Radha Ashtami: कर्ज और आर्थिक परेशानी से गुजर रहे हैं, राधाष्टमी पर करें यह उपाय

New Delhi: जन्‍माष्‍टमी (Janmashtami) के शुभ अवसर पर भगवान कृष्‍ण (Lord Krishna) का जन्‍मदिन मनाने के बाद अब बारी है उनकी प्रेयसी राधारानी (Radha Rani) का जन्‍मदिन (Radha Ashtami) मनाने की।

राधाजी का जन्‍मदिन यानी राधाष्टमी (Radha Ashtami) भाद्रमास के शुक्‍ल पक्ष की अष्‍टमी को मनाया जाता है। इस बार उनका जन्‍मदिन 26 अगस्‍त, बुधवार को है।

कोरोना की वजह से इस बार बृज भूमि में राधा रानी का जन्‍मदिन (Radha Ashtami) उतनी धूमधाम से नहीं मनाया जा सकेगा, जितना कि हर साल मनाया जाता रहा है। ऐसे में हमें जन्‍माष्‍टमी की भांति घर पर ही पूजापाठ करके राधिकाजी का जन्‍मदिन मनाना पड़ेगा। राधाजी को साक्षात माता लक्ष्‍मी स्‍वरूपा माना जाता है।

राधाष्टमी (Radha Ashtami) के अवसर पर हम धनवृद्धि के आसान से उपाय करके सुख समृद्धि प्राप्‍त कर सकते हैं। आइए जानते हैं क्‍या हैं यह उपाय…

सप्‍ताक्षर राधामंत्र

सुबह के स्‍नान के बाद राधाजी की पूजा करनी चाहिए और पूजा के बाद धनदायक सप्‍ताक्षर राधामंत्र का जप करना शुभ माना जाता है। यह मंत्र इस प्रकार है।

ऊं ह्नीं राधिकायै नम:। ऊं ह्नीं श्रीराधायै स्‍वाहा।

ग्रंथों में बताया गया है कि इस मंत्र का सवा लाख जप करने से धन संबंधी परेशानियों में फायदेमंद होता है।

बीज मंत्र से धन वृद्धि

राधाष्टमी पर बीज मंत्रों से धन वृद्धि प्राप्‍त कर सकते हैं। राधाष्टमी के अवसर पर यक्ष-यक्षिणी की साधना करना बड़ा ही उत्तम माना गया है। इस मौके पर कुबेर सहित लक्ष्मी माता की साधना करनी चाहिए। राधाष्टमी से 16 दिनों तक एक समय भोजन करना चाहिए।

अगर यह संभव न हो तो नमक का त्याग करना चाहिए। इसके साथ ही कुबेर और देवी लक्ष्मी के मंत्रों का जप करना चाहिए। देवी लक्ष्मी के बीज मंत्र ओम ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः।। का जप धन समृद्धिदायक कहा गया है।

राधाजी को लगाएं ऐसा भोग

राधा अष्‍टमी के मौके पर विशेष प्रकार का भोग लगाने से आपको कृपा प्राप्‍त होती है। राधा अष्‍टमी के मौके पर शहद, मिश्री सहित खीर बनाकर देवी राधा सहित भगवान श्रीकृष्ण को भोग लगाएं। ऐसा करने से आपको लक्ष्‍मी माता की कृपा प्राप्‍त होती है।

देवी राधा के प्राकट्य की कथा का पाठ

राधा अष्‍टमी के अवसर पर आपको देवी राधा के प्राकट्य की कथा का पाठ करना चाहिए। इस कथा का पाठ करने से घर की नकारात्‍मक ऊर्जा खत्‍म होती है और आपके घर में सुख शांति स्‍थापित होती है।

अष्‍टाक्षरी राधामंत्र

ऊं ह्नीं श्रीराधिकायै नम:। ऊं ह्नीं श्रीं राधिकायै नम:।

यह देवी राधा का सिद्ध अष्टाक्षरी मंत्र है। शास्त्रों के अनुसार देवी राधा के इस आठ अक्षरों के मंत्र का जप राधाष्टमी से आरंभ करें। इस मंत्र की जप संख्या 16 लाख है। मंत्र जप पूर्ण होने पर खीर से हवन करें। कहते हैं कि यह सर्वसिद्धि कारक मंत्र है इससे सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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