नीतीश के सामने फरियाद लेकर पहुंचे ‘नीतीश कुमार’, मुस्कुराते हुए बोले CM साहब- ‘आप भी मेरा ही नाम रख लिए…’

पटना
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जनता दरबार में सोमवार को एक अजीब घटना देखने को मिली। दरअसल एक फरियादी ने सीएम नीतीश से कहा कि मेरा नाम नीतीश कुमार है। यह सुनते ही सीएम नीतीश झट से बोले- ‘आप भी मेरा ही नाम रख लिए…’। इसके बाद सीएम ने अधिकारियों की तरफ देखकर मुस्कुराए और कहा ‘आज कल यह नाम बड़ा रखा जा रहा है।’ इस पर फरियादी युवक ने कहा कि मेरे माता-पिता ने ये नाम रखा है।

यहां बता दें कि अक्टूबर में दूसरे सोमवार को सीएम नीतीश के जनता दरबार में शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण और अन्य विभागों की शिकायतें सुनी गई। सीएम नीतीश हमेशा की तरह गंभीरता से लोगों की शिकायतें सुनी और तत्काल उसका निराकरण करने की कोशिश की। आज के जनता दरबार की खास बात यह रही कि ज्यादातर युवा वर्ग के फरियादी सीएम के पास पहुंचे थे। इनमें से किसी को नौकरी में वेतन नहीं मिल पा रहा है तो किसी की बर्खास्तगी वापस नहीं हो रही है।

लड़का की जगह लड़की की तस्वीर लगा दी
शिवहर जिले से आए एक फरियादी लड़के ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बताया कि हम 2016 में मैट्रिक की परीक्षा पास किये, लेकिन मेरे सर्टिफिकेट पर मेरी तस्वीर की बजाए एक लड़की की तस्वीर लगा दी गई। लड़की की तस्वीर की वजह से उन्हें काफी परेशानी हो रही है। हमने सुधार के लिए बिहार बोर्ड में आवेदन भी किये, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। आखिरकार वह जनता दरबार में पहुंचा है।

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फरियादी की शिकायत सुनकर सीएम नीतीश भौचक्क रह गए। सीएम ने तत्काल शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को फोन लगाया। उन्होंने फोन कर कहा, ‘लड़का मेरे सामने है और इसके सर्टिफिकेट पर लड़की की तस्वीर लगा दी गई है। ये कैसे हो गया, बिहार बोर्ड वाले को बुलाते नहीं हैं? इस मामले को देखिए।’

जनता दरबार में एक विकास मित्र पहुंचा और उसने सीएम को बताया कि उसे सैलरी नहीं मिल रही है। सीएम ने अफसर को फोन लगाकर कहा कि विकास मित्र को काहे नहीं तनख्वाह दे रहे हैं। पूछवाइए तो…इस पर सीएम ने ओएसडी ने कहा कि कुछ हुआ होगा, इसीलिए मानदेय नहीं मिल रहा होगा। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई आया है तो दिखवाइएगा न…पूछिए कि क्यों नहीं विकास मित्र को मानदेय मिल रहा?

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समस्तीपुर से आए एक और युवा फरियादी ने मुख्यमंत्री से कहा कि हम पिछड़ा वर्ग से आते हैं। 2017 में ही मैट्रिक की परीक्षा पास कि, लेकिन उन्हें 10 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि नहीं दी गई। जब सरकारी दफ्तर में जाते हैं तो धक्का मार भगा दिया जाता है। यह सुन मुख्यमंत्री गुस्से में आ गये। उन्होंने वहां मौजूद कर्मियों को कहा-पिछड़ा विभाग के सचिव को बुलाओ। फिर क्या सचिव भागे-भागे सीएम नीतीश के पास पहुंचे। फिर नीतीश ने कुमार ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को फोन लगाने को कहा। मुख्यमंत्री ने उन्हें फोन कर बुलाया। दोनों सचिव के हाजिर होने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसा क्यों हो रहा है, आप दोनों इस मामले को देखिए।