Anant Chaturdashi 1

Malmas: शुरू हुआ अधिकमास, भूल से भी न करें ये कार्य.. जानें क्‍या करना सही और क्‍या गलत?

New Delhi: भगवान विष्‍णु (Lord Vishnu) को सर्वाधिक प्रिय अधिकमास (Adhik Maas or Malmas) की शुरुआत 17 सितंबर से हो चुकी है। बता दें कि अधिक मास 32 महीने, 16 दिन और 4 घटी के अन्तर से आता है। इसे अधिकमास, मलमास (Malmas), मलिम्लुच मास और पुरुषोत्तममास (PurushottamMas) भी कहा जाता है।

पौराणिम मान्‍यताओं के अनुसार, 12 महीनों में वरुण, सूर्य, भानु, तपन, चण्ड, रवि, गभस्ति, अर्यमा, हिरण्यरेता, दिवाकर, मित्र और विष्णु 12 मित्र होते हैं और अधिकमास इनसे अलग होता है। माना जा रहा है कि इस साल अधिकमास (Malmas or Adhik Maas) आश्विस मास में ही 17 सितंबर से लग रहा है। अधिक मास में कुछ कार्यों को करने की सख्‍त मनाही होती है। इस एक महीने में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। आइए जानते हैं इस बारे में खास बातें…

खरमास का अर्थ

खरमास (Kharmas) का अर्थ होता है खराब महीना। यानी वह महीना जब सभी प्रकार के शुभ कार्य बंद हो कर दिए जाएं। इस मास में सूर्य प्रतिकूल होते हैं, इस धारणा के चलते माना जाता है कि हर कार्य में असफलता नजर आती है। अधिक मास (Adhik Mas or Malmas) को पहले बहुत अशुभ माना जाता था। बाद में श्रीहरि ने इस मास को अपना नाम दे दिया। तभी से अधिक मास का नाम पुरुषोत्तम मास हो गया।

विवाह आदि कार्य वर्जित

खरमास (Kharmas) में विवाह आदि शुभ कार्यों पर भी पांबदी होती है। माना जाता है कि इस वक्‍त में किए गए विवाह आदि कार्यों में किसी भी प्रकार के सुख की प्राप्ति नहीं होती। इस प्रकार के रिश्‍ते में किसी प्रकार के शारीरिक सुख की भी प्राप्ति नहीं होती। ऐसे रिश्‍तों पति-पत्‍नी में अनबन रहती है। अगर विवाह करना है तो या तो अधिक मास से पहले करें या फिर उसके बाद करें।

नया व्‍यवसाय आरंभ न करें

अधिक मास (Adhik Mas or Malmas) में नया व्यवसाय या नया कार्य आरंभ न करें। मलमास में नया व्यवसाय आरंभ करने से आर्थिक परेशानियों को बढ़ावा मिलता है। व्‍यापार में पैसों की तंगी बनी रहती है। इसलिए नया काम, नई नौकरी या बड़ा निवेश करने से बचें।

मंगल कार्य मुंडन आदि न करें

इस अवधि में किए गए कार्यों के मंगल परिणाम नहीं आते हैं। इसलिए अधिक मास में कोई भी मुंडन और कर्णवेध या फिर अन्‍य कोई संस्‍कार नहीं करना चाहिए। इस महीने में कोई गृह प्रवेश भी नहीं करना चाहिए। इस अवधि में कोई भी संपत्ति का क्रय या फिर विक्रय नहीं करना चाहिए। ऐसी संपत्ति भविष्‍य में आपका नुकसान करवा देती है।

क्‍या करना शुभ

इस माह में व्रत, दान, पूजा, हवन, ध्यान करने से पाप कर्म समाप्त हो जाते हैं और किए गए पुण्यों का फल कई गुणा प्राप्त होता है। देवी भागवत पुराण के अनुसार मलमास में किए गए सभी शुभ कर्मों का अनंत गुना फल प्राप्त होता है। इस माह में भागवत कथा श्रवण की भी विशेष महत्ता है। पुरुषोत्तम मास में तीर्थ स्थलों पर स्नान का भी महत्त्व है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *