Bheem Praveen Kumar

ताकत संभालना हर किसी के बस की बात नहीं : भीम (प्रवीण कुमार)

लॉकडाउन के चलते महाभारत व रामायण के अलावा अन्य पुराने कई कार्यक्रमों का दिखाया जाना जारी है। Yogesh Kumar Soni भारी डिमांड के बाद दूरदर्शन पर दिखाए जाने के बाद अब कार्यक्रमों को अन्य चैनलों पर भी दिखाया जा रहा है। यह बेहद आश्चर्य की बात है कि पुरानी पीढ़ी के साथ नई पीढ़ी भी इन कार्यक्रमों को बेहद पसंद कर रही है जबकि वो अन्य डारेक्टर/प्रोड्यूसर की बनाई हुई महाभारत देख चुके हैं। इनमें निभाए हर किरदार का चौतरफा प्रशंसा हो रही है। हर किरदार को बहुत प्यार मिल रहा है और प्रशंसक यह जानना चाहते हैं कि वो सभी कलाकार कहां हैं? कैसी थी उनकी जिंदगी व अब वो क्या कर रहे हैं? महाभारत के पात्रों में से भीम का किरदार हमेशा से महत्वपूर्ण माना जाता है। इन्हें बलशाली का पर्यायवाची भी माना गया है। ताकत के बेताज बादशाह भारतीय हथौड़ा और डिस्कस थ्रोअर, फिल्म अभिनेता और राजनीतिज्ञ भीम यानि प्रवीण कुमार से योगेश कुमार सोनी बातचीत की। पेश है कुछ एक्सक्लूसिव अंश…

महाभारत को भीम कैसे मिला था, मतलब आपके इस रोल के लिए कैसे सिलेक्शन हुआ था?

मैं एशियन खेलों में हिस्सा लेने के लिए हैमर थ्रो की प्रैक्टिस कर रहा था उस दौरान मेरी मुलाक़ात एक कास्टिंग डायरेक्टर से हुई थी और उन्होनें मेरी कद-काटी व सेहत देखकर मुझे फिल्म में रोल देने के लिए ऑफर दिया था। तब तो मैं खेलों में व्यस्त था लेकिन करीब साल भर बाद मुझे मुंबई बुलाया गया और कुछ रोल मिलने लगे। लेकिन कुछ समय बाद जब मैं किसी माध्यम से बीआर चोपडा से मिला तो एक बार में बिना किसी ऑडिशन व पूछताछ के वह बोले मिल गया भीम,शूटिंग की तैयारी करो।

आपने शरीर को बलशाली कैसे बनाया और आज के दौर में युवाओं को लेकर क्या कहोगे जिन्हें बॉडी बनाने का शौक है।

लंबाई तो कुदरत की देन है लेकिन मैं मैंने अपने शरीर को बिल्कुल देसी तरीके से बनाया है। मैं प्रतिदिन सुबह तीन बजे उठकर कसरत करा करता था। गांव में कोई जिम जैसी चीज नहीं थी और ना ही तब तक मैंने ऐसी चीज देखी थी। मां घर में जो चक्की अनाज पीसने के लिए इस्तेमाल करती थी, उसी की सिल्लियों का वजन उठाकर ट्रेनिंग करता था। अपने स्वयं अपना ट्रेनर था। रोजाना 9 किलो दूध, आधा किलो देसी घी, 350 ग्राम बादाम, सलाद व जूस के अलावा भोजन का सेवन करता था। लगभग तीन वर्षों में मैंने अपना शरीर ऐसा बना लिया था कि मेरे जानने वाले मुझे बिल्कुल भी नहीं पहचान पाए थे। बेहतर शरीर व अधिक लंबाई की वजह से शरीर प्रभावशाली बन गया था जो भीम के किरदार के लिए बिल्कुल फिट माना जाने लगा था। आज के युवाओं के पास बॉडी बनाने का कई विकल्प हैं लेकिन कुछ लोग जल्दी और बेहतर शरीर बनाने के चक्कर में तमाम तरह के पावडर व सप्लीमेंट का प्रयोग करते हैं जिससे कुछ समय बाद उनके शरीर खराब हो जाते हैं। जितना देसी कसरत और खुराक को अपनाओगे उतना ही बेहतर शरीर बनेगा जो जिंदगीभर सही रहेगा। इसके अलावा कुछ लोग अपनी ताकत का दुरुपयोग करते हैं,ताकत संभालना हर किसी के बात नही।

अपने स्पोर्टस् करियर के बारे में बताइये?

मैंने कई खिताब जीते हैं और 1966 के कॉमनवेलथ गेम्स में डिस्कस थ्रो के लिए मेरा सिलेक्शन हुआ था। तब भारत ने एथलेटिक्स में 11 मेडल जीते थे जिसमें 5 गोल्ड, 5 ब्रोंज मेडल्स थे। मुझे नेशनल चैंपियनशिप में 7 स्वर्ण पदक, एशियन चैंपियशिप में 3 स्वर्ण पदक,2 रजत पदक व 1 कांस्य पदक,इंटरनेशनल लेवल पर तीन स्वर्ण,एक कांस्य पदक व तीन बार भारत की ओर से कप्तानी भी की है। 1968 में अर्जुन अवार्ड व महाराज रणजीत सिंह अवार्ड से सम्मानित हो चुका हूं।

बीआर चोपडा की महाभारत के बाद कई प्रोड्यूसर/डॉरेक्टर ने महाभारत बनाई लेकिन जितना आपके वाली पसंद की गई उतना वो दर्शकों को आकर्षित नहीं कर पाई। क्या कारण है?

हर कोई अपनी ओर से बेहतर करने की कोशिश करता है लेकिन आजकल के कलाकार पुराने कलाकारों के स्टाइल को कॉपी करते हैं। जैसे नई कार्यक्रमों में जिन्होनें भी भीम का रोल किया वो मेरे जैसी एक्टिंग करने के चक्कर में न मुझे अच्छे तरीके के कॉपी कर पाए और न ही स्वयं का प्रर्दशन कर पाए। जिस वजह से उनकी एक्टिगं अधूरी हो जाती है। इसके अलावा हमारे जैसी महाभारत बननी संभव नहीं है चूंकि उसमें काम किए हुए हर किरदार ने पात्रों में डूब कर काम किया है। हम लोग पात्र को जिया करते थे।

अपने बॉलीवुड और राजनीतिक सफर के बार में कुछ बताइये?

मैनें करीब पचास फिल्मों में अभिनय किया है जिसमें छोटे-बडे रोल दोनों है। इसके अलावा अरविंद केजरीवाल के कहने से मैंने 2013 में दिल्ली विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी के टिकट से वजीरपुर सीट से चुनाव लड़ा लेकिन हार गया था इसके बाद फिर आप छोड़ बीजेपी जॉइन कर ली थी। फिलहाल 73 साल की उम्र हो चली है और ज्यादा काम करने नहीं सोचता इसलिए रिटायरमेंट लेकर आराम की जिंदगी जी रहा हूं।

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