इलाहाबाद HC का बड़ा फैसलाः DNA Test से साबित कर सकते हैं पत्नी बेवफा है या नहीं

New Delhi: इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने हाल ही के एक आदेश में कहा है कि बच्चे के पिता कौन हैं, यह प्रमाणित करने के लिए डीएनए (DNA Test) सबसे ज्यादा वैध और वैज्ञानिक तरीका है। इसके अलावा डीएनए टेस्ट से पत्नी की बेवफाई भी साबित की जा सकती है।

कोर्ट (Allahabad High Court) ने कहा है कि डीएनए टेस्ट (DNA Test) से यह साबित किया जा सकता है कि पत्नी बेईमान, व्यभिचारी या बेवफा नहीं है।

कोर्ट (Allahabad High Court) ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान अहम बातें कहीं। इस याचिका में एक पति ने तलाक के लिए याचिका दायर की थी।

न्यायालय (Allahabad High Court) के समक्ष मुद्दा आया कि क्या अदालत, हिंदू विवाह अधिनियम-1955 की धारा 13 के तहत पति की ओर से दायर तलाक की याचिका में व्यभिचार के आधार पर पत्नी को यह निर्देश दे सकती है कि वह या तो डीएनए टेस्ट कराए या डीएनए टेस्ट कराने से इनकार कर दे? अगर वह डीएनए टेस्ट (DNA Test) कराने का चुनाव करती है, तो क्या डीएनए टेस्ट का निष्कर्ष या परिणाम आरोप की सत्यता का निर्धारण करता है?

‘प्रमाणित, वैध और वैज्ञानिक तरीका डीएनए टेस्ट’

जस्टिस विवेक अग्रवाल ने कहा, ‘डीएनए टेस्ट सबसे ज्यादा वैध और वैज्ञानिक तरीका है, जिससे पति अपनी पत्नी की बेवफाई प्रमाणित करने के लिए करवा सकता है। डीएनए टेस्ट सबसे ज्यादा प्रमाणित, यथोचित और सही तरीका है। पति इससे साबित कर सकता है कि पत्नी बेवफा, व्यभिचारी या विश्वासघाती नहीं है।

यह है पूरा मामला

प्रतिवादी के अनुसार, वह 15 जनवरी 2013 से वह अपनी पत्नी के साथ नहीं रह रहा था। 25 जून 2014 को दोनों का तलाक हो गया। पति का दावा था कि उसका पत्नी के साथ कोई संबंध नहीं था। पत्नी अपने मायके में रह रही है। 26 जनवरी 2016 को उसने एक बच्चे को जन्म दिया। पति ने कहा कि 15 जनवरी 2013 के बाद से दोनों के बीच शारीरिक संबंध नहीं बने। पति ने दावा किया कि बच्चा उसका नहीं है, जबकि पत्नी का कहना है कि बच्चा उसके पति का ही है।

फैमिली कोर्ट ने खारिज की थी अपील

पति ने इस मामले में डीएनए टेस्ट कराने का आवेदन किया। फैमिली कोर्ट ने यह अर्जी खारिज कर दी थी। मामला हाई कोर्ट में पहुंचा। हाई कोर्ट की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए इस पर अहम फैसला सुनाया।