ओह तेरी! अर्णब गोस्वामी को ‘बचाने’ वाले IO के खिलाफ भी होगी जांच, यह है प्लान

New Delhi: महाराष्ट्र (Maharashtra News) में 53 वर्षीय इंटीरियर डिजाइनर को खुदकुशी के लिए उकसाने के मामले की पहले तफ्तीश करने वाले अधिकारी को जांच का सामना करना पड़ेगा। इसी मामले में रिपब्लिक टीवी (Republic TV) के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी (Arnab Goswami) को गिर’फ्तार किया गया है।

पुलिस ने बताया कि पहले के जांच अधिकारी (IO) ने मामले में क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी और कहा था कि कोई सबूत नहीं मिला है। महाराष्ट्र सरकार ने इस साल मई में मामले की नए सिरे से जांच कराने की घोषणा की थी।

साल 2018 में अन्वय नाइक को खुदकुशी के लिए उकसाने के आरोप में गोस्वामी (Arnab Goswami) को गिरफ्तार किया गया है। नाइक की मौत के बाद रायगढ़ जिले के अलीबाग में गोस्वामी और अन्य के खिलाफ आ’त्मह’त्या के लिए उकसाने के आ’रोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। हालांकि, आईओ ने 26 अप्रैल 2019 को स्थानीय अदालत में `समरी रिपोर्ट` दायर कर कहा था कि कोई सबूत नहीं है।

तत्कालीन IO के खिलाफ भी होगी जांच

रायगढ़ पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मामले को फिर से खोलने के सरकार के फैसले के बाद रायगढ़ पुलिस ने इस साल 15 अक्टूबर को अदालत को सूचित किया था कि वे तत्कालीन आईओ के खिलाफ भी जांच करेगी।

कॉन्कॉर्ड डिज़ाइन्स प्राइवेट लिमिटेड के मालिक अन्वय नाइक ने सू’इसा’इड नोट में लिखा था कि गोस्वामी (Arnab Goswami), आईकास्टएक्स/स्कीमीडिया के फिरोज शेख और स्मार्ट वर्क्स के नीतीश सारदा की ओर से बकाया पैसों का भुगतान न किए जाने की वजह से वह आ’त्मह’त्या कर रहे हैं।

सूइसाइड नोट में जिक्र, देने थे इतने रुपये

पुलिस ने बताया कि सू’इसा’इड नोट के अनुसार इन तीनों कंपनियों की ओर से नाइक को क्रमश: 83 लाख रुपये, चार करोड़ रुपये और 55 लाख रुपये दिए जाने थे।

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