महाभारत से हर प्रकार की प्रेरणा मिलती है : गूफी पेंटल

Gufi Paintal

जैसा कि लॉकडाउन के चलते रामायण, महाभारत व कृष्णा जैसे कार्यक्रमों को दिखाया जा रहा है। सभीYogesh Kumar Soni कार्यक्रमों को दर्शक पहले की तरह प्यार दे रहे हैं। इन कार्यक्रमों में किरदार निभाने वाला हर कलाकार अमर हो गया। इनमें से कुछ ऐसे कलाकार हैं जिनकी एक्टिंग व डायलॉग को नई पीढ़ी भी बहुत पसंद कर रही है। महाभारत में मामा शकुनी के किरदार में दिखाई गई हर चाल में सियासत का रंग भरा होता है। हर बात में पटखनी देने वाले कास्टिंग डायरेक्टर और प्रोडक्शन डिज़ाइनर, मामा शकुनी का किरदार निभाने वाले अभिनेता गूफी पेंटल से योगेश कुमार सोनी से एक्सक्लूसिव बातचीत के मुख्य अंश…

उस दौर में दर्शकों ने आपको जितना प्यार दिया उतना अब भी मिल रहा है। नई पीढ़ी भी आपके द्वारा निभाए गए किरदारों को पसंद कर रही है। कैसा लग रहा है आपको?

उस जमाने में जब दर्शक रामायण और महाभारत प्रसारित होता था तो ऐसा ही लगता था कि लॉकडाउन हो गया था। हर कोई इन कार्यक्रमों को देखता था लेकिन अब फिर ऐसा लग रहा है कि हम पहले के दौर में पहुंच गए। लेकिन पहले महाभारत की वजह से लॉकडाउन हुआ था और इस बार लॉकडाउन की वजह से महाभारत हो रही है। कार्यक्रम इसलिए पसंद किया जा रहा है कि हर एपिसोड़ को बड़ी मेहनत से बनाया गया था और यह दर्शकों की उदारता है कि वो अभी उतना ही प्यार दे रहे हैं। लेकिन यह उम्मीद से कहीं परे था कि लोग दोबारा इतना प्यार करेंगे कि यह सारे कार्यक्रम टीआरपी का वर्ल्ड रिकॉर्ड बना देंगे।

आपके मुताबिक अब ऐसे धार्मिक कार्यक्रम नही बनते जो दर्शकों को पसंद आए?

ऐसा नही है…लेकिन हम इस बात से भी इनकार नही कर सकते कि रामानंद सागर और बीआर चोपड़ा साहब जैसा तजुर्बा हर किसी के पास नही हो सकता है। आजकल पच्चीस-तीस साल का कोई भी प्रोड्यूसर ऐसे धार्मिक को कार्यक्रम सिर्फ एक नाटक के रुप में लेकर बनाते हैं। हमारे दौर में हर शॉट या सीन में इतना एहसास होता था कि जब दर्शक उसमें पूर्ण रुप से डूब न जाए तब वो सीन पूरा नही माना जाता था। उदाहरण के तौर पर कोई ऐसा सीन हैं जिसमें कलाकार रो रहा है और यदि उसको देखकर दर्शक न रोए तो मजा ही नही आता था। इस ही वजह से दर्शक सकारात्मक किरदार के निभाए रोल से प्यार करने लगते थे और नकारात्मक किरदार निभाने वाले से नफरत। इसके अलावा पहले एक सप्ताह में एक ही एपिसोड बनता था और अब इस हाईटैक दौर में हर डारेक्टर व प्रोड्यूसर ने कई जगह काम पकडा होता है तो वह हर चीज में व्यवसाय ढूंढता जिस वजह से ठहरावट के साथ दर्शकों को एहसास में नही डूबा पाता।

क्या बदलते दौर और समय के अभाव में पहले जैसे कार्यक्रम बनने संभव नही?

देखिये बदलते दौर में सब तेजी से भाग रहा है और यह बात सही है कि इस भागती दौडती दुनिया में समय का अभाव है लेकिन यदि रामायण और महाभारत से आपको यह बात समझ में आ जाएगी कि थोडे से सीन के बाद चौपाई और दोहे गाकर उस घटना को इस तरह से प्रदर्शित किया जाता था कि दर्शक उससे पूर्ण रुप से जुड जाता था। दर्शक के चेहरे के हावभाव से देखकर लगता है कि जैसे वो वहां स्वंय उपस्थित होकर देख रहा हो। दरअसल अब एडिटिंग और ग्राफिक्स का भी जमाना है। डायलॉग से ज्यादा इफेक्ट्स व म्यूजिक को डाला जाता है। पहले के कार्यक्रम में रुकावट,धैर्य और विश्वास के साथ उतारे जाते थे। अब फटाफट का जमाना है। पहले सब थोडे में ही खुश थे। आज के दौर के फिल्मी सितारे तो अपनी बनी हुई फिल्म तक नही देखते और हम हर सीन को कई बार देखते थे उसको समझते थे और यदि कोई गलती महसूस होती थी तो अगली बार सुधारने की कोशिश करते थे।

जब रामानंद सागर की रामायण को लोकप्रियता मिली तो क्या आपको महाभारत से भी वैसी ही उम्मीद थी?

