Navratri 2020: नवरात्र के पहले दिन ऐसे करें कलश या घटस्थापना, जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

New Delhi: हिंदू धर्म में नवरात्रि (Navratri 2020) वर्ष में दो बार मनायी जाती है। पहली चैत्र नवरात्रि और दूसरी शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri)। शारदीय नवरात्रि या नवरात्र 17 अक्टूबर यानी आज से शुरू हो रहा है। 

नवरात्रि (Shardiya Navratri) के नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की उपासना की जाती है। नवरात्र पूरे भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है और मां दुर्गा के भक्त व्रत रककर मां का उपासना कर कृपा प्राप्त करते हैं।

हिन्‍दू मान्‍यताओं के अनुसार घट स्‍थापना (Ghat Sthapna) के साथ नवरात्रि का आरंभ किया जाता है और कंचक पूजन व नवमी हवन से इसका समापन होता है। नवरात्रि में कलश स्‍थापना (Kalash Sthapna) का विशेष महत्‍व है। कलश स्‍थापना को घट स्‍थापना भी कहा जाता है। नवरात्रि की शुरुआत घट स्‍थापना के साथ ही होती है। घट स्‍थापना शक्ति की देवी का आह्वान है।

मान्‍यता है कि गलत समय में घट स्‍थापना करने से देवी मां क्रोधित हो सकती हैं। रात के समय और अमावस्‍या के दिन घट स्‍थापित करने की मनाही है। घट स्‍थापना का सबसे शुभ समय प्रतिपदा का एक तिहाई भाग बीत जाने के बाद होता है। अगर किसी कारण वश आप उस समय कलश स्‍थापित न कर पाएं तो अभिजीत मुहूर्त में भी स्‍थापित कर सकते हैं। प्रत्येक दिन का आठवां मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त कहलाता है। सामान्यत: यह 40 मिनट का होता है। हालांकि इस बार घट स्‍थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त उपलब्‍ध नहीं है।

नवरात्रि प्रतिपदा तिथि का आरंभ कब से?

नवरात्रि में कलश बैठाने के साथ नवरात्रि पूजन का आरंभ माना जाता है इशलिए कलश शुभ मुहूर्त देखकर बैठना चाहिए। अगर आप भी अपने घर में या पंडाल में कलश बैठाना चाह रहे हैं तो इस बार कलश बैठाने का उत्तम मुहूर्त जान लीजिए। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 16 अक्टूबर की मध्यरात्रि में 1 बजकर 1 मिनट पर अधिकमास समाप्त हो रहा है और आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि लग रही है जो 17 अक्टूबर की रात 9 बजकर 9 मिनट तक रहेगी।

धट स्थापना समय धर्मसिंधु के अनुसार

धर्मसिंधु नामक पुस्तक में बताया गया है कि पतिपदा तिथि की प्रथम 16 घड़ियां और चित्रा नक्षत्र एवं वैधृत योग का पूर्वार्ध भाग घट यानी कलश स्थापना के लिए शुद्ध नहीं होता है। इस गणना के अनुसार इस वर्ष 17 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 25 मिनट तक का समय कलश बैठाने के लिए शुद्ध नहीं रहेगा इसके बाद घट बैठाना शुभ और कल्याणकारी रहेगा।

कलश स्थापना के लिए सही मुहूर्त
  • नवरात्रि कलश स्थापना का शुभ समय चौघड़िया
  • सुबह में 7 बजकर 25 मिनट से कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त शुरू
  • राहुकाल 9 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक।
  • काल चौघड़िया सुबह 6 बजकर 35 मिनट से 8 बजकर 3 मिनट तक।
  • शुभ चौघड़िया 8 बजकर 3 मिनट से 9 बजकर 30 मिनट तक।
  • अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक
  • सुबह 8 बजकर 3 मिनट से 9 बजे तक का समय कलश बैठाने के लिए उत्तम है, इसके बाद अभिजीत मुहूर्त में कलश बैठा सकते हैं।
कलश स्‍थापना की सामग्री

मां दुर्गा को लाल रंग खास पसंद है इसलिए लाल रंग का ही आसन खरीदें। इसके अलावा कलश स्‍थापना के लिए मिट्टी का पात्र, जौ, मिट्टी, जल से भरा हुआ कलश, मौली, इलायची, लौंग, कपूर, रोली, साबुत सुपारी, साबुत चावल, सिक्‍के, अशोक या आम के पांच पत्ते, नारियल, चुनरी, सिंदूर, फल-फूल, फूलों की माला और श्रृंगार पिटारी भी चाहिए।

ऐसे करें कलश की स्थापना

घर के उत्तर पूर्व दिशा में किसी स्थान को अच्छी तरह से साफ कर लें और इसी जगह पर कलश स्थापित करें। उत्तर पूर्व पूजन के लिए सर्वोत्तम दिशा मानी जाती है। कलश स्थापित करने के लिए जब सही मुहूर्त हो तब पहले श्रीगणेश की पूजा करके कलश स्थापित करें। जहां कलश स्थापित करना है वहां एक साफ लाल कपड़ा बिछाएं और नारियल में मौली बांधें एवं कलश पर रोली या चंदन से स्वास्तिक बनाएं।

कलश के अंदर गंगा जल भरें और इसमें आम के पत्ते, सुपारी,हल्दी की गांठ, दुर्वा, पैसे और आम के पत्ते डालें। अब एक तांबे के लोटे पर रोली से स्‍वास्तिक बनाएं। लोटे के ऊपरी हिस्‍से में मौली बांधें। यदि कलश के ऊपर ढक्कन रखना चाहती हैं तो ढक्कन में चावल भर दें, यदि कलश खुला है तो उसमें आम के पत्ते डाल दें। अब इस लोटे में पानी भरकर उसमें कुछ बूंदें गंगाजल की मिलाएं। फिर उसमें सवा रुपया, दूब, सुपारी, इत्र और अक्षत डालें। इसके बाद कलश के बीच में नारियल रखें और दीप जलाकर पूजा करें।

कलश स्‍थापना के लिए मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालकर उसमें जौ के बीज बोएं। अब एक नारियल को लाल कपड़े से लपेटकर उसे मौली से बांध दें। फिर नारियल को कलश के ऊपर रख दें। अब इस कलश को मिट्टी के उस पात्र के ठीक बीचों बीच रख दें जिसमें आपने जौ बोएं हैं। कलश स्‍थापना के साथ ही नवरात्रि के नौ व्रतों को रखने का संकल्‍प लिया जाता है।

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