Gujarat Election Result: गुजरात में BJP की बड़ी जीत… कांग्रेस के लिए बना दोहरा सदमा

Webvarta Desk: गुजरात (Gujarat News) के सभी छह नगर निकायों (Gujarat Election Result) में एकतरफा जीत ने BJP को विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा बूस्ट दिया है। इस चुनाव परिणाम ने यह साफ कर दिया कि गुजरात के शहरी क्षेत्रों में बीजेपी की पकड़ और मजबूत हुई है।

आंकड़े बताते हैं कि कैसे बीजेपी ने बीते दिनों में शहरी मतदाताओं (Gujarat Election Result) के बीच अपनी लोकप्रियता बढ़ाने में सफलता पाई है जबकि कांग्रेस का रहा-सहा जनाधार भी लगातार सिकुड़ता जा रहा है। आम आदमी पार्टी (AAP) और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुसलमीन (AIMIM) जैसी पार्टियां कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाने में हिस्सेदारी निभा रही हैं।

​15.67% बढ़ीं बीजेपी की सीटें

2015 में हुए गुजरात निकाय चुनाव में बीजेपी को 68.18% सीटों पर सफलता मिली थी, लेकिन इस बार उसने 83.85% सीटों पर कब्जा कर लिया। यानी, बीजेपी ने पिछले छह सालों में अपने कब्जे की सीटों में 15.67% का इजाफा कर लिया। पिछली बार 572 सीटों पर चुनाव हुए थे जबकि इस बार 576 सीटों पर।

​कांग्रेस को 21.05% सीटों का नुकसान

गुजरात के शहरी मतदाता कितनी तेजी से कांग्रेस से दूर हो रहे हैं, इसका एक नमूना भी इस चुनाव परिणाम में देखने को मिला है। पार्टी ने 2015 में कुल 30.6% सीटें जीती थीं, लेकिन इस बार यह घटकर सिर्फ 9.55% रह गया। यानी, कांग्रेस ने बीते छह सालों में 21.05% सीटें खो दीं।

​किस-किसके हाथों कितना लुटी कांग्रेस

बीजेपी के फायदे और कांग्रेस के नुकसान के बीच 5.38% का अंतर है। जैसा कि ऊपर बताया गया है कि कांग्रेस ने अपनी 21.05% सीटें खोईं जबकि बीजेपी की सीटों में 15.67% का इजाफा हुआ। यानी कांग्रेस के हिस्से की 5.38% सीटें बीजेपी के पास नहीं गईं। इसका मतलब है कि इन 5.38% सीटों पर अन्य उम्मीदवारों ने कब्जा किया।

दरअसल, इन अन्य उम्मीदवारों के प्रदर्शन की तुलना करें तो 2015 में इनके पास 1.22% सीटें थीं जो इस बार बढ़कर 6.60% हो गईं। यानी, इस बार उन 5.38% सीटों पर अन्य ने कब्जा किया जो कांग्रेस से खिसकी तो लेकिन बीजेपी के पास नहीं गई। अब स्पष्ट करें तो पता चलेगा कि कांग्रेस ने जो 21.05% सीटें खोईं, उसका बड़ा हिस्सा 15.67% बीजेपी के पास जबकि 5.38% हिस्सा अन्य के पास गया। राजकोट में कांग्रेस पार्टी ने 2015 में 33 सीटें जीती थीं जो इस बार घटकर 4 पर आ गई।

​पाटीदारों ने खारिज की हार्दिक पटेल की राजनीति?

कांग्रेस को एक और मोर्चे पर झटका लगा है वो है पाटीदारों की राजनीति का मोर्चा। पाटीदार आंदोलन के बाद सक्रिय राजनीति में आए हार्दिक पटेल चुनावी अखाड़े में चारों खाने चित हो गए। कांग्रेस ने उन्हें बड़ी उम्मीद से अपनी गुजरात इकाई का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया था, लेकिन अन्य इलाकों की बात ही क्या खुद पाटीदारों के इलाके में भी वो कांग्रेस मटियामेट हो गई।

पाटीदारों के गढ़ सूरत में कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला और वहां आम आदमी पार्टी ने जबर्दस्त सेंध लगाते हुए 27 सीटें अपने नाम कर ली। आम आदमी पार्टी के सारे कैंडिडेट 22 से 40 वर्ष के थे। पार्टी को वारछा, कोपदरा, काटरगाम और पुना जैसे पाटीदार बहुल इलाकों में शानदार समर्थन मिला। अब यह सवाल जरूर पूछा जाएगा कि क्या पाटीदार समाज ने हार्दिक पटेल की राजनीति को सिरे से खारिज कर दिया?

