बिजली संकट का असरः गुड़गांव में दवा, मोबाइल पर महंगाई की आंच, बिल्डिंग मटीरियल भी हुआ महंगा

गुड़गांव
कोरोना के बाद अब चीन में उपजा बिजली संकट डरा रहा है। वहां के कई शहरों में फैक्ट्रियां बंद हो गई हैं, जिससे कई चीजों का उत्पादन कम होता जा रहा है। इसकी आंच गुड़गांव तक आ गई है। चीन से आने वाले कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण यहां के उद्योगों में प्रॉडक्शन पर असर पड़ा है। साथ ही विदेशों से आने वाले माल का खर्च बढ़ने से कई पार्ट्स व अन्य सामानों के दाम बढ़ते जा रहे हैं। ज्यादा चिंता ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, बिल्डिंग मटीरियल, दवा आदि क्षेत्रों की है।

होने लगी इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम्स की कमी
टेक्नोक्राट के मैनेजिंग डायरेक्टर विनोद कुमार ने बताया कि चीन में बिजली संकट का असर ऑटोमोबाइल व इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों पर सीधा पड़ा है। यहां इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स की कमी होने से करीब 50 फीसदी उत्पादन कम हो गया है। चीन से डायरेक्ट आने वाले या फिर वहां से दूसरे देशों में तैयार होकर यहां आने वाली कंट्रोलिंग चिप्स, प्रोसेसिंग यूनिट आदि इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स की काफी शॉर्टेज है। सिलिकॉन की कीमत 300 रुपये से बढ़कर 900 रुपये तक हो गई। लेकिन अब ये 1200 रुपये प्रतिकिलो तक बिक रही है। ऐसे में घर में यूज होने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स सामान के दामों में काफी इजाफा देखने को मिल सकता है।

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समय पर नहीं मिल रहा माल
आईएमटी इंडस्ट्रियल असोसिएशन के प्रधान पवन यादव का कहना है कि विदेशों से जो माल पहले 4 सप्ताह में आता था, वह अब 8 सप्ताह या इससे ज्यादा में आ रहा है। आयात में कंटेनर की कमी है। आज जो कुछ भी कर रहे हैं, उसका कुछ न कुछ सामान चीन से आ रहा है। आने वाले दिनों में परेशानियां बढ़ सकती हैं। ऑटोमोबाइल सेक्टर को सेमी कंडेक्टर चिप नहीं मिल रहे, तमाम इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम भी नहीं मिल रहे हैं।

बिल्डिंग मटीरियल हुआ महंगा
बिल्डिंग मटीरियल सप्लायर महावीर सिंह ने बताया कि पेंट में केमिकल्स का इस्तेमाल होता है। पेंट के दामों में 20 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हो चुका है। जो पेंट 300 रुपये लीटर था वह अब 320 रुपये का हो गया है। घरों में लगने वाले पत्थर को जोड़ने वाला केमिकल करीब 100 रुपये किलो महंगा हो गया है। इसी तरह हार्डवेयर व लोहे के जो आइटम हैं, उनके दाम बढ़ रहे हैं। दो दिन में सीमेंट की एक बोरी पर 10 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। घरों में प्रयोग होने वाले प्लास्टिक के आइटमों के भी दाम बढ़ रहे हैं।

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पैकेजिंग का खर्च बढ़ा
वीएंडएम कंपनी की सीईओ सुमन चावला ने बताया कि चीन में बिजली संकट के कारण बंद हो रहे उद्योगों का असर यहां के उद्योगों पर पड़ रहा है। काफी केमिकल चीन से आते हैं, जो अब महंगे हो गए हैं। पैकेजिंग का खर्च करीब 25 फीसदी तक बढ़ गया है। लेदर के दाम में इजाफा हुआ है। कुछ समय से दूसरे देशों को माल भेजने में पहले के मुकाबले ज्यादा समय के साथ खर्च बढ़ गया है।

मोबाइल की कीमतों में भी उछाल
मोबाइल शॉप संचालक विशंभर ने बताया कि बीते कुछ दिनों में मोबाइल के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। पहले जो मोबाइल 10 हजार 500 रुपये का था, वह अब 13 हजार रुपये तक का हो गया है। चाइना में बिजली की किल्लत लंबी चली तो यहां भी ज्यादा दिक्कतें पैदा हो सकती हैं।

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दवा के लिए 70 फीसदी कच्चा माल चीन से आता है
बताया जा रहा है कि दवा उद्योग के लिए करीब 70 फीसदी कच्चा माल चीन से आता है। कारोबारियों का कहना है कि चीन के कुछ शहरों में दिक्कत है और वहां प्रॉडक्शन कम हो रहा है। फिलहाल यहां दवाइयों का स्टॉक तो है, लेकिन दवाइयों के कच्चे माल के दाम में 200 फीसदी तक उछाल आने से इनकी कीमतें बढ़ सकती हैं। एफओपीई के चेयरमैन बोधराज सीकरी ने बताया कि दवाइयों के दाम बढ़ रहे हैं। हालांकि फिलहाल कोई शॉर्टेज नहीं है। दवाएं ब्लैक करने वाले लोगों पर शिकंजा कसना बेहद जरूरी है।

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