जिज्जी के नेतृत्व ने लड़ेंगे केन बेतवा लिंक परियोजना की लड़ाई : महारानी

Ken Betwa Link Project

-बायोस्फीयर रिजर्व की वैश्विक सूची में शामिल वन क्षेत्र का मिट जायेगा अस्तित्व

-एम.एस खान-

पन्ना, (वेबवार्ता)। केन बेतवा नदियों को जोड़ने से पन्ना का बहुत नुकसान है पन्ना टाईगर रिज़र्व पूरी तरह उजड़ जायेगा, घड़ियाल भी नहीं बचेंगे और पन्ना में टूरिज्म की बहुत हानि होगी, पन्ना की नदी और को पानी नहीं। यह ट्वीट कर भाजपा सरकार की पूर्व मंत्री कुसुम सिंह महदेले ने मुखर होते हुये अपने आधिकारिक ट्वीटर हैंडल से ट्वीट कर इस परियोजना पर वाजिब सवाल खड़े किये हैं। उनके ट्वीट करने के बाद एक बार फिर इस परियोजना पर सवाल खड़े हो रहे हैं तो दूसरी ओर राजनीतिक हल्कों में चर्चा जोर पकड़ रही है।

Ken Betwa Link Projectइसके अलावा महारानी जीतेश्वरी देवी ने भी इस परियोजना का विरोध करते हुए कहा है कि पन्ना में बेशकीमती हीरा मिलता है और जहाँ यह बाँध प्रस्तावित है वहां किंबर लाइट स्टोन पट्टी है और बाँध बन जाने के कारण यह प्रभावित हो जायेगी और हीरा बनने की प्रक्रिया रुक जाएगी। उन्होंने कहा है कि हम बाँध का विरोध नहीं कर रहे हैं लेकिन जगह उचित नहीं है सरकार ने केन बेतवा लिंक परियोजना का कई बार बजट बढ़ाया है क्या सरकार आम जनमानस की आवाज़ और पर्यावरण प्रेमियों की चिंताओं पर एक बार फिर से नए सिरे से सोच विचार नहीं कर सकती।

बहुप्रतीक्षित केन बेतवा लिंक परियोजना ने आखिरकार तमाम खानापूर्ति के बाद इस परियोजना का काम शुरू हो चुका है और बहुत बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई शुरू हो चुकी है। केन बेतवा लिंक परियोजना का शुरूआती चरण में ही विरोध किया गया था लेकिन आम जनमानस की उठती आवाज़ों को सरकार द्वारा अनसुना कर दिया गया अब जब परियोजना का काम शुरू हो गया है तो अभी भी पर्यावरण प्रेमी और स्थानीय लोग इस परियोजना का विरोध कर अपनी चितायें प्रदर्शित कर रहे हैं। बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई और पन्ना टाईगर रिज़र्व के डूबने से बाघों के आशियाने उजड़ जाने की चिंता भले ही सरकार को नहीं है लेकिन पर्यावरणविद शुरू से अपनी चिंता जाहिर करते रहे हैं और अभी भी चिंतित हैं।

इस परियोजना के कारण पन्ना टाइगर रिज़र्व का बहुत बड़ा भू-भाग डूब जायेगा जिसका असर पार्क में रह रहे हज़ारों प्रकार के जानवरों पर पड़ना तय है, अगर हम विगत माहों के आंकड़े पर नज़र दौड़ायें तो एक दर्जन से अधिक बाघों की वृद्धि हुई है। जीव विविधता से संपन्न पन्ना के जंगल और केन नदी में पाए जाने वाले सैकड़ों प्रकार की प्रजातियों के जीव समाप्त हो जायेंगे।

पन्ना में जब टाइगर रिज़र्व की स्थापना की गयी थी तो खनन माफियायों द्वारा लम्बे समय तक यह अफवाह फैलाई जाती रही कि पन्ना टाईगर रिज़र्व के कारण पन्ना का विकास बाधित हुआ है। अब जब यहाँ के लोगों ने पन्ना टाईगर रिज़र्व को पूरी तरह आत्मसात कर लिया है तो उसको उजाड़ने का काम किया जा रहा है इसे पन्ना जिला वासियों सहित पर्यावरणविदों में नाराज़गी के साथ साथ प्रकृति के उजड़ने को लेकर चिंतायें हैं। अभी हाल ही में जिस वन क्षेत्र को यूनेस्को ने मैन एंड बायोस्फीयर प्रोग्राम के तहत बायोस्फीयर रिजर्व की वैश्विक सूची में शामिल किया है उस वन क्षेत्र के अस्तित्व को मिटाने पर सरकार क्यों आमादा है।