​आप का शानदार आगाज

वहीं, राज्य में नगर निकाय चुनावों में पहली बार उतरी आम आदमी पार्टी (आप) ने 27 सीटों पर जीत हासिल की और ये सभी सीटें उसने सूरत में जीती। आप सूरत नगर निगम में मुख्य विपक्ष के रूप में उभरी। आप ने छहों नगर निगमों में कुल 470 उम्मीदवार उतारे थे। पहली बार गुजरात में स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने वाली असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम ने अहमदाबाद के मुस्लिम बहुल जमालपुर और मकतामपुरा वार्ड में सात सीटें जीतीं। जामनगर में बहुजन समाज पार्टी के तीन उम्मीदवारों ने जीत हासिल की जबकि एक निर्दलीय उम्मीदवार अहमदाबाद में जीता।

​कांग्रेस का सिमटा वोट बैंक

विपक्षी दल कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा और वह केवल 55 सीटों पर जीत दर्ज कर पाई है। यहां तक कि कांग्रेस सूरत में अपना खाता खोलने में नाकाम रही। कांग्रेस ने तीन नगर निगमों में केवल एक अंक में सीटें जीतीं और सूरत में तो उसे एक भी सीट नहीं मिली। कांग्रेस ने अहमदाबाद में 25, राजकोट में चार, जामनगर में 11, भावनगर में आठ और वडोदरा में सात सीटें जीतीं। इन नगर निगमों के चुनाव के लिए मतदान 21 फरवरी को हुआ था।

​AIMIM ने मारी बाजी

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM का अहमदाबाद नगर निगम चुनाव में आगाज अच्छा रहा। पार्टी ने इस नगर निगम के 21 वार्डों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे जिनमें 7 पर जीत हासिल हुई। पार्टी ने जमालपुर वार्ड की सभी चार सीटें जबक मकतमपुरा वार्ड की चार में से तीन सीटों पर कब्जा जमा लिया। इन सीटों पर पारंपरिक तौर से कांग्रेस पार्टी का कब्जा हुआ करता था।

​बीजेपी की प्रचंड जीत

भाजपा ने गुजरात में छह नगर निगमों के लिए हुए चुनाव में प्रचंड जीत हासिल की। मंगलवार को हुई मतगणना में 576 में से 483 सीटें जीतकर भाजपा ने इन नगर निकायों में अपनी सत्ता बरकरार रखी। सत्तारूढ़ दल ने राज्य के सभी छह नगर निगमों- अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, राजकोट, जामनगर और भावनगर में सत्ता बरकरार रखी। बीजेपी ने अहमदाबाद में 192 सीटों में से 159, राजकोट में 72 सीटों में से 68, जामनगर में 64 में से 50 सीटें, भावनगर में 52 सीटों में से 44, वडोदरा में 76 सीटों में से 69 और सूरत में 120 सीटों में से 93 सीटें जीतीं।

​मुख्यमंत्री रुपाणी का बढ़ा कद

बीजेपी ने इस नगर निकाय चुनाव में सबसे बड़ी जीत मुख्यमंत्री विजय रुपाणी के गृह नगर राजकोट में दर्ज की। वहां नगर निगम के 72 वार्डों में 68 सीटें बीजेपी की झोली में चली गईं। यानी, राजकोट की 94.44% सीटों पर बीजेपी ने कब्जा जमा लिया। बीजेपी के इस तगड़े प्रदर्शन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि 2016 में उसे यहां सिर्फ 38 सीटें मिली थीं जो बहुमत के लिए जरूरी आंकड़े से एक ज्यादा थी। साफ है कि राजकोट में रुपाणी के कारण बीजेपी में भरोसा बढ़ा और वो पिछली बार के मुकाबले 78% ज्यादा सीटें जीत गई।