ken betwa link परियोजना के आड़े आ रहे गतिरोध बातचीत के माध्यम से होंगे दूर

ken betwa link
-केंद्रीय मंत्री के समक्ष जल आवंटन को लेकर मजबूती से रखा गया मध्य प्रदेश का पक्ष : मुख्यमंत्री
-मध्यप्रदेश उत्तर प्रदेश को पूर्व की तरह की तरह 700 एमसीएम पानी देने के लिये सहमत 

-एम.एस. खान-

पन्ना, 09 जनवरी (वेबवार्ता)। अति महत्वाकांक्षी बहुप्रतीक्षित केन बेतवा लिंक परियोजना (ken betwa link) आखिरकार आपसी बातचीत के माध्यम से हल निकाल लिया गया है मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उत्तर प्रदेश को 700 एमसीएम पानी देने के लिये सहमत हैं और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा है कि केन बेतवा लिंक परियोजना से जल आवंटन में मध्यप्रदेश का अहित नहीं होने देंगे। साथ ही उत्तरप्रदेश के हितों की भी पूरी रक्षा की जाएगी। इस संबंध शीघ्र ही वे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ संयुक्त बैठक कर अंतिम हल निकालेंगे।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश हमेशा से दूसरे राज्यों के हितों की परवाह करता रहा है परंतु प्रदेश का अहित न हो इसका भी पूरा ध्यान रखा जाएगा। केन-बेतवा परियोजना (ken betwa link) से मध्यप्रदेश उत्तरप्रदेश को 700 एमसीएम पानी देने के लिए सहमत है। शीघ्र ही केंद्रीय मंत्री श्री शेखावत के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ के साथ बातचीत कर योजना के गतिरोध को दूर किया जाएगा। बैठक में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने जल आवंटन को लेकर मध्यप्रदेश का पक्ष मजबूती से रखा।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री शेखावत आज मंत्रालय में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं सभी संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों के साथ केन बेतवा लिंक परियोजना (ken betwa link) के जल के बंटवारे के संबंध में बैठक कर रहे थे। बैठक में जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, नेशनल जल जीवन मिशन के डायरेक्टर भरत लाल, अपर मुख्य सचिव जल संसाधन एस.एन. मिश्रा आदि उपस्थित थे।

आपसी बातचीत से 15 दिन में निकालें हल

बैठक में ईस्टर्न राजस्थान नहर परियोजना सह पार्वती कालीसिंध चंबल लिंक परियोजना मैं मध्य प्रदेश एवं राजस्थान के बीच जल उपयोग को लेकर भी बातचीत हुई। इस संबंध में केंद्रीय मंत्री श्री शेखावत ने निर्देश दिए कि 15 जनवरी से आगामी 15 दिनों में दोनों पक्ष निरंतर बातचीत कर हल निकालें। इस परियोजना की डीपीआर में प्रस्तावित बांध एवं बैराजों के लिए 50 फीसदी जल निर्भरता पर जल उपयोग की गणना की गई है। मध्यप्रदेश का कहना है कि इसे 75 फीसदी जल निर्भरता पर आकलन के आधार पर पुनरीक्षित किया जाए।

केन-बेतवा लिंक परियोजना (ken betwa link) के संबंध में मध्यप्रदेश का पक्ष

मध्यप्रदेश की दौधन बांध पर 6590 एम.सी.एम जल उपलब्धता के आधार पर बांध से उत्तरप्रदेश के लिए 700 एम.सी.एम जल सभी प्रयोजनों के लिए लिंक केनाल सहित नॉन मानसून के दौरान आवंटित करने पर सहमति है। लिंक केनाल द्वारा उत्तरप्रदेश को प्रदत्त जल को शामिल करते हुए उत्तरप्रदेश को आवंटित 1700 एम.सी.एम जल की एकाउंटिग बरियारपुर पिकअप वीयर पर की जाए। शेष संपूर्ण जल 2733 एम.सी.एम के उपयोग करने के लिए मध्यप्रदेश स्वतंत्र रहेगा।

उत्तरप्रदेश का पक्ष

परियोजना अंतर्गत उत्तरप्रदेश गैर मानसून अवधि में दौधन बांध से नवम्बर से मई माह तक 935 एम.सी.एम पानी चाहता है।

राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण का सुझाव

राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण ने सुझाव दिया है कि परियोजना से नॉन मानसून मौसम में दौधन बांध पर उत्तरप्रदेश को 750 एम.सी.एम तथा मध्यप्रदेश को 1834 एम.सी.एम जल दें। अभिकरण द्वारा दौधन बांध पर जल उपलब्धता 6188 एम.सी.एम मानी गयी है।

मध्यप्रदेश का तर्क

परियोजना के अंतर्गत समस्त तकनीकी एवं जल योजना डिजाईन केन्द्रीय जल आयोग द्वारा दौधन बांध पर 6590 एम.सी.एम जल उपलब्धता के आधार पर की गई है, एवं समस्त अनुमोदन इसी आधार पर किए गए है।

यदि दौधन बांध पर जल उपलब्धता 6590 एम.सी.एम के स्थान पर 6188 एम.सी.एम मानी जाती है, उस स्थिति में भविष्य में मध्यप्रदेश को लगभग 400 एम.सी.एम जल की हानि होगी, साथ ही यदि 750 एम.सी.एम जल दौधन बांध से नॉन मानसून सीजन में उत्तरप्रदेश को उपलब्ध कराया जाता है, उस स्थिति में रंगवान बांध, अंतरिम जलग्रहण क्षेत्र और बरियारपुर स्टोरेज में लगभग 200 एम.सी.एम जल उत्तरप्रदेश को अतिरिक्त रूप से प्राप्त होगा। अत: उत्तरप्रदेश को कुल आवंटित 1700 एम.सी.एम जल मौजूदा केन सिस्टम से बरियारपुर पर दिया जाना मध्यप्रदेश के हित में होगा।

