Friday, January 22, 2021
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ED की फारूक अब्दुल्ला पर बड़ी कार्रवाई, जब्त की 12 करोड़ की संपत्ति

Webvarta Desk: जम्मू-कश्मीर क्रिकेट घोटाला मामले (JK Cricket Scam) में शनिवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) से संबंधित 2 घर, 3 प्लॉट और एक अन्य प्रॉपर्टी को सीज कर दिया है। इसकी कुल कीमत बाजार में करीब 11.86 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

फारूख अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) की जो संपत्ति ED ने अटैच की है उसमें खास बात ये है कि श्रीनगर के गुपकार रोड वाला घर और रेजीडेंसी रोड पर कमर्शियल बिल्डिंग एक सरकारी जमीन पर बनी हुई है। और फारूख अब्दुल्ला ने इन्हें लीज पर ले रखा है। इसके अलावा जम्मू के संजवान में जो घर है वो भी सरकार और वन विभाग की जमीन पर है, जिसे फारूख अब्दुल्ला ने कब्जा कर घर बना रखा है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, यह मामला जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन के करोड़ों के घोटाले से जुड़ा हुआ है। उस वक्त फारूख अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) JKCA के अध्यक्ष थे। और BCCI ने इसी दौरान 109।78 करोड़ राज्य में क्रिकेट के डेवलेपमेंट के लिए दिए गए थे।

साल 2005-06 से 2011-12 तक J&KCA को BCCI से फंड अलॉट हुआ था, जो कि J&K में क्रिकेट के डेवलेपमेंट के लिए था। लेकिन आरोप है कि J&K के पूर्व मुख्यमंत्री और J&KCA के तत्कालीन अध्यक्ष फारूख अब्दुल्ला ने अहसान अहमद मिर्जा और मीर मंजूर गजनफर के साथ मिल कर 43।69 करोड़ रुपये का घोटाला किया और अपने बैंक खातों में इन पैसों को जमा कराया या कैश निकाल लिया।

जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन में हुए घोटालों को लेकर जांच सीबीआई (CBI) को सौंप दी थी, जिसमें फारूख अब्दुल्ला समेत खंजाची एहसान एहमद मिर्जा और मीर मंजूर गज्फनर समेत दूसरे आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज जांच शुरू की थी और उसी के आधार पर ईडी ने मनी लॉड्रिंग (Money Laundering) का मामला दर्ज किया था।

ईडी ने जांच में पाया कि 2004 में JKCA के खजांची मुख्तारकांत ने इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद फारुख अब्दुल्ला ने एहसान अहमद मिर्जा को बिना इलेक्शन करवाए कोषाध्यक्ष बना दिया। 2006 में जब JKCA के इलेक्शन हुए तो मीर मंजूर गजनफर JKCA के खज़ांची बने, लेकिन कोर्ट के स्टे के कारण एहसान अहमद मिर्जा ही चार्ज संभाले रहे। जब कोर्ट का स्टे हट गया तो मीर मंजूर गजनफर को खज़ांची का चार्ज देने के बजाये फारूख अब्दुल्ला ने एक फाइनेंस कमेटी बना दी और दोनों को JKCA के खाते चलाने की मंजूरी दे दी।

आरोप है कि इसके बाद दोनों ने J&K बैंक में संयुक्त नाम से अपने खाते खुलवा लिए और जेकेसीए के डेवलेपमेंट के लिये आये पैसों को अपने खाते में ट्रांसफर कर लिया। 2009 में हुए JKCA के चुनावों में एहसान अहमद मिर्जा खजांची बने और 2011 में हुए चुनावों में जनरल सेक्रेटरी और फारुख अब्दूल्ला अधयक्ष बने। आरोप है कि 2004 से 2012 तक लगातार JKCA के खातों से पैसे निजी खातों में जाते रहे।

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