तालिबानी कब्जे के बाद छलका अफगान फुटबॉलर का दर्द, बोले हम 20 साल पीछे चले गए

तालिबानी कब्जे के बाद छलका अफगान फुटबॉलर का दर्द, बोले हम 20 साल पीछे चले गए

पुणे
अफगान फुटबॉलर हारून अमीरी से उनके भारत के पुराने नंबर पर बात हो रही है। और यह अच्छी खबर है। भारत के खिलाफ जून में हुए वर्ल्ड कप क्वॉलिफायर में वह अफगानिस्तानी टीम का हिस्सा थे। यह डिफेंडर दो महीने पहले ही अपने करीबी परिवार के साथ कनाडा शिफ्ट हो गए हैं। उनका बाकी परिवार अभी भारत में ही है और सुरक्षित हैं।

अमीरी तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जे से पहले ही वहां से निकल गए थे। हालांकि उनका मानना है कि अपने देश वापस न जान पाने का जख्म भरने में वक्त लगेगा।

जब अमीरी दो महीने पहले कनाडा गए तो उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि हालात इतने नाटकीय अंदाज में बदल जाएंगे। उन्होंने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, ‘मैं नहीं जानता कि हालात इतनी जल्दी कैसे बदल गए। यह सब कैसे हुआ यह देखकर मैं सदमे में हूं।’ अमीरी भारत में मोहन बागान, मुंबई एफसी, चेन्नइयन एफसी और रियाल कश्मीर जैसे फुटबॉल क्लब के लिए खेल चुके हैं।

अमीरी ने आगे कहा, ‘ऊपर वाले का शुक्र है कि मैं और मेरा परिवार सुरक्षित है। आधे लोग भारत में हैं और बाकी मेरे साथ यहां कनाडा में हैं।’

भारत में क्लब फुटबॉल खेलते हुए 31 साल के अमीरी भारत के पुणे, मुंबई, चेन्नई और कई अन्य शहरों में रहे। उनका कहना है कि तालिबानी कब्जे ने अफगानिस्तान को कई साल पीछे धकेल दिया है। उन्होंने कहा, ‘जब तालिबान पहली बार आए तो उन्होंने इतनी तबाही मचाई कि उसे ठीक करने में 20 साल का वक्त लग गया। अब वही चीज दोबारा हो रही है, तो यह समझना बहुत मुश्किल है कि हम इसे कहां और कैसे ठीक करेंगे। हम 20 साल पीछे चले गए हैं।’ अफगानिस्तान से रोजाना बुरी खबरें आ रही हैं। इस बीच युवा फुटबॉलर जकी अनवारी की मौत ने अमीरी को काफी दर्द पहुंचाया।

उन्होंने कहा, ‘सच कहूं तो मैं निजी रूप से उसे नहीं जानता था लेकिन मैंने उसे कुछ मौकों पर खेलते हुए देखा था। मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा है। वह काफी अच्छा लड़का था और उसकी मौत हर किसी के लिए दिल दुखाने वाला है।’ अनवारी की बीते सप्ताह अमेरिकी जहाज से गिरकर मौत हो गई थी। वह तालिबानी राज से बचकर जाना चाहते थे।

तकनीकी रूप से देखें तो अमीरी अब भी अफगानिस्तान की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम का हिस्सा हैं। लेकिन देश के लिए दोबारा खेल पाने का उनका सपना अब पूरा होना असंभव सा लगता है। उन्होंने कहा, ‘हम नहीं जानते कि हमारे देश को क्या होगा, तो ऐसे में देश के बारे में बात करना थोड़ा जल्दबाजी होगी। मैं नहीं जानता कि अफगानी फुटबॉल का भविष्य क्या होगा। मैं प्रार्थना करता हूं कि फुटबॉल पर इस सबका असर न पड़े।’ हालांकि वह कनाडा और भारत में रह और खेल रहे हैं। अमीरी ने अभी तक अपनी राष्ट्रीयता नहीं छोड़ी है।