बिहार में कोरोना से बुरा हाल, ठेले पर डॉक्टर… अस्पताल में तड़प रहे मरीज

New Delhi: ठेले पर डॉक्टर Doctor on Handcart: ठेले पर कोविड केयर सेंटर पर डॉक्टर के जाने की ये तस्वीर बिहार के सुपौल जिले की हैं। यहीं के नगर पंचायत के वार्ड नंबर 12 में पब्लिक रेस्ट हाउस में कोविड केयर सेंटर बनाया गया है। वो सेंटर ठेले पर जा रहे डॉक्टर के ठीक पीछे दिख रहा है।

अब ये सेंटर नगर पंचायत के वार्ड में है या किसी टापू पर, ये आप खुद तय कर लीजिए। लेकिन इतना तो तय है कि बिहार सरकार का स्वास्थ्य विभाग कोरोना से कैसे जंग जीतेगा, इस पर शक ही है।

मंगल ‘राज’ में ठेले पर कोरोना योद्धा

ठेले पर कोविड केयर सेंटर पर डॉक्टर Doctor on Handcartके जाने की ये तस्वीर बिहार के सुपौल जिले की हैं। यहीं के नगर पंचायत के वार्ड नंबर 12 में पब्लिक रेस्ट हाउस में कोविड केयर सेंटर बनाया गया है। वो सेंटर ठेले पर जा रहे डॉक्टर के ठीक पीछे दिख रहा है।

अब ये सेंटर नगर पंचायत के वार्ड में है या किसी टापू पर, ये आप खुद तय कर लीजिए। लेकिन इतना तो तय है कि बिहार सरकार का स्वास्थ्य विभाग कोरोना से कैसे जंग जीतेगा, इस पर शक ही है। कोविड केयर सेंटर में डॉक्टर अमरेंद्र की ड्यूटी लगी है।

मंगलवार को डॉक्टर अमरेंद्र जब हाल के दिनों की तरह ठेले Doctor on Handcartपर जा रहे थे तो उनकी तस्वीरें कैमरे में कैद हो गई। जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो जवाब सुनकर ऐसा लगा कि मानों बिहार में 15-20 साल पुराना दौर वापस आ गया है।

डॉक्टर अमरेंद्र के मुताबिक पिछले दो-तीन दिनों से कोविड केयर सेंटर के कैम्पस में घुटने भर से ज्यादा पानी जमा है। ऐसी हालात में ठेले के अलावा अंदर जाने का कोई दूसरा उपाय है ही नहीं। नर्स तक को अंदर जाने के लिए कोरोना से पहले इस गंदे पानी से जंगल लड़नी पड़ती है।

सेंटर के दोनों मरीजों को पहले फ्लोर पर शिफ्ट किया गया

डॉक्टर अमरेंद्र के मुताबिक बारिश के बाद जमा हुए पानी के चलते सेंटर के दोनों मरीजों को पहले फ्लोर पर शिफ्ट कर दिया गया है। लेकिन सवाल ये है कि मरीज पहले कोरोना के संक्रमण से लड़ेगा या फिर इस गंदे पानी से फैलने वाले संक्रमण से। जवाब शायद सिस्टम के पास नहीं है।

बुधवार को भागलपुर की तस्वीरों ने किया शर्मसार

बुधवार की दोपहर एक दुकान पर सांस की बीमारी की दवा लेने शख्स की मौ’त हो गई। दवा दुकानदार के मुताबिक उसे सांस का ही दौरा पड़ा था। दुकानदार ने भागलपुर से एसपी, कोतवाली थाने और कोविड-19 एंबुलेंस को भी फोन किया था। प्रशासन घंटों तक झांकने नहीं आया।

एंबुलेंस आई तो ये कहकर लौट गई कि ये कोरोना का केस नहीं है। अगर कोरोना का केस नहीं हो तो क्या बाजार में दर्दनाक मौ’त के शिकार किसी भी मृतक को एंबुलेंस तक मुहैया नहीं कराई जाएगी… हद है!

स्वास्थ्य मंत्री ही क्यों जिम्मेवार?

अब सवाल ये कि उंगलियां राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय पर ही क्यों उठ रही हैं? सवाल तो उठेंगे ही। विश्व की सबसे बड़ी महामारी में जंग लड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग ही फ्रंट पर है। लेकिन जिस जंग से डॉक्टरों को लड़ना है, उस जंग के मैदान में पहुंचना ही अगर जंग के बराबर हो जाए तो क्या सवाल नहीं पूछे जाएंगे। बिल्कुल पूछे जाएंगे।

मंत्री जी, अभी भी चेतिए नहीं तो कोई ठीक नहीं है कि ‘मंगल’ राज में ऐसा अमंगल कहीं आपके साथ न हो जाए। ठीक वैसा ही अमंगल जो पटना की बरसात में राजेंद्र नगर में आपके डिप्टी सीएम के साथ हुआ था। समस्या आम और खास को पहचान कर थोड़े ही न आती है।

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