उद्धव, आदित्य और सुप्रिया सुले को हो सकती है 6 महीने की जेल, जानें क्या है पूरा मामला

New Delhi: महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray), उनके बेटे आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) और एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले (Supriya Sule) की मु’श्कि’लें बढ़ती दिख रही हैं।

दरअसल तीनों पर चुनावी हलफनामे (Poll Affidavits) में संपत्ति और देनदारी की गलत या अधूरी जानकारी देने का आ’रोप है। चुनाव आयोग (Election Commission) ने इसके खिलाफ शिका’यतों की जांच CBDT को सौंपी है।

महाराष्ट्र के सत्तारूढ़ दल शिवसेना (Shivsena) और उसकी सहयोगी पार्टी NCP के इन नेताओं के चुनावी हलफनामे (Poll Affidavits) में काफी असं’गतियों के आ’रोप हैं। अपनी संपत्ति और देनदारी की गलत या अधूरी जान जानकारी देने के चलते तीनों नेताओं को जांच का सामना करना पड़ सकता है।

शिवसेना ने बताया- रूटीन मूव

सूत्रों के अनुसार कि सुले, उद्धव और आदित्य ठाकरे के अलावा गुजरात के विधायक नाथाभाई ए पटेल के खिलाफ शिकायतों को चुनावी पैनल की प्रशासनिक समीक्षा पर आधारित जांच के लिए भेजा गया है। उद्धव और आदित्य ठाकरे का हलफनामा (Poll Affidavits) दाखिल करने वाले शिवसेना नेता ने इसे रूटीन मूव बताया।

इस वजह से सीबीडीटी को भेजी गई जांच

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, शिका;यतकर्ताओं ने अपने दावे के समर्थन में कुछ सामग्री का हवाला दिया है जिससे पता चलता है कि इन नेताओं के हलफनामे (Poll Affidavits) में लिखी गई डीटेल सही नहीं है। माना जा रहा है कि इसी वजह से चुनाव आयोग (Election Commission) ने मामले को सीबीडीटी को भेजा है।

तो हो सकती है 6 महीने की जेल

चुनाव आयोग (Election Commission) को कार्रवाई के लिए सीबीडीटी से अपडेट का इंतजार है। अगर नेताओं पर लगाए गए आ’रोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाते हैं तो रिप्रजेटेंशन ऑफ पीपल ऐक्ट की धारा 125 ए के तहत सीबीडीटी केस दर्ज किया जा सकता है। इस सेक्शन के तहत अधिकतम 6 महीने की जे’ल या जु’र्मा’ना या फिर दोनों हो चुका है।

चुनावी हलफनामे में क्या होता है

चुनावी हलफनामे (Poll Affidavits) में एक उम्मीदवार अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि, संपत्ति, देनदारी और शैक्षिक योग्यता का ब्योरा देता है। 2013 में चुनाव आयोग ने फैसला किया था कि हलफनामे में लिखी उम्मीदवारों की संपत्ति और देनदारी को सीबीडीटी वेरिफाइ करेगा।

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