जानें कहानी आब-ए-ज़मज़म की... धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक नजरिए से भी है फायदेमंद

जानें कहानी आब-ए-ज़मज़म की… धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक नजरिए से भी है फायदेमंद

New Delhi: ‘जल ही जीवन है’ यह सिर्फ एक वाक्य नहीं, बल्कि मानव जाति के जीवन का आधार है. सभी धर्मों के ग्रंथों में कहा गया है कि धरती पर जब भी प्रलय होगा तो वो सिर्फ और सिर्फ जल के कारण ही होगा। या तो जल की कमी से या फिर जल की अधिकता से। शायद इसी वजह से जल और उसके स्रोत को कई धर्मों में पूजनीय या पवित्र माना जाता है।

जल की पवित्रता और महत्ता का गुणगान सभी धर्मों में किया गया है। सभी धर्मों में समान भाव से इसकी महिमा का वर्णन करते हुए इसे तमाम परंपराओं और पूजा आदि से जोड़ दिया गया है। पृथ्वी में जन्म लेने से लेकर परलोक गमन प्रक्रिया में इसी जल का इस्तेमाल होता है।

जिस तरह हिंदू धर्म में गंगाजल और सिख धर्म में सरोवर के जल को पवित्र माना जाता है, ठीक उसी तरह इस्लामिक समुदाय में आब-ए-ज़मज़म (हज का पानी) (Aab-e-Zam Zam) को भी पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। आज हम आपको पाक जल आब-ए-ज़मज़म के धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व के बारे में बता रहे है।

क्या है आब-ए-ज़मज़म?

इस्लाम की सबसे पवित्र जगह काबा। काबा का वो काला पत्थर जिस अति-विशाल मस्जिद के कंपाउंड में है, उसका नाम है मस्जिद-ए-हरम। इसी मस्जिद की सरहद में एक कुआं है। काबा से करीब 66 फुट दूर पूरब की तरफ। इस कुएं का नाम है ज़मज़म (Aab-e-Zam Zam) ।

मुसलमान इसे दुनिया का सबसे पवित्र पानी मानते हैं। उनका यकीन है, ये चमत्कारिक है। इसके पानी को कहते हैं आब-ए-ज़मज़म (Aab-e-Zam Zam) । अरबी में आब का मतलब होता है पानी। आब-ए-ज़मज़म मतलब ज़मज़म का पानी। मुसलमान मानते हैं कि ज़मज़म पिछले करीब चार हज़ार सालों से है।

क्या है इस कुएं की कहानी?

सारा अब्राहम, अब्राहम हागर

यहूदी, ईसाई और इस्लाम। तीनों को कहते हैं अब्राहमिक रिलीज़न। तीनों धर्मों ने अब्राहम को पैगंबर माना। इन्हीं अब्राहम से शुरू होती है ज़मज़म की कहानी। अब्राहम की पत्नी थीं सारा। दोनों की उम्र में 10 साल का अंतर था। शादी के कई साल बीत गए, मगर इन्हें बच्चा नहीं हुआ। वंश आगे बढ़ाने के लिए बच्चा अब भी ज़रूरी समझा जाता है। तब भी माना जाता था। सारा की एक दासी थी- हागर।

कहते हैं, सारा ने अब्राहम से कहा कि वो हागर के साथ रिश्ता बना लें। बिना शादी किए। बस बच्चे के लिए। उस समय की यहूदी परंपराओं में ऐसा होता था कि ऐसे बच्चे शादीशुदा पत्नी से हुए बच्चों की तरह बरते जाते थे। हागर के साथ संबंध से अब्राहम को एक बेटा हुआ। उसका नाम रखा गया- इस्माइल।

मगर फिर सारा का खुद का बच्चा हो गया

फिर क्या हुआ कि सारा खुद प्रेगनेंट हो गईं। कहते हैं, उस समय अब्राहम की उम्र थी 100 बरस और सारा थीं 90 साल की। अब्राहम और सारा के भी बेटा हुआ। इसका नाम रखा गया इसाक। जिसका यहूदी परंपरा में आइज़क भी उच्चारण करते हैं। आगे क्या हुआ, ये पता है। मगर क्यों हुआ, इसको लेकर कई कहानियां हैं।

कुछ के मुताबिक, खुद ईश्वर ने अब्राहम को आदेश दिया कि वो इस्माइल और हागर को बक्का की बंजर घाटी में छोड़ आएं। कुछ कहानियां ऐसी हैं कि सारा ने अब्राहम से कहा था कि वो हागर और उनके बेटे को कहीं दूर छोड़ आएं। इंसानी नज़रिये से देखें, तो लगता है अपना बेटा हो जाने के बाद सारा को हागर और इस्माइल से ईर्ष्या हुई होगी। और उन्होंने अपने प्रभाव और प्रेम का इस्तेमाल करके हागर और इस्माल को निकलवा दिया होगा।

