घर वापसी: राम मंदिर भूमि पूजन के दिन 250 लोग फिर बने हिंदू.. मुगलकाल में बने थे मुस्लिम

New Delhi: अयोध्या में राम जन्मभूमि पूजन (Ram Mandir Bhumi Pujan) के दिन ही राजस्थान के बाड़मेर जिले की पायला कला पंचायत समिति के मोतीसरा गांव में रहने वाले 50 मुस्लिम परिवारों ने हिंदू धर्म (Muslims Converted into Hindu) अपना लिया। इन लोगों का कहना है कि उन पर किसी भी तरीके का कोई दबाव नहीं था।

लोगों के अनुसार, पिछले कई सालों से यह हिंदू धर्म अपना रहे हैं और हिंदू रीति रिवाज के हिसाब से ही अपनी जिंदगी को जी रहे हैं लेकिन बुधवार को विधिवत रूप से 50 लोगों के पूरे परिवारों ने हिंदू धर्म में वापसी (Muslims Converted into Hindu) की इच्छा जताई। उनके घर पर हवन यज्ञ करके जनेऊ पहन कर परिवार के ढाई सौ लोगों ने फिर से हिंदू धर्म में वापसी कर ली है।

इस मामले में हिंदू धर्म अपनाने वाले बुजुर्ग सुभनराम ने बताया कि मुगल काल में मुस्लिमों ने हमारे पूर्वजों को डरा धमकाकर मुस्लिम बनाया था लेकिन हम हिंदू धर्म से ताल्लुक रखते थे। मुस्लिम हमसे दूरी रखते हैं।

उन्होंने आगे बताया कि इतिहास की जानकारी होने के बाद हमने इस चीज के ऊपर गौर किया कि हम हिंदू हैं और हमें वापस हिंदू धर्म में जाना (Muslims Converted into Hindu) चाहिए। हमारे रीति रिवाज पूरे हिंदू धर्म से संबंध रखते हैं। इसी के बाद पूरे परिवार ने हिंदू धर्म में वापसी की इच्छा जताई और फिर घर पर हवन यज्ञ कराकर जनेऊ पहनकर परिवार के सभी 250 सदस्यों ने फिर से हिंदू धर्म में वापसी कर ली।

हरजीराम के मुताबिक, कंचन ढाढ़ी जाति से ताल्लुक रखने वाला परिवार पिछले कई सालों से हिंदू रीति रिवाजों का पालन कर रहा था। वह हर वर्ष अपने घरों में हिंदू त्योहारों को ही मनाते हैं। बुधवार को राम जन्मभूमि पर राम मंदिर के शिलान्यास के समारोह पर सभी ने हवन पूजा पाठ का प्रोग्राम रखा एवं हिंदू संस्कृति का पालन करते हुए हमने अपनी स्वेच्छा से वापस घर वापसी की है। हमारे ऊपर कोई दबाव वगैरह नहीं है।

वहीं, गांव के पूर्व सरपंच प्रभुराम कलबी ने बताया कि ढाढ़ी जाति के परिवार के सदस्यों ने बिना किसी दबाव और अपनी इच्छा से हिंदू धर्म में वापसी की है। संविधान के अनुसार कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म को अपना सकता है। इसमें किसी को कोई आपत्ति भी नहीं, बल्कि पूरे गांव ने इनके इस फैसले का सम्मान किया है।

इस मौके पर बाड़मेर जिले सहित आसपास के अन्य दर्जनों हिंदू संतों को खासतौर से बुलाया गया था और उनके सानिध्य में ही इन लोगों की हिंदू धर्म में घर वापसी हुई है।

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