राम मंदिर: नींव पर 1200 खंभे, 1000 साल मजबूती… ऐसा होगा भव्य अयोध्या धाम

New Delhi: राम मंदिर (Ram Mandir) का नक्शा एडीए से अप्रूव होने के बाद अब मंदिर निर्माण को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। मंदिर की नींव निर्माण की तकनीकी प्रगति की समीक्षा और अयोध्या विकास के नए मॉडल की योजनाओं पर फोकस करने के लिए मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र (Nripendra Mishra) अयोध्या पहुंचने वाले हैं।

उधर मंदिर निर्माण (Ram Mandir) के पांच एकड़ क्षेत्र की नींव की मजबूती को हाई तकनीक पर ढालने के लिए आईआईटी चेन्नई और सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट रूड़की के इंजिनियरिग टीमें टेस्टिंग में लगी हैं। मंदिर की मजबूती एक हजार साल तक बनी रहे, इसी पर सारी तैयारी हो रही है।

श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Ram Mandir Trust) के महासचिव चंपत राय (Champat Rai) के मुताबिक मंदिर की मजबूती नींव पर ही निर्भर करेगी। राय ने कहा कि मंदिर की नींव की मजबूती को लेकर हर तरह से तकनीकी और वैज्ञानिक परीक्षण किए जा रहे हैं।

इसके पिलर उसी हाई तकनीक से खड़े किए जाएंगे। जैसे नदियों के पुलों को खड़ा किया जाता है। केवल अंतर इतना रहेगा कि इसमें लोहे का प्रयोग न करके मजबूत कंक्रीट मसाले का प्रयोग किया जाएगा। इसी बात को ध्यान में रखकर आइआईटी की टीम मिट्टी की जांच के साथ नींव में प्रयोग होने वाले मैटेरियल की भी टेस्टिंग कर रही है।

रूड़की से भू’कं’प रोधी जांच रिपोर्ट का इंतजार

राय ने बताया कि पूरी जांच के बाद ही मंदिर की नींव की खुदाई का काम शुरू होगा। मंदिर स्थल के साइल की जांच रिपोर्ट आ चुकी है। अब रूड़की से भू’कं’प रोधी जांच रिपोर्ट का इंतजार है। इसके साथ ही इसके पिलर को तैयार करने में विशिष्ट तरह की मजबूत गिट्टी, बेतवा नदी के मोरंग और बेहद मजबूत सीमेंट के सैंपल टेस्ट के लिए आईआईटी चेन्नई भेजे जा रहे हैं। जहां उसकी मजबूती की वैज्ञानिक जांच की जाएगी। उसके बाद मंदिर की नींव का काम शुरू होगा।

मंदिर की नींव की डिजाइन तैयार करने में जुटी टीमें

ट्रस्ट के सदस्य डा. अनिल मिश्र के मुताबिक आईआईटी और सीबीआरआई की टीमें वैज्ञानिक और तकनीकी परीक्षण करके मंदिर की नींव की डिजाइन तैयार करने में जुटी हैं। कार्यदाई संस्था एलएंडटी की तैयारी भी नींव की खुदाई को लेकर अंतिम चरण में है। मंदिर की मजबूती एक हजार साल के मानक पर ही सारे परीक्षण किए जा रहे हैं।

1200 पिलर पर खड़ा होगा राम मंदिर

अनिल मिश्र ने बताया कि मंदिर के आधार की नींव पर 1200 पिलर खड़े किए जाएंगे। हर पिलर के लिए एक मीटर व्यास का गड्ढा 35 मीटर गहरा खोदा जाएगा। जिसे मजबूत कंक्रीट के मसाले से भरा जाएगा। जबकि इसकी नींव 200 फीट गहरी रहेगी।

ट्रस्ट के महा सचिव चंपत राय का कहना है कि नागर शैली के राम मंदिर का निर्माण पिलर के बने प्लेट फार्म पर होगा। और इसमें कही भी लोहे का प्रयोग नही किया जाएगा। इसके बाद इससे बची खाली जमीन को कंक्रीट से भर कर बेस तैयार होगा।

4 महीने के बाद शुरू होगी पत्थर की जुड़ाई

मंदिर के आर्किटेक्ट निखिल सोमपुरा के मुताबिक मंदिर की नीव एलएंडटी की टीम को तैयार करने में 4 महीने का समय लग सकता है। नींव का प्लेट फार्म तैयार होने के बाद उनकी टीम काम शुरू कर देगी। उन्होंने बताया कि पत्थरों की जुड़ाई उन्हीं तराशे गए पत्थरों से होगी जो मंदिर की अयोध्या कार्यशाला में तराश कर रखें गए हैं। ये पत्थर मजबूत और टिकाउ हैं जिनकी सफाई और चमकाने का काम चल रहा है जो दो महीने में पूरा हो जाएगा।

तांबे की प्लेटे रखकर जोड़े जाएंगे पत्थर

उन्होंने बताया कि पत्थरों के बीच तांबे की प्लेटे रख कर जोड़ा जाएगा। जिससे यह मजबूत और भूकंपरोधी बना रह सके। बताया गया कि ग्राउंड फ्लेार और प्रथम तल के कुछ हिस्से के पत्थर तराश कर रखे गए हैं। अब मंदिर के डिजाइन का विस्तार हो गया है। जाहिर है कि सेकंड फ्लोर और मंदिर के बढ़े हिस्से के लिए कार्यशाला में और पत्थरों को मंगवा कर तराशने का काम भी शुरू करना पड़ेगा। जिससे तीन साल में मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हो सके।

मंदिर परिसर में पहुंची बड़ी मशीनें

मंदिर की नींव की खुदाई और पिलर की पाइलिंग करने के लिए विशालकाय मशीने मंदिर परिसर में पहुंच गई हैं। इसके पहले कंक्रीट मसाले की दो बड़ी मिक्सर मशीनें भी परिसर में पहुंच चुकी हैं। एलएंडटी की कई मशीनें अभी रास्ते में हैं जो एक दो दिनों में अयोध्या पहुचने वाली हैं। मशीन इंजीनियर एके यादव के मुताबिक पाइलिंग मशीन से तेजी से पिलर की नींव व गड्ढे की बोरिंग की जाएगी।