केन-बेतवा परियोजना (ken betwa link) के प्रमुख बिन्दु

वर्ष 2009 में भारत सरकार द्वारा केन-बेतवा लिंक बहुउद्देशीय परियोजना को राष्ष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया एवं इसके वित्त पोषण हेतु 90:10 अनुपात में केन्द्र एवं संबंधित राज्यों के मध्य आधार सुनिश्चित किया गया।

परियोजना म.प्र. के छतरपुर/पन्ना जिले में स्थित है। परियोजना के क्रियान्वयन से होने वाली संपूर्ण क्षति जैसे- भूमि अधिग्रहण, जंगल क्षति, राजस्व भूमि की क्षति, प्रतिपूरक वनीकरण हेतु गैर वनभूमि की व्यवस्था, जनजातीय परिवारों का विस्थापन एवं पुनर्वास इत्यादि मध्यप्रदेश द्वारा वहन की जा रही है।

राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण द्वारा परियोजना की ड्राफ्ट एकजाई डी.पी.आर. (प्रथम चरण + द्वितीय चरण) अक्टूबर 2018 में तैयार की गई। ड्राफ्ट एकजाई डी.पी.आर. की कुल लागत लगभग 35111.24 करोड़ आंकलित की गई।

जल संसाधन विभाग मध्यप्रदेश द्वारा ड्राफ्ट एकजाई में उत्तरप्रदेश को रबी सीजन में 700 एम.सी.एम. के स्थान पर 930 एम.सी.एम. जल का उपयोग दर्शाया गया है, जबकि मध्यप्रदेश का रबी सीजन में जल एवं कमांड क्षेत्र कम किया गया है, जो मध्यप्रदेश को मान्य नहीं है। मध्यप्रदेश द्वारा एकजाई डी.पी.आर., आपत्तियां इंगित करते हुए महानिदेशक एनडब्लूडीए को प्रेषित की गईं।

दिनाँक 23 अप्रैल 2018 को सचिव, भारत सरकार द्वारा आयोजित बैठक में मध्यप्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं उत्तरप्रदेश के प्रमुख सचिव ने भाग लिया, जिसमें मध्यप्रदेश द्वारा रबी सीजन में सिंचाई व पीने के पानी हेतु बांध से कुल 700 मि.घ.मी. पानी उत्तप्रदेश को आबंटित करने हेतु अपनी सहमति दी गई। लेकिन बैठक में कार्यवृत्त में उत्तरप्रदेश को 788 मि.घ.मी. पानी आबंटित किया गया, जिसके लिए मध्यप्रदेश ने अपने पत्र दिनांक 24 मई 2018 द्वारा असहमति व्यक्त की।

दिनांक 20 जुलाई 2020 को नई दिल्ली में सचिव, जल संसाधन की अध्यक्षता में बैठक में उत्तरप्रदेश के मुख्य सचिव द्वारा रबी सीजन में सिंचाई एवं पीने के पानी के लिये पुन: मांग बढ़ाकर 930 मि.घ.मी. आबंटन हेतु अनुरोध किया गया। सचिव, जल संसाधन भारत सरकार द्वारा सीजनल (नवंबर से मई) जल की आवश्यकता की जांच करने हेतु राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण को निर्देशित किया गया।

प्रमुख अभियंता जल संसाधन विभाग मध्यप्रदेश के पत्र दिनांक 14 जनवरी 2020 द्वारा 700 मि.घ.मी. जल केन सिस्टम से (नवंबर से मई अवधि के दौरान बरियारपुर पिकअप वियर पर उत्तरप्रदेश को आवंटित करने एवं मानूसन अवधि (जून अक्टूबर) में उत्तरप्रदेश के महोबा जिले में निर्मित 10 जलाशयों में आवश्यकतानुसार उत्तरप्रदेश को अपने हिस्से के आबंटित जल से भरने की सहमति दी गई।

22 सितम्बर 2020 को केन्द्रीय मंत्री, जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा वीडियो कान्फ्रेंसिंग से मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के जल संसाधन मंत्री के साथ बैठक की गई। बैठक में चर्चा उपरांत निर्णय लिया गया कि दोनों राज्य भारत सरकार द्वारा भेजे गए मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एमओए) प्रारूप पर अपनी टिप्पणी पूर्ण जानकारी के साथ प्रस्तुत करें, जिससे जल शक्ति मंत्रालय द्वारा (एमओए) प्रारूप को अंतिम रूप दिया जा सके।

दिनांक 6 नवम्बर 2020 को भोपाल में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की नदी जोड़ो अभियान परिकल्पना के अनुक्रम में बनाई गई बहुउद्देशीय केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना (ken betwa link) के गतिरोध को दूर कर, इसका कार्य शीघ्र प्रारंभ करवाया जाएगा। मध्यप्रदेश एवं उत्तरप्रदेश के बीच सीजनल जल बंटवारे पर सहमति न बनने के कारण परियोजना में विलंब हो रहा है।

मध्यप्रदेश ने उत्तरप्रदेश को परियोजना से अवर्षाकाल के महीनों में रबी फसल व पेयजल के लिए 700 मि.घ.मी. पानी देने पर पूर्व में सहमति दी थी, जिसके लिए हम आज भी तैयार हैं। इस संबंध में भारत सरकार के समक्ष मध्यप्रदेश का पक्ष मजबूती से रखा जाएगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बैठक में ही केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत से परियोजना संबंधी गतिरोध शीघ्र दूर करने सबंधी आग्रह किया था।