ब्लड कैंसर के इलाज में देरी न करें : डॉ. अंकुर मित्तल

Dr. Ankur Mittal

लुधियाना, 01 जून (राजकुमार शर्मा)। ब्लड कैंसर के मरीज किसी भी स्थिति में अपने इलाज में देरी नहीं कर सकते क्योंकि यह घातक हो सकता है। लुधियाना के मोहन दाई ओसवाल हॉस्पिटल के क्लीनिकल हेमेटोलॉजिस्ट कन्सल्टन्ट डॉ. अंकुर मित्तल ने मंगलवार को कोविड-19 और ब्लड कैंसर पर एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए यह बात कही।

उन्होंने कहा कि ग्लोबोकॉन 2020 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल एक लाख से अधिक लोगों में ब्लड कैंसर जैसे लिम्फोमा, ल्यूकेमिया और मल्टीपल मायलोमा का निदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे मरीजों का इलाज करना सर्वोच्च प्राथमिकता है, क्योंकि ऐसे मरीजों के इलाज में देरी नहीं की जा सकती है। इसके अलावा, भारत में अमेरिका और चीन के बाद दुनिया में हेमेटोलॉजिकल कैंसर की तीसरी सबसे बड़ी समस्या है।

कोविड-19 प्रभाव के बारे में बात करते हुए, डॉ. अंकुर ने कहा कि कोविड-19 के कई लक्षण उन लक्षणों के साथ ओवरलैप कर सकते हैं जो एक मरीज को उनके कैंसर निदान या बुखार, सांस की तकलीफ, शरीर या मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द जैसी समस्याओं के उपचारों से अनुभव हो सकते हैं। इस प्रकार यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि इस प्रकार के लक्षण के लिए डॉक्टर से परामर्श लें। डॉ. अंकुर ने बताया कि वजन कम होना, अस्पष्टीकृत बुखार, रात को पसीना आना व खुजली लिम्फोमा के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि हेमेटोलॉजिकल विकारों के उनके 30 प्रतिशत से अधिक रोगी वर्तमान में टेली-मेडिसिन के माध्यम से इलाज कर रहे हैं जो वास्तव में कोविड के समय में रोगियों को सुरक्षित रखने में उनकी मदद कर रहा है। इसके अलावा हम मोहन दाई ओसवाल अस्पताल में कोविड-19 के संक्रमण के प्रसार को सीमित करने के लिए हर संभव सावधानी बरत रहे हैं, जिसमें आगमन से पहले कोविड-19 के लक्षणों की जांच करना, दरवाजे पर लक्षणों की जांच करना, आगंतुकों को केंद्रों तक सीमित करना, खुला व हवादार प्रतीक्षा कक्ष व मास्क पहनना शामिल है।