औषधीय गुणों से भरपूर वृक्ष अर्जुन का हो रहा बेरहमी क़त्ल

पन्ना (वेबवार्ता)। क संपदा से भरपूर जिला पन्ना में सैकड़ों प्रकार के औषधीय पेड़ पौधे पाये जाते हैं उनमे से एक है कोहा जिसे अर्जुन कहा जाता है।

आयुर्वेद में इस पेड़ से विभिन्न प्रकार की दवायें वर्षों से बनती आ रहीं है जिसमे अर्जुनारिष्ट प्रमुख है। पन्ना के जंगलों में बहुतायत में पाये जाने वाला यह औषधीय पौधा अब संकट में है। बहुतायत में उपलब्धता ही इस पेड़ पर आये संकट का असली कारण है,एक ओर जंगलों की अँधाधुंध कटाई के कारण पन्ना के जंगल अपने अस्तित्व के लिये जूझ रहे हैं तो दूसरी ओर अब औषधीय पेड़ों को निशाना बनाया जा रहा है।

काबिलेगौर है की जिले के अजयगढ़ क्षेत्र में ईट भट्टों में अर्जुन के पेड़ों को काटकर उपयोग किया जा रहा है। अर्जुन के वृक्ष की पत्तियां,छाल और फल से कई महत्वपूर्ण औषधि हृदय रोग तथा शुगर की दवाई बनाई जाती है। प्राचीन काल से इस वृक्ष को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। परंतु वर्तमान में लालची लोग इस वृक्ष का बेरहमी से कत्ल कर रहे हैं।

वन विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों की अनदेखी के चलते यह बेशकीमती और बहुपयोगी वृक्ष तेजी से विलुप्त हो रहे हैं। अधिकांश नदियों के किनारे पाए जाने वाले इन बृक्षों को तेजी से काटा जा रहा है। वर्तमान में उत्तर वन मण्डल अंतर्गत धरमपुर रेंज अंतर्गत भसूंड़ा बीट में रूंझ नदी किनारे पुल के पास बंधा घाट से लेकर चिल्ला घाट तक एक माह में सैकड़ों की संख्या में अर्जुन वृक्षों का बेरहमी से कत्ल कर दिया गया, स्थानीय लोगों की माने तो यह अवैध कटाई के खिलाफ बार बार जिम्मेदारों को सूचना देने पर भी कार्रवाई नहीं होती है। जिससे हरियाली से सजा रहने वाला यहां का रूंझ नदी का किनारा अब सूना लगने लगा है। ग्रामीणों ने बताया कि स्थानीय ईट भट्ठा संचालित करने वालों द्वारा इन बृक्षों को कटवाया जा रहा है। जिससे यह दुर्लभ जड़ी बूटी के वृक्ष विलुप्त होने के साथ-साथ नदी के किनारे मिट्टी के कटाव की वजह से नदी के अस्तित्व पर भी खतरा मड़रा रहा है। स्थानीय लोगों द्वारा जिम्मेदारों का ध्यान आकृष्ट कराते हुये औषधीय गुणों वाले अति महत्वपूण अर्जुन बृक्षों की कटाई करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।