in/

लाभार्थीउदिता योजना अंतर्गत किशोरी के मासिक धर्म संबंधी स्‍वास्‍थ को बढ़ावा दिया जााता हैं। यह योजना किशोरियों के पोषण व स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी मुद्दों पर विचार विमर्श के लिये एक मंच तैयार करके किशोरियों के लिये कार्यकलाप तैयार करती हैं। सभी किशोरी बालिकाएं एवं 18 से 49 वर्ष की महिलाएं लाभार्थी होंगे।

लाभआंगनवाड़ी केन्‍द्रों में स्‍थापित उदिता कार्नर के माध्‍यम से सेनेटरी नेपकीन का वितरण, पोषण एवं स्‍वास्‍थ्‍य शिक्षा, किशोरी बालिकाओं में माहवारी स्‍वस्‍च्‍छता एवं पोषण एवं स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी मुददो पर प्रशिक्षित किया जाता हैं।

आवेदन कैसे करेंआंगनवाड़ी केन्‍द्रों के माध्‍यम से लाभान्वित किया जाता हैं।

लाडो योजनामध्यप्रदेश देश में प्रथम राज्य है, जिसने बाल विवाह के रोकथाम हेतु 2013 में लाडो अभियान प्रारंभ किया गया। लाडो अभियान का मुख्य उद्देश्य -जनसमुदाय की मानसिकता में सकारात्मक बदलाव के साथ बाल विवाह जैसी कुरीति को सामुदायिक सहभागिता से समाप्त करना है। अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिला, खण्ड, स्कूल, ग्राम स्तरीय एंव सेवा प्रदाताओं की कार्यशाला का आयोजन कर उपस्थित प्रतिभागियों को अभियान के प्रति संवेदनशील बनाना है। लाडो अभियान अंन्तर्गत बाल विवाह को रोकने हेतु प्रभावी क्रियान्वयन के लिए वर्ष 2014 में लोक प्रशासन के उत्कृष्ठ कार्य हेतु प्रधानमंत्री पुरस्कार से सम्मनित किया गया।

लालिमा योजनाइस योजना में बच्चो, किशोरी बालिका एवं प्रजनन आयु वर्ग की महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य और एनीमिया की रोकथाम/किशोरियों में पोषण जागरूकता हेतु लालिमा योजना संचालित की जा रही हैं। बच्चों सहित किशोरियों, गर्भवती व धात्री माताओं में होने वाली खून की कमी (ऐनीमिया) को रोकने के लिए लालिमा अभियान शुरु किया है। एकीकृत बाल विकास (आईसीडीएस) ने एनीमिया की रोकथाम के लिए लालिमा अभियान शुरु किया है। इस अभियान के तहत किशोरी बालिकाएं, गर्भवती महिलाएं व बच्चों को दूध पिलाने वाली माताओं को पोष्टिक आहार की जानकारी देंगे, साथ ही उन्हें स्वस्थ्य रहने के तरीके बताएं जाएंगे।