Thursday, March 4, 2021
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Swami Vivekananda Jayanti 2021: उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाए

Webvarta Desk: Swami Vivekananda Jayanti 2021: जब भी स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) की बात होती है तो अमेरिका के शिकागो की धर्म संसद में साल 1893 में दिए गए उनके भाषण को जरूर याद किया जाता है, आपको बता दें कि विवेकानंद ने यह भाषण 11 सितंबर को दिया था।

स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) ने पूरे जीवन चरित्र के निर्माण पर बल दिया, वह ऐसी शिक्षा चाहते थे जिससे बालक का सर्वांगीण विकास हो सके। बालक की शिक्षा का उद्देश्य उसको आत्मनिर्भर बनाकर अपने पैरों पर खड़ा करना था ना कि केवल नौकरी करना है।

विवेकानंद ने कहा था कि जो शिक्षा चरित्र निर्माण नहीं करती, जो समाज सेवा की भावना विकसित नहीं करती और जो शेर जैसा साहस पैदा नहीं कर सकती, ऐसी शिक्षा से क्या लाभ?

सैद्धान्तिक शिक्षा के बजाय व्यावहारिक शिक्षा पर बल

इसलिए विवेकानंद ने सैद्धान्तिक शिक्षा के बजाय व्यावहारिक शिक्षा पर बल दिया था, अगर आप बहुत पैसे वाले हैं लेकिन अच्छे इंसान नहीं हैं तो आपकी शिक्षा और शिक्षित होने का कोई अर्थ नहीं है।

स्वामी विवेकांनद के ये थे अनमोल वचन
  • उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत अर्थात् उठो, जागो, और ध्येय की प्राप्ति तक रूको मत।
  • मैं सिर्फ और सिर्फ प्रेम की शिक्षा देता हूं और मेरी सारी शिक्षा वेदों के उन महान सत्यों पर आधारित है जो हमें समानता और आत्मा की सर्वत्रता का ज्ञान देती है।
  • सफलता के तीन आवश्यक अंग हैं-शुद्धता,धैर्य और दृढ़ता। लेकिन, इन सबसे बढ़कर जो आवश्यक है वह है प्रेम।
  • हम ऐसी शिक्षा चाहते हैं जिससे चरित्र निर्माण हो।
अडिग रहें और मजबूत बनें
  • खुद को समझाएं, दूसरों को समझाएं, सोई हुई आत्मा को आवाज दें और देखें कि यह कैसे जागृत होती है।
  • मानव जाति देवत्व की सीख का इस्तेमाल अपने जीवन में हर कदम पर करे।
  • शक्ति की वजह से ही हम जीवन में ज्यादा पाने की चेष्टा करते हैं। इसी की वजह से हम पाप कर बैठते हैं और दुख को आमंत्रित करते हैं।
  • पाप और दुख का कारण कमजोरी होता है, कमजोरी से अज्ञानता आती है और अज्ञानता से दुख।
  • अगर आपको तैतीस करोड़ देवी-देवताओं पर भरोसा है लेकिन खुद पर नहीं तो आप को मुक्ति नहीं मिल सकती, खुद पर भरोसा रखें, अडिग रहें और मजबूत बनें, हमें इसकी ही जरूरत है।

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