अब्राहम, हागर को दुधमुंहे इस्माइल के साथ रेगिस्तान में छोड़ आए

तो एक दिन अब्राहम ने हागर से कहा, वो लंबे सफ़र की तैयारी करें। इस्माइल अभी दुधमुंहे बच्चे थे। हागर और इस्माइल को साथ लेकर अब्राहम चले। फिर हरे-भरे इलाकों, पहाड़ों को पार करके वो पहुंचे अरब के रेगिस्तान। वहां, जहां आज मक्का है।

इस रेगिस्तान में छांव का एक कतरा नहीं था। न कोई पेड़, न पानी का एक क़तरा। अब्राहम ने हागर और इस्माइल को यहीं उतार दिया। फिर थोड़ा पानी और थोड़ा सा खाना देकर चले गए। जाते-जाते उन्होंने हागर से कहा। ऊपरवाला तुम्हारा खयाल रखेगा।

भरे रेगिस्तान में अकेली औरत और उसका दुधमुंहा बच्चा

ये कितना मार्मिक लगता है। एक औरत और उसके छोटे बच्चे को यूं बीच रेगिस्तान अकेला छोड़कर चला जाया जाए। ख़ैर। तो क़िस्सा है कि बच्चे को प्यास लगी। वो प्यास से रोने लगा।उसकी प्यास बुझाने के लिए हागर बेहाल सी रेगिस्तान में दौड़ती रही। दो पहाड़ियां थीं- सफ़ा और मरवा। इस पहाड़ी से उस पहाड़ी। मगर पानी का नाम-ओ-निशान नहीं कहीं। हागर थककर चूर हो गईं। एकदम बेदम सी।

कहानी है कि तभी हागर को एक फरिश्ते ज्रिबाइल की आवाज़ सुनाई दी। वो इस्माइल के पास खड़ा था। जहां इस्माइल की एड़ी थी, वहीं फरिश्ते ने ज़मीन खोदना शुरू किया। और ज़मीन से साफ़-मीठे पानी का सोता भरभरा कर ऊपर आने लगा। रेगिस्तान में यूं पानी का आना चमत्कार था। अतिशय सुखद था।

रेगिस्तान का वरदान: ज़मज़म से काबा

कहानी है कि जिब्राइल ने ही फिर हागर से कहा। वो डरे न। कि वो जहां है, वो ऊपरवाले का घर है। वो घर, जिसे इस्माइल बनाएंगे। कहते हैं कि इसके कुछ समय बाद जुरहम के कबीले ने वहां से गुजरते हुए एक चिड़िया देखी रेगिस्तान में। ऐसी मरुभूमि में चिड़िया का होना, माने पानी की मौजूदगी। यूं उन्हें ज़मज़म मिला और वो मक्का में ही बस गए। इन्हीं के बीच बड़े हुए इस्माइल। यही इस्माइल काबा के गार्जियन हुए। आगे मक्का बसा। और फिर इससे आगे की और हज़ारों कहानियां बनीं।

वैज्ञानिक महत्व

आब-ए-ज़मज़म (Ab-e-Zam Zam) सऊदी अरब के मक्का शहर में मस्जिद अल हरम में काबे के नज़दीक एक कुआ है इस कुएं का पानी इस्लामिक धर्म में पवित्र (पाक) माना जाता है इसके बहुत से फायदे है जो हम लोगो के लिए जानना बहुत अहम है।

आब-ए-ज़मज़म के पानी में कैल्शियम और मैग्नेशियम की मात्रा! ज़मज़म के पानी और मक्का शहर के अन्य पानी में केल्शियम और मैग्रेशियम साल्ट्स की मात्रा में फ़र्क देखने को मिलता है। आब-ए-ज़मज़म में ये दोनों तत्व अधिक मात्रा में होते है। शायद यही वजह थी कि ज़म ज़म का पानी यहां आने वाले हाजियों को हो रही कमज़ोरी थकान को दूर करता है।

नबी-ए-पाक SAW ने फ़रमाया है की इसमें कई बीमारियों से निजात पाने की शक्ति है। म्यूनिक की चिकित्सा केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर नॉट पफीफर के अध्ययन से पता चलता है कि आबे ज़म ज़म मानव कोशिकाओं में ऊर्जा को को बढ़ाता है।

माना जाता है कि यह एकमात्र ऐसा पानी है जिसमें कीटाणु और जीवाणु नहीं पाए जाते है आब-ए-ज़मज़म में किसी भी प्रकार की अशुद्धि देखने को नहीं मिलती।

अन्य फायदे
  • आब-ए-ज़मज़म ब्लड प्लेटलेट्स को बढ़ाने में भी उपयोगी है
  • आबे ज़म ज़म में कुछ ऐसे उर्वरक पाए जाते है जो भूख के प्रभाव को कम करता है
  • इसमें कुछ तरल पाए जाते है इस पानी के नियमित रूप से सेवन से वज़न बढ़ाने में उपयोगी है
  • आंखो की सुंदरता बढ़ाने में इसकी अहम भूमिका है
  • एसिडिक अमलो को बेअसर करता है हर्ट बर्न, एसिडिटी जैसी परेशानियों को दूर करता है।
  • आब-ए-ज़मज़म हड्डियों को मज़बूत बनाने में सहयोगी है।

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