शंकराचार्य पर भड़के अयोध्या के संत- मंदिर के खिलाफ ही तो बोलते आए हैं स्वरूपानंद

New Delhi: Ayodhya Saints Angry on Shankaracharya Swaroopanand Saraswati: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर के लिए भूमि पूजन की तारीख को लेकर विवाद छिड़ गया है। शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा तय मुहुर्त पर सवाल उठाए जाने के बाद अयोध्या के संत भड़क गए हैं।

राम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास ने शंकराचार्य (Ayodhya Saints Angry on Shankaracharya Swaroopanand Saraswati) के बयान को राजनीति से प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा कि ज्योतिष विज्ञान और राम भक्तों की दृष्टि में यही शुभ अवसर है।

बता दें कि रामनगरी अयोध्या में 5 अगस्त को श्रीराम के भव्य मंदिर के निर्माण को लेकर भूमि पूजन की तैयारी जोरों पर है। इसी बीच भूमि पूजन के लिए निकाले गए शुभ मुहूर्त पर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने सवाल उठाया है।

उनका मानना है कि 5 अगस्त को भूमि पूजन के लिए शुभ मुहूर्त नहीं है। इस पर अयोध्या के संत भड़क गए हैं। पुजारी सत्येंद्र दास ने कहा कि जब वाराणसी के ज्योतिषियों ने मुहूर्त निकाल दिया है और कहा है कि यह बहुत शुभ घड़ी है। ऐसे में स्वरूपानंद सरस्वती का बयान राजनीति से प्रेरित है।

भगवान के काम के लिए हर माह शुभः संत

सत्येंद्र दास ने कहा कि ज्योतिष विज्ञान और रामभक्तों की दृष्टि में यही शुभ अवसर है। इस माह किए गए कार्य हानिकारक नहीं हो सकते। भगवान के काम के लिए हर माह शुभ होता है। वहीं, रामकचहरी के महंत और सरयू आरती के संयोजक शशिकांत दास ने कहा, ‘सारे विद्वान-मनीषी सब जानते हैं। कई विद्वानों ने अपना मत दिया है। कई लोगों ने कहा कि इस समय भगवान झूलन में होते हैं तो ऐसे में यह अशुभ घड़ी कैसे हो सकती है?’

स्वरूपानंद की ‘टीस’

शशिकांत दास ने कहा कि स्वरूपानंद व्यक्तिगत राजनीति से प्रेरित होकर ऐसी भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। वह मंदिर आंदोलन के जमाने से हर चीज में अड़ंगेबाजी करते रहे हैं। हनुमानगढ़ी के पुजारी राजूदास ने कहा, ‘भगवान राम के लिए कौन-सा मुहूर्त होता है, जिनसे सृष्टि की उत्पत्ति हुई है। उनके लिए यह मायने नहीं रखते हैं। यह सब साधारण मनुष्य के लिए होते हैं। ईश्वर का हर क्षण और हर भूमि शुभ है। स्वरूपानंद अपनी टीस के कारण ऐसा बयान दे रहे हैं।’

‘शंकराचार्य के बयान का कोई मतलब नहीं’

राजूदास ने कहा कि कांग्रेस के समय रामालय ट्रस्ट बना था। उसमें वह कुछ करा नहीं सके, इसीलिए अब मंदिर बन रहा तो ऐसी बयानबाजी कर रहे हैं। इनके बयान पूर्णतया राजनीतिक घरानों जैसे हैं।

अयोध्या संत समिति के अध्यक्ष कन्हैया दास ने कहा, ‘स्वरूपानंद आंदोलन से लेकर आज तक सिर्फ मंदिर के खिलाफ ही तो बोलते आ रहे हैं तो अब भमि पूजन में कौन सा अच्छा बोल देंगे। उनका यह बयान पूर्णतया राजनीति से जुड़ा हुआ है। उसे बढ़ावा देने वाला है। उनके बयान का कोई मतलब नहीं है।’

वहीं, बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इकबाल अंसारी ने कहा, ‘भगवान से बड़ा कोई नहीं है। ये संत-महात्मा की बाते हैं। इन पर क्या कहा जाए। हर धर्म में सबसे बड़ा ईश्वर को बताया गया है। बाकी संत-महात्मा सब स्वयं बुद्धिमान हैं।’