विधानसभा सत्र बुलाने की मांग पर अड़ा गहलोत खेमा, राजभवन में डटे विधायक, लग रहे टेंट

New Delhi: Gehlot Camp Adamant for Assembly Session: राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार के समर्थक विधायकों ने शुक्रवार को राजभवन में ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारे लगाये।

गहलोत खेमे (Gehlot Camp Adamant for Assembly Session) के ये विधायक मुख्यमंत्री गहलोत की अगुवाई में ही राज्यपाल कलराज मिश्र से मिलने और विधानसभा का सत्र बुलाने का आग्रह करने राजभवन पहुंचे थे। इन विधायकों के साथ कांग्रेस सरकार के समर्थक निर्दलीय और अन्य विधायक भी राजभवन पहुंचे।

मुख्यमंत्री गहलोत पहले जब राज्यपाल से मुलाकात कर रहे थे तो बाकी विधायक मंत्री बाहर लॉन में इंतजार कर रहे थे। इस दौरान इन विधायकों ने नारेबाजी की। विधायकों ने ‘हर जोर जुल्म की टक्कर में इंसाफ हमारा नारा है’, ‘इंकलाब जिंदाबाद’, ‘अशोक गहलोत संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं’, ‘अशोक गहलोत जिंदाबाद’ के नारे लगाए।

इससे पहले गहलोत ने मीडिया से कहा कि सरकार के आग्रह के बावजूद ‘ऊपर से दबाव’ के कारण राज्यपाल विधानसभा का सत्र नहीं बुला रहे हैं। कांग्रेस अब इस लड़ाई को सड़क पर ले जाने का मूड बना चुकी है। प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद डोटासरा ने ट्वीट कर कहा, ‘भाजपा द्वारा राजस्थान में लोकतंत्र की हत्या के षड़यंत्र के खिलाफ कल (शनिवार) सुबह 11 बजे सभी जिला मुख्यालयों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा धरना प्रदर्शन किया जायेगा।’

राजभवन में अनिश्चितकालीन धरने की तैयारी

राजभवन के मैदान में बैठे कांग्रेस विधायक जिद पर हैं। वे राज्यपाल से विधानसभा सत्र बुलाने की मांग को मनवाने के लिए डटे रहने का फैसला लिया है। राजभवन में टेंट मंगवा लिए गए हैं। वहीं राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा है कि विधिक से कानूनी राय लेने के बाद ही विधानसभा का सत्र बुलाने की इजाजत दे पाएंगे।

उन्होंने सीएम गहलोत से पूछा है कि आखिर वे सत्र क्यों बुलाना चाहते हैं, इस संदर्भ में उचित जवाब बताएं। वहीं जानकारों का कहना है कि अगर किसी राज्य की सरकार का मंत्रिमंडल लगातार दो बार राज्यपाल से विधानसभा सत्र बुलाने की मांग करते हैं तो वे इसका आदेश देने के लिए बाध्य हैं। फिलहाल सीएम अशोक गहलोत पहली बार विधानसभा का सत्र बुलाने का अनुरोध करने पहुंचे हैं।

कांग्रेस ने कहा, गलत कर रहे राज्यपाल

कांग्रेस ने राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले और विधानसभा सत्र की मांग को लेकर अपने विधायकों के राज भवन में धरना देने के संबंध में शुक्रवार को आरोप लगाया कि मौजूदा समय में लोकतंत्र की नई परिभाषा गढ़ी जा रही है और राज्यपाल प्रजातंत्र के रक्षक होने की भूमिका का निर्वहन नहीं कर रहे हैं।

पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले की पृष्ठभूमि में दावा किया कि इन दिनों हाई कोर्टों में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का अनुसरण नहीं किया जा रहा है। उन्होंने वीडियो लिंक के माध्यम से संवाददाताओं से कहा, ‘लोकतंत्र की नयी परिभाषा गढ़ी जा रही है। अब राज्यपाल लोकतंत्र के रक्षक नहीं रहे, बल्कि वे केंद्र की सत्ता के रक्षक हैं।’

हाई कोर्ट के फैसले को लेकर सिब्बल ने कहा, ‘कहना नहीं चाहिए लेकिन कहना पड़ता है कि सुप्रीम कोर्ट जो फैसले करता है उसे हाई कोर्ट किनारे कर देते हैं। सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की पीठ के फैसले का अनुसरण नहीं किया जा रहा है।’ फैसले पर निराश जताते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं बहुत निराश हूं। कोई रोशनी नहीं दिखती।’

कांग्रेस नेता ने कहा कि सचिन पायलट को बताना चाहिए कि वह क्या चाहते हैं और उन्हें यह समझना चाहिए कि 20-25 विधायकों के साथ वह मुख्यमंत्री नहीं बन सकते। उन्होंने कहा, ‘सचिन पायलट को इतनी छोटी उम्र में जो मिला, शायद ही किसी को इतना मिला हो। अब आप (पायलट) क्या चाहते हैं? अगर भाजपा में शामिल होना चाहते हैं तो बताइए। अगर आप अपनी पार्टी बनाना चाहते हैं तो बताइए। यह बताइए कि क्या कोई ‘डील’ हुई है? बिन बोले होटल में बैठकर काम नहीं चलेगा।’

सिब्बल ने कहा, ‘अगर आपकी कोई और चिंता है तो आप बताइए। आप 20-25 विधायकों के साथ मुख्यमंत्री नहीं बन सकते। कांग्रेस के पास राजस्थान में 100 से अधिक विधायक हैं।’ उन्होंने कहा, ‘इस तरह से सबके सामने तमाशा नहीं बनाना चाहिए। इसमें पार्टी का नुकसान है, आपका नुकसान है, सभी का नुकसान है।’

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