Chhoti Diwali 2020: छोटी दीपावली का दिन भी है बेहद खास, जानिए पूजन मुहूर्त और कथा

New Delhi: रूप चतुर्दशी (Roop Chaudas) को नरक चतुर्दशी, नरक चौदस (Narak Chaudas), रूप चौदस (Narak Chaturdashi) के नामों से जाना जाता है। इस दिन कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी पर मृत्यु के देवता यमराज की पूजा का विधान है।

इस बार धनतेरस और छोटी दिवाली (Chhoti Diwali) यानी नरक चतुर्दशी (Narak Chaturdashi) को लेकर स्थिति साफ नहीं हैं। कई जगह 12 नवंबर यानी आज धनतेरस (Dhanteras) मनाया जा रहा है, तो कुछ लोग 13 नवंबर को धनतेरस मनाएंगे। इस साल धनतेरस की तिथि की वजह से छोटी और बड़ी दिवाली एक ही दिन मनाई जाएगी। जो लोग 12 नवंबर को धनतेरस मना रहे हैं, वे 13 तारीख को नरक चतुर्दशी मनाएंगे और 14 तारीख को दिवाली। वहीं, जो लोग 13 नवंबर को धनतेरस मनाएंगे, वे दिवाली के दिन ही नरक चतुर्दशी भी मनाएंगे।

नरक चतुर्दशी का पूजन अकाल मृ’त्यु से मुक्ति और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए किया जाता है। एक पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन नरकासुर का वध करके, देवताओं और ऋषियों को उसके आतंक से मुक्ति दिलवाई थी।

रूप चतुर्दशी की पौराणिक कथा

नरक चतुर्दशी को रूप चतुर्दशी भी कहते हैं। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की भी पूजा का विधान है। भगवान श्री कृष्ण का पूजन करने से व्यक्ति को सौंदर्य की प्राप्ति होती है। रूप चतुर्दशी से संबंधित एक कथा भी प्रचलित है। मान्यता है कि प्राचीन समय पहले हिरण्यगर्भ नामक राज्य में एक योगी रहा करते थे। एक बार योगीराज ने प्रभु को पाने की इच्छा से समाधि धारण करने का प्रयास किया।

अपनी इस तपस्या के दौरान उन्हें अनेक कष्टों का सामना करना पडा। अपनी इतनी विभत्स दशा के कारण वह बहुत दुखी होते हैं। तभी विचरण करते हुए नारद जी उन योगी राज जी के पास आते हैं और उन योगीराज से उनके दुख का कारण पूछते हैं। योगीराज उनसे कहते हैं कि, हे मुनिवर मैं प्रभु को पाने के लिए उनकी भक्ति में लीन रहा, परंतु मुझे इस कारण अनेक कष्ट हुए हैं ऎसा क्यों हुआ?

योगी के करूणा भरे वचन सुनकर नारदजी उनसे कहते हैं, हे योगीराज तुमने मार्ग तो उचित अपनाया किंतु देह आचार का पालन नहीं जान पाए। इस कारण तुम्हारी यह दशा हुई है। नारदजी उन्हें कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा अराधना करने को कहते हैं, क्योंकि ऐसा करने से योगी का शरीर फिर पहले जैसा स्वस्थ और रूपवान हो जाएगा। नारद के कथनों के अनुसार योगी ने व्रत किया और व्रत के प्रभाव स्वरूप उनका शरीर पहले जैसा स्वस्थ और सुंदर हो गया। इसलिए इस चतुर्दशी को रूप चतुर्दशी के नाम से जाना जाने लगा।

अन्य कथा 

एक दूसरी कथा के अनुसार रंति देव नामक एक पुण्यात्मा और धर्मात्मा राजा थे। उन्होंने अनजाने में भी कोई पाप नहीं किया था लेकिन जब मृ’त्यु का समय आया तो उनके सामने यमदूत आ खड़े हुए। यमदूत को सामने देख राजा अचंभित हुए और बोले, ‘मैंने तो कभी कोई पाप कर्म नहीं किया फिर आप लोग मुझे लेने क्यों आए हो? आपके यहां आने का मतलब है कि मुझे नरक जाना होगा। आप मुझ पर कृपा करें और बताएं कि मेरे किस अपराध के कारण मुझे नरक जाना पड़ रहा है?’

