आज पेश होगा दिल्ली का बजट, जानें- बीते साल कितना ‘टारगेट’ पूरा कर पाई केजरीवाल सरकार

Webvarta Desk: दिल्ली सरकार (Delhi Kejriwal Govt) मंगलवार को अपना बजट (Delhi Budget) पेश करेगी। इससे पहले सोमवार को दिल्ली के वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) ने लगातार चौथे साल अपने आउटकम बजट (Outcome Budget) की स्टेटस रिपोर्ट दिल्ली विधानसभा में रखी और बताया कि 2020-21 के लिए तय किए टारेगट को लेकर विभागों की परफॉर्मेंस कैसी रही।

दिल्ली सरकार (Delhi Kejriwal Govt) ने 2017-18 में आउटकम बजट (Outcome Budget) कॉन्सेप्ट को लागू किया और तब से हर साल सरकार यह बताती है कि विभागों की कितनी योजनाएं ऑनट्रैक हैं और कितनी योजनाओं पर काम में देरी हो रही है।

इस साल आउटकम बजट (Outcome Budget) की स्टेटस रिपोर्ट में एजुकेशन डिपार्टमेंट टॉप पर है और इसकी 84 फीसदी योजनाएं ऑनट्रैक हैं और ज्यादातर में टारेगट पूरे हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की 80 फीसदी, पर्यावरण की 79 फीसदी, पीडब्ल्यूडी की 73 फीसदी, ट्रांसपोर्ट की 71 फीसदी योजनाएं ऑनट्रैक हैं और तय किए गए टारगेट को हासिल किया जा रहा है।

लगातार चौथे साल पेश किया आउटकम बजट

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार ने लगातार चौथे साल अपना आउटकम बजट पेश किया। यह देश की एकमात्र सरकार है, जो खुद से ही अपने पिछले बजट का सारा हिसाब जनता को देती है।

मनीष सिसोदिया ने आउटकम बजट पेश करते हुए बताया कि अलग-अलग विभागों और एजेंसियों के लिए 2500 से ज्यादा आउटपुट और आउटकम इंडिकेटर्स तय किए गए थे और 31 दिसंबर 2020 तक की स्टेटस रिपोर्ट तैयार की गई है। इसके तहत विभिन्न कार्यक्रमों के लिए आउटपुट और आउटकम इंडिकेटर तय किए गए थे। आउटपुट इंडिकेटर बताते हैं कि सरकारी विभागों को किस तरह की सेवाएं देनी हैं, जबकि आउटकम इंडिकेटर दर्शाता है कि इनसे कितने लोगों को लाभ पहुंचा है।

एजुकेशन : 84% योजनाएं ऑनट्रैक

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि कोरोना काल में 229 दिन ऑनलाइन क्लासेज हुई हैं, जबकि सामान्य तौर पर 220 दिन क्लास होती है। इन ऑनलाइन क्लासेज में 89 से 98 फीसदी बच्चों की हाजिरी रही है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा कोरोना काल में ‘पैरंटिंग इन द टाइम ऑफ कोरोना’ जैसी श्रृंखला की शुरुआत की गई। जुलाई से दिसंबर 2020 की अवधि के लिए सूखी राशन किट का वितरण किया गया।

स्वास्थ्य : 80% लक्ष्य किए हासिल

दिल्ली सरकार ने 31 दिसंबर 2020 तक 87.8 लाख टेस्ट किए और कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए होम आइसोलेशन और प्लाज्मा थैरेपी शुरू करने वाला पहला राज्य बना। होम आइसोलेशन के दौरान 60 हजार 42 ऑक्सिमीटर और 3 हजार से ज्यादा ऑक्सिजन कॉन्सन्ट्रेटर उपलब्ध करवाए। दिल्ली सरकार ने कोरोना के दौरान दिल्ली के अस्पतालों में 27 हजार 873 कोविड बेड उपलब्ध करवाए। दिसंबर 2020 तक 496 आम आदमी मोहल्ला क्लिनिकों बनाए। 59 हजार 646 टीबी मरीजों का इलाज किया।

परिवहन विभाग : 71% योजनाएं ऑनट्रैक

लॉकडाउन के दौरान 31 मार्च से 18 मई 2020 तक बस सेवाएं निलंबित रहीं। अभी भी बसों में केवल सिटिंग कैपिसिटी के हिसाब से ही सफर की इजाजत है। इसका असर बसों की आमदमी और राइडरशिप पर पड़ा है। क्लस्टर बसों का औसत फ्लीट 98.58 फीसदी है, जबकि टारगेट 97 फीसदी का था। वहीं डीटीसी का औसत फ्लीट घटकर 73.71 फीसदी है, जबकि टारगेट 90 फीसदी का था। 5200 बसों में सीसीटीवी कैमरे व पैनिक बटन लगा दिए गए।

पीडब्ल्यूडी : 73% लक्ष्य ऑनट्रैक

दिल्ली में अलग-अलग जगहों पर 1.32 लाख सीसीटीवी कैमरे लगा दिए गए हैं और टारगेट भी इतने का ही था। दिसंबर 2020 तक 7000 हॉटस्पॉट चिह्नित किए गए हैं। पांच फुटओवर ब्रिज का निर्माण कार्य पूरा हो गया है।

दिल्ली जल बोर्ड : 62% लक्ष्य ऑनट्रैक

दिसंबर तक 1571 अनधिकृत कॉलोनियों को पानी की पाइपलाइन से जोड़ा जा चुका है। 4743 किमी पाइपलाइन बिछाई गई है। हर महीने 20000 किलोलीटर मुफ्त पानी की योजना लागू है।

श्रम विभाग

निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड के अंतर्गत पंजीकृत 44 हजार 683 श्रमिकों को प्रति व्यक्ति 10 हजार रुपये की सहायता राशि दी गई।

राजस्व : 1941 हंगर रिलीफ सेंटर की शुरुआत की। 3 महीने तक रोज 10 लाख लोगों को दिन में दो बार पका हुआ भोजन दिया गया। बेघर हुए लोगों के लिए 260 अतिरिक्त रैन बसेरों का निर्माण किया गया। 4 लाख प्रवासी श्रमिकों को उनके गृह राज्य भेजने का काम किया गया। ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले फ्रंट लाइन कर्मचारियों के परिवार को 1 करोड़ रुपये की सहायता राशि दी गई।

यातायात

लॉकडाउन के दौरान 1 लाख 56 हजार 350 परमिट, पीएसवी बैज धारकों को 5000 रुपयों की सहायता राशि दी। इनमें ऑटो, ई-रिक्शा, फटफट सेवा, ग्रामीण सेवा, स्कूल कैब के चालक शामिल थे। अगस्त 2020 में इलेक्ट्रिक वीकल पॉलिसी लागू किया गया। इसमें इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने पर सब्सिडी दी जाती है।