भाजपा को झटका देने की तैयारी में कांग्रेस! सिंधिया को हराने वाले BJP सांसद के घर कांग्रेस नेता

New Delhi: मध्यप्रदेश उपचुनाव से पहले बीजेपी (BJP) और कांग्रेस (Congress) में खलबली मची हुई है। दोनों दल एक-दूसरे के नेताओं को तोड़ने की कोशिश में हैं। कांग्रेस इस बीच बीजेपी को एक और बड़ा झटका देने की तैयारी में हैं।

कांग्रेस (Congress) ने गुना-शिवपुरी से बीजेपी सांसद केपी यादव के घर सेंधमारी की कोशिश में जुटी है। केपी यादव ने 2019 के लोकसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया को हराकर सांसद बने हैं। सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद केपी यादव कभी उनके साथ नजर नहीं आए हैं।

कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री सचिन यादव अशोकनगर स्थित सांसद केपी यादव के घर पहुंचे। सचिन यादव के उनके घर पहुंचने के बाद कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। सचिन सोमवार को केपी यादव के सतहरी स्थित घर पहुंचे थे। उनके आवास पर सचिन ने केपी यादव के भाई से करीब 40 मिनट तक बात की। अब उस क्षेत्र में इस मुलाकात की चर्चा जोरों पर है। चर्चा यह भी है कि केपी यादव के भाई जयपाल को उपचुनाव में कांग्रेस मुंगावली सीट से मैदान में उतार सकती है।

सामान्य है यह मुलाकत

वहीं, मुलाकात के बाद पूर्व मंत्री सचिन यादव ने कहा कि सांसद के भाई अजयपाल यादव और महेन्द्र यादव स्कूल में मेरे सीनियर रहे हैं और पारिवारिक संबंध होने की वजह से मुलाकात हुई है। लेकिन इस क्षेत्र में मुलाकात की वजहें कुछ और बताई जा रही हैं।

सिंधिया समर्थकों के इस्तीफे के बाद मुंगावली सीट पर उपचुनाव है। क्षेत्र में चर्चा जोरों पर है कि सांसद केपी यादव के भाई को कांग्रेस मुंगावली से प्रत्याशी बना सकती है। सियासी अटकलों को सचिन यादव खारिज कर रहे हैं।

कभी सिंधिया के करीबी रहे हैं केपी

केपी यादव कभी मुंगावली जिला पंचायत में ज्योतिरादित्य सिंधिया के सांसद प्रतिनिधि हुआ करते थे। मुंगावली विधायक और कांग्रेस के दिग्गज नेता कालूखेड़ा का अचानक से निधन के बाद हुए उपचुनाव में केपी यादव ने ज्योतिरादित्य सिंधिया से टिकट की मांग की थी। उन्हें विश्वास था कि टिकट उन्हीं को मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ और टिकट ऐन वक्त पर कट गया।

इसके बाद केपी यादव ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था। केपी यादव का परिवार सिंधिया परिवार के प्रति शुरू से ही वफादार रहा है। उनके पिता रघुवीर यादव भी कांग्रेस के नेता था। वह 4 बार जिला पंचायत के अध्यक्ष भी रहे हैं।

नहीं हुआ है मिलन

सांसद बनने के बाद केपी यादव लगातार ज्योतिरादित्य सिंधिया पर हमला करते रहे हैं। सांसद ने अशोक नगर कलेक्टर को लेकर भी एक बार विवादित बयान दिया था। सिंधिया के बीजेपी में आने के बाद केपी यादव की कभी उनसे मुलाकात नहीं हुई है। न ही उनके पक्ष में कभी कोई सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है।

सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद केपी यादव के लिए भी अब पहली वाली स्थिति पार्टी में नहीं है। क्योंकि सिंधिया पूर्व में गुना-शिवपुरी से ही चुनाव लड़ते रहे हैं। आगे चलकर अगर वह इसी सीट पर दावा ठोकते हैं तो केपी की मुश्किलें बढ़ जाएंगी।

क्या है मुंगावली का समीकरण

दरअसल, मुंगावली सीट पर 2 लाख 4 हजार मतदाता हैं। जिसमें से सबसे अधिक मतदाता हरिजन-आदिवासी 42 हजार हैं, वहीं यादव 34 हजार, लोधी 18 हजार, ब्राह्मण 10 हजार, दांगी 9 हजार, कुशवाह 8 हजार, मुस्लिम 9 हजार, जैन 7 हजार, राजपूत 6 हजार, गुर्जर 3 हजार सहित विभिन्न जातियों और सम्प्रदायों के लोग इस विधानसभा में रहते हैं। ऐसे में कांग्रेस को भी इस सीट पर ऐसे उम्मीदवार की तलाश है, जो यादव मतदाताओं के वोट पार्टी को दिला सके।

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