असम में बंद होंगे मदरसे और संस्कृत स्कूल, मंत्री बोले- कुरान का शिक्षण सरकारी खर्चे पर नहीं

New Delhi: असम (Assam) में प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार में मंत्री हिमांता बिस्व शर्मा (Himanta Biswa Sarma) ने घोषणा की है कि राज्य के सभी सरकारी मदरसे (Madarsa in Assam) बंद किए जाएंगे।

उन्होंने (Himanta Biswa Sarma) कहा कि पब्लिक के रुपयों से धार्मिक शिक्षा देने का प्रावधान नहीं है, इसलिए सरकारी मदरसे अब नहीं संचालित होंगे। इस आदेश का नोटिफिकेशन अगले महीने जारी कर दिया जाएगा।

गुवाहाटी में पत्रकारों से बात करते हुए मंत्री ने कहा, ‘किसी भी धार्मिक शिक्षा वाले संस्थान को सरकारी फंड से संचालित नहीं किया जाएगा। हम इसका नोटिफिकेशन नंबर में जारी करने जा रहे हैं और इसे तत्काल लागू कर दिया जाएगा। हम प्राइवेट मदरसों के संचालन के बारे में कुछ नहीं कह सकते हैं।’ उन्होंने कहा कि राज्य में लगभग 100 संस्कृत स्कूल भी बंद किए जाएंगे।

AIUDF ने कहा, सरकार आई तो पलटेंगे फैसला

असम सरकार के इस बयान पर AIUDF के मुखिया और लोक सभा सांसद बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि अगर बीजेपी की राज्य सरकार सरकारी मदरसे बंद कर देगी तो उनकी सरकार इन्हें फिर से खोल देगी। अगले साल राज्य में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। उनकी पार्टी बहुमत से आई तो वे सरकार के बंद किए गए सारे मदरसे फिर से खोल देंगे।

‘धर्मनिरपेक्ष देश में सरकारी फंड से नहीं होती धार्मिक शिक्षा’

इससे पहले फरवरी में हिमांता ने घोषणा की थी कि सरकार न सिर्फ राज्य सरकार के संचालित मदरसों को बंद करने की तैयारी कर रही है बल्कि सरकारी संस्कृत स्कूल भी बंद किए जाएंगे। बाद में उन्होंने इस पर सफाई देते हुए कहा था कि धर्मनिरपेक्ष देश में किसी भी धार्मिक शिक्षा के लिए सरकारी फंड नहीं खर्च किया जा सकता। अब गुरुवार को उन्होंने कहा कि संस्कृत की शिक्षा का मामला अलग है।

राज्य में सरकारी मदरसे हैं 614

असम में 614 मदरसे सरकार द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। वहीं प्राइवेट मदरसे 900 हैं। लगभग सभी मदरसे जमीअल उल्मा की ओर से चलाए जाते हैं। वहीं राज्य में लगभग 100 संस्कृत संस्थान सरकारी और 500 प्राइवेट हैं। हर साल सरकार मदरसों पर 3 से 4 करोड़ रुपये खर्च करती है वहीं संस्कृत संस्थानों पर हर साल लगभग 1 करोड़ रुपये खर्च होते हैं।

2 साल पहले मदरसा बोर्ड और संस्कृत बोर्ड का किया था समायोजन

दो साल पहले राज्य सरकार ने संस्कृत और मदरसों को नियंत्रित करने वाले बॉडी चेंज की थीं। राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड के सभी मदरसों को सकेंडरी बोर्ड ऑफ एजुकेशन असम के अंतर्गत कर दिया था और संस्कृत बोर्ड को कुमार भाष्कर वर्मा संस्कृत ऐंड एंसिएंट स्टडीज यूनिवर्सिटी के तहत कर दिया था।

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