यह सुनकर यमदूत ने कहा ‘हे राजन्! एक बार आपके द्वार से एक ब्राह्मण भूखा लौट गया था, यह उसी पाप कर्म का फल है।’ इसके बाद राजा ने यमदूत से एक साल का समय मांगा। तब यमदूतों ने राजा को एक वर्ष की मोहलत दे दी। राजा अपनी परेशानी लेकर ऋषियों के पास पहुंचे और उन्हें अपनी सारी कहानी सुनाकर उनसे इस पाप से मुक्ति का उपाय पूछा।

तब ऋषि ने उन्हें बताया कि कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का व्रत करें और ब्राह्मणों को भोजन करवा कर उनके प्रति हुए अपने अपराधों के लिए क्षमा याचना करें। राजा ने वैसा ही किया जैसा ऋषियों ने उन्हें बताया। इस प्रकार राजा पाप मुक्त हुए और उन्हें विष्णु लोक में स्थान प्राप्त हुआ। उस दिन से पाप और नर्क से मुक्ति हेतु भूलोक में कार्तिक चतुर्दशी के दिन का व्रत प्रचलित है।

नरक चतुर्दशी तिथि और स्‍नान का शुभ मुहूर्त
  • चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 13 नवंबर 2020 को शाम 05 बजकर 59 मिनट से
  • चतुर्दशी तिथि समाप्‍त: 14 नवंबर 2020 को दोहपर 02 बजकर 17 मिनट तक.
  • अभ्‍यंग स्‍नान का मुहूर्त: 14 नवंबर 2020 को सुबह 05 बजकर 23 मिनट से सुबह 06 बजकर 43 मिनट तक.
  • कुल अवधि: 01 घंटे 20 मिनट.
नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली का महत्‍व

नरक चतुर्दशी (Narak Chaturdashi) को यम चतुर्दशी (Yam Chaturdashi) और रूप चतुर्दशी (Roop Chatirdashi) या रूप चौदस (Roop Chaudas) भी कहते हैं। यह पर्व नरक चौदस (Narak Chaudas) और नरक पूजा (Narak Puja) के नाम से भी प्रसिद्ध है। आमतौर पर लोग इस पर्व को छोटी दीवाली (Chhot Diwali) भी कहते हैं। इस दिन यमराज की पूजा करने और व्रत रखने का व‍िधान है।

ऐसी मान्‍यता है कि इस दिन जो व्‍यक्ति सूर्योदय से पूर्व अभ्‍यंग स्‍नान यानी तिल का तेल लगाकर अपामार्ग (एक प्रकार का पौधा) यानी कि चिचिंटा या लट जीरा की पत्तियां जल में डालकर स्नान करता है, उसे यमराज की व‍िशेष कृपा म‍िलती है। नरक जाने से मुक्ति म‍िलती है और सारे पाप नष्‍ट हो जाते हैं। स्‍नान के बाद सुबह-सवेरे राधा-कृष्‍ण के मंदिर में जाकर दर्शन करने से पापों का नाश होता है और रूप-सौन्‍दर्य की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि महाबली हनुमान का जन्म इसी दिन हुआ था इसीलिए बजरंगबली की भी विशेष पूजा की जाती है।

नरक चतुर्दशी के दिन स्‍नान की विधि
  • मान्‍यताओं के मुताबिक, नरक से बचने के लिए इस दिन सूर्योदय से पहले शरीर में तेल की मालिश करके स्‍नान किया जाता है।
  • स्‍नान के दौरान अपामार्ग की टहनियों को सात बार सिर पर घुमाना चाहिए।
  • टहनी को सिर पर रखकर सिर पर थोड़ी सी साफ मिट्टी रखें लें।
  • अब सिर पर पानी डालकर स्‍नान करें।
  • इसके बाद पानी में तिल डालकर यमराज को तर्पण दिया जाता है।
  • तर्पण के बाद मंदिर, घर के अंदरूनी हिस्‍सों और बगीचे में दीप जलाने चाहिए।
यम तर्पण मंत्र

यमय धर्मराजाय मृत्वे चान्तकाय च | वैवस्वताय कालाय सर्वभूत चायाय च ||

नरक चतुर्दशी के दिन कैसे जलाएं दीया ?
  • कार्तिक चतुर्दशी की रात यम का दीया जलया जाता है। इस दिन यम के नाम का दीया कुछ इस तरह जलाना चाहिए:
  • घर के सबसे बड़े सदस्‍य को यम के नाम का एक बड़ा दीया जलाना चाहिए।
  • इसके बाद इस दीये को पूरे घर में घुमाएं।
  • अब घर से बाहर जाकर दूर इस दीये को रख आएं।
  • घर के दूसरे सदस्‍य घर के अंदर ही रहें और इस दीपक को न देखें।

नोट: हमारा उद्देश्य किसी तरह के अंधविश्वास को बढ़ावा देना नहीं है। यह लेख लोक मान्यताओं और पाठकों की रुचि को ध्यान में रखकर लिखा गया है।

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