चार्जशीट में खुलासा- पिंजरा तोड़ ग्रुप के संपर्क में था दिल्ली दंगे का आरोपी ताहिर हुसैन

New Delhi: दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में बताया है कि दिल्ली दं’गों में आरोपी निलंबित आप पार्षद ताहिर हुसैन (Tahir Hussian) पिंजरा तोड़ ग्रुप के साथ लगातार संपर्क में थे।

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में दिल्ली में भड़के दं’गों के मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अब तक 18 लोगों को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में जामिया के छात्र, पिंजरा तोड़ ग्रुप से जुड़ी छात्राएं, कांग्रेस नेता, आप पार्षद समेत अन्य लोग शामिल हैं।

पिंजडा तोड़ ग्रुप के साथ कनेक्शन

दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में खुलासा हुआ है कि ताहिर हुसैन (Tahir Hussian) कथित रूप से पिंजरा तोड़ के सदस्यों और जेएनयू के छात्रों नताशा नरवाल और देवांगना कलिता के संपर्क में थे, जिन्होंने फरवरी में उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दं’गों को भड़काने में पूरा जोर लगाया था।

दिल्ली पुलिस ने कहा, ‘ताहिर हुसैन (Tahir Hussian) ने दो महिलाओं और कई अन्य लोगों के साथ कथित तौर पर 53 व्यक्तियों की मौ’त के लिए जिम्मेदार हैं, अनगिनत निर्दोष व्यक्तियों को चोटें पहुंचाई और करोड़ों रुपये की संपत्तियों को नष्ट किया। दिल्ली पुलिस ने कहा कि इन लोगों ने पूरे राष्ट्र के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाया।

पुलिस की चार्जशीट में इनके नाम

पूर्वी दिल्ली सांप्रदायिक हिं’सा से संबंधित एक मामले में पिछले महीने मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट राकेश कुमार रामपुरी के समक्ष चार्जशीट दायर की गई थी और यह इस पर 20 जुलाई को सुनवाई की जाएगी। पुलिस की चार्जशीट में पता चला कि हुसैन कथित रूप से नरवाल और कलिता के संपर्क में था।

वाजिद खान (कथित तौर पर शाहीन बाग़ के आयोजन में शामिल, हाजी बल्लो कथित रूप से खजूरी खास इलाके में सीएए के विरोधी प्रदर्शनों में शामिल, हाजी (कथित तौर पर चांद बाग़ क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन के आयोजन में शामिल) और हसीबुल हसन (कथित रूप से शामिल) जफराबाद क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन)। फरवरी में नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान उत्तर पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा के सिलसिले में दस अन्य लोगों के साथ मुख्य आरोपी के रूप में ताहिर हुसैन का नाम चार्जशीट में रखा गया।

क्या है पिंजरा तोड़ ग्रुप?

पिंजरा तोड़ ग्रुप (Pinjra Tod Group) कॉलेज की छात्राओं का एक संगठन है, जिसमें दिल्ली यूनिवर्सिटी के नामी कॉलेजों की लड़कियां भी हैं। ये संगठन कॉलेज हॉस्टल के नियमों के खिलाफ काम करता है। दिल्ली में सीएए को लेकर हुई हिं’सा में कई बार इस संगठन का नाम सामने आया है।

इस ग्रुप में कॉलेज की मौजूदा छात्राएं तो होती ही हैं, साथ ही उस कॉलेज से पढ़कर निकल चुकी छात्राएं भी होती हैं। इस ग्रुप की छात्राओं की मांग होती है कि हॉस्टल और पीजी में महिला छात्रों पर कम से कम प्रतिबंध हों। इस ग्रुप की महिलाओं का तर्क होता है कि महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर उनके अधिकार नहीं छीनने चाहिए। महिलाओं को पूरी आजादी से जीने का हक होना चाहिए।

कैसे बना पिंजरा तोड़ ग्रुप?

जब 2015 में गर्मी की छुट्टियों के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी खुली तो जामिया मिलिया इस्लामिया की छात्राओं ने एक नोटिस जारी किया, जिसके तहत लड़कियों को 8 बजे से बाद बाहर रहने की इजाजत नहीं थी। दिल्ली महिला आयोग ने इसका विरोध किया और पूछा कि यूनिवर्सिटी ने ऐसा फैसला क्यों लिया।

उसी दौरान महिला छात्रों के एक समूह ने महिला आयोग की प्रतिक्रिया को देखते हुए अन्य यूनिवर्सिटी के नियम-कायदों पर भी सवाल उठाने शुरू किए। यहीं से पिंजरा तोड़ ग्रुप की शुरुआत हुई, जो छात्राओं पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों, उनके पीजी और हॉस्टल का किराया अधिक होने आदि के खिलाफ आवाज उठाना शुरू किया।

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