जेपी को बचाने के लिए तुड़वाया हाथ, पोस्‍टमैन के वेश में पटना आए थे नानाजी देशमुख

हाइलाइट्स

  • 11 अक्‍टूबर को हुआ था जयप्रकाश नारायण और नानाजी देशमुख का जन्‍मदिन
  • जयंती पर पीएम नरेंद्र मोदी ने दी श्रद्धांजलि, दोनों महापुरुषों को बताया ‘लीजेंड’
  • जेपी ने लोकतांत्रिक मूल्‍यों की रक्षा की लड़ाई लड़ी, नानाजी देशमुख ने गांवों की

पटना
संपूर्ण क्रांति के दौरान पटना में जब जेपी को लाठी लगी तो उसे पहले अपने पर लेने वाले नानाजी देशमुख ही थे। वे जेपी को अकेला छोड़ने को तैयार नहीं थे। देश की एक धारा के दो किनारों को जोड़ने वाले जेपी के एक पुल नानाजी देशमुख थे।

पोस्टमैन बनकर पटना पहुंच गए नानाजी
संघ के स्वयंसेवक के रूप में अपना पूरा जीवन गुजारनेवाले नानाजी देशमुख का जेपी आंदोलन और पटना से गहरा नाता रहा। संपूर्ण क्रांति आंदोलन के वक्त वो बिहार आए थे। यहां नानाजी देशमुख के एंट्री पर रोक थी। मगर नानाजी दिल्ली से ट्रेन की आरएमएस बोगी में पोस्टमैन की पोशाक में पटना पहुंच गए। इसके बाद आंदोलन में शामिल हो गए। नानाजी देशमुख के जयंती पर पीएम मोदी ने ट्वीट कर उन्हें याद किया।
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नानाजी की हाथ ने बचाई जेपी की जान!
पटना के कदमकुआं स्थित महिला चरखा समिति से पगड़ी बांधे और हाथ में लाठी लिए काला चश्मा लगाकर कार्यकर्ताओं के साथ नानाजी देशमुख भी आगे बढ़ रहे थे। इनकम टैक्स चौराहे पर पुलिस ने जुलूस को रोकने के लिए आंसू गैस गोले छोड़े और लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस जवानों ने जब जेपी और उनके कार्यकर्ताओं पर लाठियां बरसानी शुरू की तो जेपी को बचाने के लिए नानाजी देशमुख ने अपना हाथ आगे कर उन्हें बचा लिया। इसमें उनके हाथ टूट गए। जेपी ने उस घटना के बाद कहा था कि अगर नानाजी देशमुख और हैदर अली मेरी सुरक्षा में नहीं होते तो मैं मर गया होता। नानाजी ने 12 अप्रैल 1974 को जेपी को वचन देकर कहा था कि आप आंदोलन का नेतृत्व करें, हम सभी आपके साथ हैं। लोकनायक जेपी को उनकी जयंती पर पीएम मोदी ने श्रद्धांजलि दी।

संघ के समर्पित कार्यकर्ता थे नानाजी देशमुख
महाराष्ट्र के हिंगौली जिले के कंडोली गांव में नानाजी देशमुख का जन्म 11 अक्टूबर 1916 को हुआ था। उन्हें पद्म विभूषण के बाद भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया। उनका निधन 27 फरवरी 2010 को मध्य प्रदेश के सतना जिले में हुआ। नानाजी का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार से गहरा संबंध रहा। 1940 में हेडगेवार के निधन के बाद आरएसएस को मजबूती प्रदान करने में नानाजी ने अपना भरपूर योगदान दिया। उन्होंने अपना पूरा जीवन संघ के नाम समर्पित कर दिया था।