आपने यह प्रश्न अच्छा पूछा। मुझे यह भलिभांति ज्ञात है कि महाभारत के प्रसारण के पहले सप्ताह में सब डरे हुए थे कि कैसा रिजल्ट आएगा, लेकिन एक हफ्ते के बाद ही इतनी टीआरपी आई कि सब भौचक्के रह गए। दर्शकों ने इतना पसंद किया कि भंयकर रिकार्ड बनते चले गए। देश का सर्वाधिक देखने वाला प्रोग्राम बन गया। हम किसी भी गली-मौहल्ले या चौराहे पर चले जाते थे तो हर कोई बस महाभारत की ही बात करता था। ऐसा लगता था कि पूरी दुनिया एक साथ टीवी देख रही हो चूंकि सडकें बिल्कुल खाली हो जाती थी।

आपने शकुनी मामा एक दमदार किरदार निभाया। कोई एक अच्छा या बुरा किस्सा बताइए।

तमाम किस्से हैं लेकिन एक तो बेहद हास्यप्रद है। उस जमाने में मोबाइल या किसी भी प्रकार की सोशल मीडिया का दौर नही था तो प्रशसंक अपने पसंदीदा कलाकार को चिट्ठियां लिखा करते थे। हर रोज तमाम चिठ्ठयां मुझे मिलती थी और जैसा कि शकुनी का किरदार लंगडा था तो एक दिन किसी सज्जन ने मुझे धमकी भरी चिठ्ठी में धमकाते हुए कहा था कि ‘ओए लंगडे तूने कौरवों और पांडवों के बीच फूट डालकर लडवाया दिया।जुआ करवाया भी करवाया और सबसे गंदा काम द्रौपदी का चीरहरण करवाया। और तो और भगवान श्रीकृष्ण भगवान की बात भी नहीं मानी और युद्ध करवा दिया। अगर तूने यह जल्दी बंद नही करवाया तो तेरी दूसरी टांग भी तोड़कर पूरा ही अपहाईज बना दूंगा। इस के विषय में मैंने सबको बताया और हम इतने हंसे कि जिंदगी में आज तक इतना कभी नही हंसे। यह बात पूरी बॉलीवुड में फैल गई और मेरा मजाक बनाया जाने लगा। यह बात मैं कभी नही भूल सकता।

अपने सफर के बारे में कुछ बताइये।

अभिनेता बनना मेरा तीसरा अध्याय था। सबसे पहले मैंने मकैनिकल इंजिनियरिंग करके नौकरी करता था इसके बाद मेरा मन नही लगा तो अपने जीवन के दूसरे अध्याय मे फौजी बना। फौज में भर्ती के लिए मैंने दो बार परीक्षा पास की और दूसरी बारी में मैंने आर्टिलरी रेजिमेंट ज्वाइन की थी। यहां भी मन नही लगा तो मैं सिनेमा जगत की ओर चला गया। फिल्में देखने का इतना शौक था कि एक ही में चार फिल्में देखता था। फिर बोम्बे(अब मुंबई) आ गया। किसी फिल्मी कंपनी में असिस्टेंट डायरेक्टर की नौकरी की वो भी मात्र दौ सौ रुपये में। उस जमाने में आठ रुपया कमाता था लेकिन फिल्मों आने की लगन के चक्कर में सब त्याग दिया था और सीखने की ललक में दौ सौ रुपये की पगार पर काम करना को राजी हो गया था। इसके बाद बीआर चोपडा साहब से मुलाकात हो गई और मैने लगभग बीस साल बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर उनके साथ काम किया साथ ही कुछ फिल्मों में बतौर कलाकार भी काम किया। चोपडा साहब ने महाभारत के लिए मेरा ऑडिशन लिया जिसमें मुझे शकुनी के रोल के लिए सैलेक्ट किया। महाभारत के चौरानवे एपिसोड बने और 2 अक्टूबर 1988 से लेकर 15 जुलाई 1990 तक चलें। इन दिनों फिल्मी कलाकारों से ज्यादा इज्जत रामायण और महाभारत के किरदारों को मिलनी शुरु हो गई थी।

आपकी एक फिल्म भी आने वाली हैं।

ऋषि कपूर और जूही चावला के साथ ‘शर्मा दी नमकीन’ नाम से एक फिल्म आनी थी जो 2018 से रुकी हुई है। दरअसल ऋषि कपूर बीमार पड गए थे फिर वो लगभग एक साल के लिए विदेश चले गए थे और शूटिंग रुक गई थी।आने के बाद कुछ काम शुरु हुआ तो आस्मिक मौत हो गई। मैं इस फिल्म में ऋषि के बड़े भाई का रोल कर रहा था। ऋषि की मौत से बहुत दुखी हूं, वो बेहद जिंदादिल इंसान थे। असल जिंदगी में भी उसनें मुझे बडा भाई माना था। हर त्यौहार के बधाई पर ऋषि का फोन जरुर आता था।

अपने प्रशंसकों के लिए कोई संदेश?

एक बार फिर इतना सम्मान और प्यार देने के लिए शुक्रिया। कोरोना से बचें। ज्यादातर घर में रहें।मास्क और सेनेटाइज का प्रयोग करें जिससे अपने व अपनों को सुरक्षित रख सकें। शासन-प्रशासन द्वारा दिए दिशा-निर्देशों का पालन करें जिससे हम जल्दी ही इस वॉयरस से लड़ते हुए खत्म कर पाएं।