अमित शाह का ‘मिशन पश्चिम बंगाल’, क्या BJP भेद पाएगी ममता का किला?

New Delhi: भारतीय जनता पार्टी (BJP) अब राजनीति के ऐक्टिव मोड में आ गई है। कोरोना संक्रमण के मद्देनजर सभी तरह की गतिविधियों पर लगी लगाम के बीच गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल में जनसंवाद वर्चुअल रैली को संबोधित किया।

इसे राज्य में अगले साल होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों (West Bengal Assembly Election 2021) के शंखनाद के तौर पर देखा जा रहा है। बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में अपनी संभावनाओं के मद्देनजर जोर-शोर से तैयारी शुरू कर दी है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा की 294 सीटों में से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के पास 224 सीटें हैं। वहीं बीजेपी को 16 सीटों से संतोष करना पड़ा था। राज्य में बीजेपी (bjp in west bengal) कमजोर स्थिति में थी। 2014 में मोदी लहर के बावजूद बीजेपी केवल 2 सीटों पर ही जीत दर्ज कर सकी थी। दो साल बाद हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी के खाते में महज 16 सीटें ही आईं।

‘मिशन बंगाल’ का दिखा असर

इसके बाद बीजेपी का फोकस बंगाल में किले को भेदने पर हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में पार्टी ने पश्चिम बंगाल में आक्रामक कैंपेन चलाया। जिसका नतीजा 2019 में हुए लोकसभा चुनावों में देखने को मिला।

लोकसभा की 42 सीटों में से बीजेपी की झोली में 18 सीटें आईं। वोट शेयर भी 17 प्रतिशत से बढ़कर 42 प्रतिशत पहुंच गया। विधानसभा वार आंकड़ों पर गौर करें तो 128 सीटों पर बीजेपी को फायदा हुआ था। पीएम नरेंद्र मोदी ने बंगाल में 17 रैलियां की थीं। पार्टी को पीएम मोदी के नेतृत्व और जमीन पर कार्यकर्ताओं की मेहनत के कारण ज्यादा सीटें हासिल हुईं।

उपचुनाव में बीजेपी की हार

हालांकि राजनीति में कब हवा बदल जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। इसका जीता-जागता सबूत राज्य में विधानसभा की 3 सीटों पर हुए उपचुनावों में देखने को मिला, जिसमें बीजेपी को मुंह की खानी पड़ी और टीएमसी ने 3-0 से सभी सीटें अपनी झोली में डाल ली।

2021 विधानसभा चुनाव से पहले खड़गपुर सदर, कालियागंज और करीमपुर सीटों पर हुए उपचुनाव टीएमसी और बीजेपी दोनों के लिए ही प्रतिष्ठा का विषय बन गए थे। लोकसभा में सफलता से उत्साह में आई बीजेपी को 6 महीने के भीतर ही मुंह की खानी पड़ी।

CAA-NRC होंगे मुद्दे

पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी शरणार्थियों की संख्या काफी है। इस वजह से नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिकता पंजीकरण इस चुनाव का अहम हिस्सा होंगे।

अमित शाह ने 1 मार्च को कोलकाता के शाहिद मीनार में नागरिकता संशोधन बिल के समर्थन में आखिरी रैली की थी। इसके साथ ही कोरोना वायरस महामारी के ‘कुप्रबंधन’, प्रवासी श्रमिक संकट तथा हिंसा की राजनीति जैसे मुद्दों के भी शामिल होने की संभावना है।

‘आर नोई ममता’ कैंपेन

बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में अपना चुनावी कैंपेन शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीते 9 साल के शासन के खिलाफ पिछले सप्ताह नौसूत्री आरोपपत्र जारी कर चुकी भारतीय जनता पार्टी ने हाल ही में सोशल मीडिया पर ‘आर नोई ममता’ (ममता का शासन अब और नहीं) अभियान चलाया है।

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