Nishi Singh

संकट के समय में एक-दूसरे का भरपूर सहयोग करें : निशी सिंह

कोरोना वायरस से आए संकट से सभी वर्ग को समस्या हुई हो रही है लेकिन सरकार के साथ देशभर कीYogesh Kumar Soni तमाम एनजीओ व संस्थाएं बेहतर काम कर रही है। अपने-अपने स्तर पर जिससे जो बन पाया उसने अपना योगदान दिया। लेकिन कुछ संस्थाओं ने रात दिन काम करके व चौबीस घंटे के हिसाब से सेवाएं देकर शानदार रोल निभाया। इस ही तर्ज पर ‘नाद’ नाम से संचालित संस्था ने भी इस मुश्किल समय में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। ऐसी स्थिति में किन-किन चुनौतियां का सामना करना पडा इसके अलावा तमाम अहम मुद्दे पर नाद संस्था की अध्यक्षा निशी सिंह से योगेश कुमार सोनी की एक्सक्लूसिव बातचीत के मुख्य अंश…

आपको द्वारा किए गए कामों को करने पर आपको बहुत-बहुत बधाई। किस तरह आपने अंजाम दिया?

संस्था के काम को सहराने के लिए धन्यवाद। हर सामाजिक संस्था का एक मुख्य उद्देशय जरुर होता है। लेकिन मौजूदा वक्त में सबको एक ही तर्ज पर चलते हुए जरुरतमंदो को भोजन देने की आवश्यकता है। कोरोना काल में हर कोई परेशान हुआ है। गरीब के साथ मध्यमवर्ग परिवारों को भारी परेशानी हो रही है लेकिन यहां सरकारों के साथ मिलकर एनजीओ व कई संस्थाओं ने भी अपना काम बहुत अच्छे से किया है।हमारी संस्था इस समय पर चौबीस घंटे काम कर रही है। हम भोजन बांट रहे हैं उसके अलावा यदि हमें कोई जरुरतमंद कभी भी फोन कर देता है तो हम उसको राशन वितरण कर देते है। जब से यह संकट शुरु हुआ था तब से लेकर अब तक हम काम कर रहे हैं।

आपकी संस्था का मुख्य उद्देश्य क्या है व इसकी शुरुवात कब हुई थी?

‘नाद’ नाम से संस्था की शुरुवात 2008 में की थी व हमारा मुख्य उद्देशय सांस्कृतिक धरोहरों का सरक्षण व संवर्धन करना है। इसके अलावा भी कुछ महत्वपूर्ण काम करते हैं जैसे कि अहसहाय बच्चों को शिक्षा के प्रेरित करते उनका शिक्षित बनाना और मेधावी छात्रों को हम अपने खर्चे पर आगे बढ़ाते हैं। क्लासिकल और गजल को भी हम बहुत प्रोमोट करते हैं व इस माध्यम से हम सामाजिक मुद्दों को सरकार व लोगों तक पहुंचाते हैं। साथ ही नेत्रहीन बच्चों को संगीत की शिक्षा देने काम है। अश्मिता थिएटर ग्रुप के साथ मिलकर समय-समय पर नाटक द्वारा आयोजन करते हैं जिसके अध्यक्ष अरविंद गौड हैं।

इसके अलावा अन्य कुछ महत्वपूर्ण कार्यों के संदर्भ में बताइए?

हम उत्तराखंड में वेस्ट मैनेजमेंट के लिए अभियान चला रहे हैं। जैसा कि आज भी तमाम ऐसी जगह है जहां कूडा उठाने के लिए नगर पालिका की गाडी नही आती और लोग कूडे को पहले की तरह इधर-उधर फेंक देते थे जिसमें प्लास्टिक की बोतलें, थैली या अन्य वो वस्तुएं होती हैं जो सालों तक नष्ट नही होती है और उससे पर्यावरण भारी क्षति पहुंचती है इस पर हम उनको पुनः चक्रित करना सीखाते हैं।

आपकी ओर से कोई संदेश?

इस समय कोरोना की वजह से पूरी दुनिया परेशान है। एक-दूसरे का भरपूर सहयोग करें। संकट की घडी में मानवता का परिचय दिया जाता है। संस्था में जितने कुछ लोगों का सहयोग मिलता है उसके बाद बाकी मैं स्वंय अपने खर्चे से लगातार राशन वितरण कर रही हूं। यदि आप कुछ समय के लिए अतिरिक्त खर्चों को रोककर सिर्फ दूसरों का पेट भर दोगे तो निश्चित तौर पर आपको एक अद्भूत सा सूकून मिलेगा। जब-जब मानव जीवन पर प्राकृतिक व अप्राकृतिक हानि हुई तब-तब मनुष्य ने ही मनुष्य को सहारा दिया है। जरुरी नही कि आप किसी संस्था से जुडे हैं तभी किसी की मदद करें आप चाहें तो किसी जरुरतमंद को खाना या अन्य किसी भी माध्यम से सहायता कर सकते हैं।

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