IPL 2020

पीछे हटी चीनी कंपनी VIVO, अब नहीं करेगी IPL स्पॉन्सर.. BCCI को बड़ा नुकसान

New Delhi: Vivo IPL Sponsor: चीनी मोबाइल कंपनी Vivo इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के अगले एडिशन में लीग स्पॉन्सर नहीं होगी। जून में पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई भि’ड़ंत के बाद से ही कई लोगों ने चीनी सामानों का बहिष्कार करने की बात कही थी।

इसके अलावा IPL गवर्निंग काउंसिल ने जब स्पॉन्सर रिटेन करने की बात कही थी, तो भी सोशल मीडिया पर लोगों ने इस पर विरो’ध जताया था।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी चीनी मोबाइल कंपनी के स्पॉन्सर बने रहने पर सोमवार को विरो’ध जताया था। इसके एक दिन बाद ही Vivo के स्पॉन्सरशिप से हटने की खबर सामने आई। आरएसएस-संबद्ध स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने सोमवार को कहा था कि लोगों को टी-20 क्रिकेट लीग का बहिष्कार करने पर विचार करना चाहिए।

BCCI ने किया था समीक्षा का वादा

इससे पहले रविवार को IPL गवर्निंग काउंसिल ने आगामी एडिशन में भी चीनी मोबाइल कंपनी से स्पॉन्सरशिप करार बरकरार रखने का फैसला किया था जिसके बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने विरो’ध जताया।

जून में लद्दाख में हुई झ’ड़प के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने चीनी सामान का बहिष्कार करने की बात भी कही थी। BCCI ने तब करार की समीक्षा का वादा किया था लेकिन IPL में भी इस कंपनी को बरकरार रखने का फैसला किया गया।

‘सैनिकों का अपमान है ये’

स्वदेशी जागरण मंच ने कहा कि टी-20 क्रिकेट मैचों का आयोजन करने वाली संस्था इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) द्वारा एक चीनी मोबाइल कंपनी को प्रायोजक बनाने का फैसला चकित करने वाला है। अपने इस निर्णय से IPL गवर्निंग काउंसिल ने चीन के ज’घन्य कृत्य से श’हीद हुए सैनिकों के प्रति अपना अ’पमान प्रकट किया है।

‘वित्तीय परिस्थितियों में नया स्पॉन्सर मुश्किल’

IPL की संचालन परिषद ने रविवार को सभी प्रायोजकों को बरकरार रखने का फैसला किया था। IPL गवर्निंग काउंसिल ने ‘वर्चुअल’ बैठक में फैसला किया कि टूर्नमेंट 19 सितंबर से 10 नवंबर तक खेला जाएगा। BCCI के एक अधिकारी ने कहा था, ‘मौजूदा वित्तीय कठिन परिस्थितियों को देखते हुए इतने कम समय में बोर्ड के लिए नया प्रायोजक ढूंढना मुश्किल होगा।’

2199 करोड़ रुपये में हासिल किए थे अधिकार

Vivo इंडिया ने 2017 में IPL टाइटल प्रायोजन अधिकार 2199 करोड़ रुपये में हासिल किए थे। इससे लीग को हर सीजन में उसे करीब 440 करोड़ रुपये का भुगतान करना था। इस चीनी मोबाइल कंपनी ने सॉफ्ट ड्रिंक वाली दिग्गज कंपनी पेप्सिको को हटाया था, जिसकी 2016 में 396 करोड़ रुपये की डील थी।

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