गायत्री प्रजापति के घर ED का छापा, मिले 11 लाख के पुराने नोट..ड्राइवर के नाम 200 करोड़ की संपत्ति

Webvarta Desk: ED Raid Jayatri Prajapati House: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) की सरकार में मंत्री रहे गायत्री प्रजापति (Jayatri Prajapati) की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही हैं।

दरअसल, खनन घोटाले को लेकर पिछले दिनों प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गायत्री प्रजापति (Jayatri Prajapati) के अमेठी वाले घर पर छापेमारी की थी, जिसमें कुल 11 लाख रुपये के पुराने नोट बरामद हुए हैं। इसके अलावा ED को 5 लाख रुपये के सादे स्टाम्प पेपर, डेढ़ लाख रुपये कैश और सौ से अधिक बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज़ मिले हैं।

बता दें कि बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय ने समाजवादी पार्टी की सरकार में खनन मंत्री रहे गायत्री प्रजापति के अमेठी के आवास और दफ्तर पर छापा मारा था। खनन घोटाले के संबंध में हुई ये छापेमारी लंबे वक्त तक चली, जिसमें ईडी को कई दस्तावेज मिले हैं।

मिले कई अहम दस्तावेज

पूर्व मंत्री के आवास और दफ्तर पर ईडी को छापेमारी में जो दस्तावेज मिले हैं, उनसे पता चलता है गायत्री प्रजापति की लखनऊ, कानपुर, मुंबई, सीतापुर समेत छह से ज्यादा शहरों में संपत्ति है। दावा किया जा रहा है कि यह सारी संपत्ति खनन की कमाई से बनाई गई है।

प्रवर्तन निदेशालय के खुलासे के अनुसार, कई बेनामी संपत्तियों में निवेश किया गया है और यह बेनामी संपत्तियां करीबी रिश्तेदारों, निजी सहायकों और ड्राइवरों के नाम 200 करोड़ से ज्यादा की समाप्ति ली गई हैं।

सपा सरकार के दौरान हुआ था घोटाला

यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रजापति अभी रे प के मामले में जेल में बंद हैं। साथ ही खनन के पट्टों के आवंटन मे धांधली के आरोप में उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई की जांच भी चल रही है। इस जांच के सिलसिले में गायत्री प्रजापति और उनके करीबियों पर कई बार छापेमारी हो चुकी है।

बता दें कि यूपी के अवैध खनन मामले की कोर्ट के आदेश पर सीबीआई जांच कर रही है। इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय भी इस मामले में एक्टिव हुआ है। इस घोटाले में एजेंसियों की नजर यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव पर भी है।

अखिलेश यादव 2012 से 2017 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और 2012 से 2013 तक राज्य के खनन मंत्री रहे हैं। 2012 से 2016 के बीच ही प्रदेश में अवैध खनन हुआ था। इस मामले में पहले भी एजेंसियों ने कई अधिकारियों के यहां छापेमारी की थी, साथ ही कई शहरों में दस्तावेजों को खंगाला गया था।